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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय|
संदर्भ: हाल ही में, भारत सरकार ने भारतीय निर्यातकों की पहुँच का विस्तार वैश्विक बाजारों तक करने के उद्देश्य से निर्यात संवर्धन मिशन (EPM) के तहत बाजार पहुँच सहायता (MAS) दिशानिर्देशों का शुभारंभ किया।
अन्य संबंधित जानकारी
- यह निर्यात संवर्धन मिशन के उन ग्यारह घटकों में से पहला घटक है, जिसके लिए दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।
- शेष दस घटकों के 31 जनवरी, 2026 तक अधिसूचित होने की उम्मीद है।
- बाजार पहुँच सहायता घटक के लिए 2025-26 से 2030-31 तक छह साल की अवधि हेतु ₹4,531 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जिसमें से वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिए ₹500 करोड़ निर्धारित हैं।
- इस राशि में से ₹330 करोड़ का उपयोग पिछली बाजार पहुँच पहल (MAI) योजना की लंबित देनदारियों को चुकाने के लिए किया जाएगा।
बाजार पहुँच सहायता(MAS) दिशानिर्देश
- बाजार पहुँच सहायता दिशानिर्देशों को निर्यात संवर्धन मिशन की ‘निर्यात दिशा‘ उप-योजना के तहत लागू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य भारतीय निर्यातकों, विशेष रूप से MSMEs, पहली बार निर्यात करने वालों और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की फर्मों के लिए अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक पहुँच का विस्तार करना है।
- बाजार पहुँच सहायता (MAS) पहल के अंतर्गत क्रेता-विक्रेता बैठकों, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेलों, प्रदर्शनियों और व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के साथ-साथ भारत में आयोजित होने वाले विशाल ‘रिवर्स बायर-सेलर मीट’ के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी।
- सहायता की अधिकतम राशि प्रत्येक क्रेता-विक्रेता बैठक या व्यापार प्रतिनिधिमंडल के लिए ₹5 करोड़ और प्रत्येक मेगा ‘रिवर्स बायर-सेलर मीट’ के लिए ₹10 करोड़ है।
- सरकारी वित्तपोषण आमतौर पर स्वीकृत लागत का 60 प्रतिशत होगा, जबकि शेष 40 प्रतिशत का योगदान उद्योग द्वारा किया जाएगा।
- सहायता प्राप्त आयोजनों के लिए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की न्यूनतम 35 प्रतिशत भागीदारी अनिवार्य कर दी गई है।
- प्रत्येक फर्म एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम तीन क्रेता-विक्रेता बैठकों के लिए सहायता प्राप्त कर सकती है, जबकि MSMEs अधिकतम चार बैठकों में भाग ले सकते हैं।
- लाभों का व्यापक वितरण सुनिश्चित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रति फर्म केवल दो प्रतिनिधिमंडल को ही दी जाएगी।
- पात्र निर्यातकों को हवाई किराए की आंशिक प्रतिपूर्ति की जाएगी, जिसमें ₹75 लाख तक के टर्नओवर वाले छोटे निर्यातकों के लिए विशेष सहायता का प्रावधान है।
निर्यात संवर्धन मिशन(EPM)के बारे में

- इस मिशन की घोषणा केंद्रीय बजट 2025 में की गई थी और नवंबर 2025 में कैबिनेट ने इसे मंजूरी दी। इसका उद्देश्य भारत के निर्यात को बढ़ावा देना है।
- इसे वाणिज्य विभाग, MSME मंत्रालय और वित्त मंत्रालय द्वारा विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों, निर्यात प्रोत्साहन परिषदों (EPCs), कमोडिटी बोर्डों और अन्य उद्योग संघों के समन्वय से संयुक्त रूप से लागू किया जा रहा है।
- निर्यात संवर्धन मिशन के लिए 2025-26 से 2030-31 की अवधि हेतु ₹25,060 करोड़ का कुल परिव्यय निर्धारित किया गया है।
- यह मिशन दो मुख्य स्तंभों पर आधारित है:
- निर्यात प्रोत्साहन (वित्तीय सहायता) ब्याज में छूट और ऋण सहायता के माध्यम से निर्यात वित्तपोषण की लागत को कम करने पर केंद्रित है।
- निर्यात दिशा (गैर-वित्तीय सहायता): यह निर्यातकों के लिए बाजार पहुँच, क्षमता निर्माण और संस्थागत सहायता पर केंद्रित है।
निर्यात संवर्धन मिशन के उद्देश्य
- प्राथमिकता वाले और उभरते वैश्विक बाजारों में भारतीय निर्यातकों की पहुँच में सुधार करना।
- सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) और पहली बार निर्यात करने वालों को बाजार में प्रवेश संबंधी बाधाओं को दूर करने में सहायता प्रदान करना।
- व्यवस्थित और परिणाम-उन्मुख हस्तक्षेपों के माध्यम से क्रेताओं के साथ जुड़ाव बढ़ाना।
मिशन का महत्त्व
- यह निर्यात प्रोत्साहन के लिए पूर्वानुमेय और दीर्घकालिक नीतिगत सहायता प्रदान करता है।
- यह बढ़ते संरक्षणवाद और टैरिफ के बीच वैश्विक बाजारों में भारत की उपस्थिति को सुदृढ़ करता है।
- यह अनिवार्य आरक्षण और वित्तीय सीमाओं के माध्यम से MSMEs और छोटे निर्यातकों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करता है।
- यह डिजिटल प्लेटफॉर्म और अनिवार्य फीडबैक तंत्र के माध्यम से जवाबदेही में सुधार करता है।
- यह कृषि, विनिर्माण और उभरती सेवाओं सहित प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए सहायता प्रदान करता है।
Source:
Thehindu
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