संबंधित पाठ्यक्रम

सामान्य अध्ययन-2: सरकारी नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन से संबंधित विषय। 

संदर्भ: हाल ही में, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने फार्मास्युटिकल और क्लिनिकल अनुसंधान क्षेत्र में नियामक बोझ को कम करने और ‘व्यापार सुगमता’  को बढ़ावा देने के लिए नई औषधियां और नैदानिक परीक्षा (NDCT) नियम, 2019 में महत्वपूर्ण संशोधनों को अधिसूचित किया।

अन्य संबंधित जानकारी

• मौजूदा नियामक ढांचे के तहत, फार्मास्युटिकल कंपनियों को परीक्षण, अनुसंधान या विश्लेषण के लिए कम मात्रा में औषधियों के निर्माण हेतु केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) से ‘परीक्षण लाइसेंस’ प्राप्त करना अनिवार्य था।

• CDSCO प्रतिवर्ष लगभग 30,000–35,000 परीक्षण लाइसेंस आवेदनों की समीक्षा करता है, जिससे प्रक्रियात्मक विलंब होता था।

प्रस्तावित महत्वपूर्ण  संशोधन

• परीक्षण लाइसेंस के स्थान पर ‘पूर्व-सूचना’: गैर-व्यावसायिक निर्माण के लिए परीक्षण लाइसेंस की आवश्यकता को पूर्व-सूचना तंत्र से प्रतिस्थापित कर दिया गया है।

  • फार्मास्युटिकल कंपनियाँ अब CDSCO को ऑनलाइन सूचना देकर करके औषधि निर्माण  का कार्य शुरू कर सकती हैं।
  • अपवाद: उच्च जोखिम वाली औषधिएं जैसे कि साइटोटॉक्सिक, नारकोटिक और साइकोट्रोपिक पदार्थों के लिए परीक्षण लाइसेंस की आवश्यकता होगी।

• नियामक समय-सीमा में कटौती: इस सुधार से औषधि निर्माण में लगने वाले समय में कम से कम 90 दिनों की बचत होने की अपेक्षा है।

  • जिन श्रेणियों में परीक्षण लाइसेंस अनिवार्य बना हुआ है, वहाँ वैधानिक प्रोसेसिंग की समय-सीमा को 90 दिनों से घटाकर 45 दिन कर दिया गया है।

• कम जोखिम वाले BA/BE अध्ययनों के लिए छूट: अब नैदानिक अनुसंधान में तेजी लाने के लिए, कुछ कम जोखिम वाले जैव-उपलब्धता/जैव-तुल्यता (BA/BE) अध्ययनों के लिए पूर्व अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी।

  • ऐसे अध्ययन अब CDSCO को एक साधारण ऑनलाइन सूचना के आधार पर शुरू किए जा सकते हैं, जिससे विशेष रूप से जेनेरिक फार्मास्युटिकल उद्योग को लाभ होगा।

डिजिटल सक्रियण और कार्यान्वयन

• इसके लिए समर्पित ऑनलाइन मॉड्यूल निम्नलिखित प्लेटफार्मों पर उपलब्ध कराए जाएंगे:

  • राष्ट्रीय सिंगल विंडो सिस्टम 
  • सुगम (SUGAM) पोर्टल

• सुगम पोर्टल नियामक सूचनाओं को पारदर्शी तरीके से जमा करने और ट्रैक करने में सक्षम बनाता है तथा नियामक अधिकारियों द्वारा जारी किए गए परमिट और लाइसेंस का एक व्यापक डेटाबेस बनाए रखता है।

संशोधन का महत्व

• नियामक बोझ में पर्याप्त कमी।

• नैदानिक अनुसंधान और औषधि विकास की तीव्र शुरुआत।

• CDSCO की जनशक्ति  का इष्टतम उपयोग।

• भारत के औषधि नियामक ढांचे का वैश्विक सर्वोत्तम पद्धतियों के साथ संरेखण।

• सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए, फार्मास्युटिकल अनुसंधान एवं विकास (R&D) के वैश्विक केंद्र के रूप में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करना।

Source:
PIB
The Hindu
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CDSCO

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