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सामान्य अध्ययन-2: भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वालेद्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा  करार।

संदर्भ: भारत और पांच नॉर्डिक देशों नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, आइसलैंड और डेनमार्क ने हरित प्रौद्योगिकी, नवाचार, व्यापार, धारणीयता तथा वैश्विक अभिशासन में सहयोग को बढ़ाने के लिए ओस्लो में तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन का आयोजन किया।

भारत -नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के बारे में 

• भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन भारत और पांच नॉर्डिक देशों — नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, आइसलैंड और डेनमार्क के बीच एक उच्च-स्तरीय बहुपक्षीय मंच है।

• प्रथम शिखर सम्मेलन वर्ष 2018 में स्टॉकहोम में, द्वितीय वर्ष 2022 में कोपेनहेगन में और तृतीय वर्ष 2026 में ओस्लो (नॉर्वे) में आयोजित किया गया था।

• अगले भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन की मेजबानी फिनलैंड करेगा।

शिखर सम्मेलन के मुख्य परिणाम 

• हरित प्रौद्योगिकी और नवाचार रणनीतिक साझेदारी: भारत-नॉर्डिक संबंधों को उन्नत करते हुए ‘हरित प्रौद्योगिकी और नवाचार रणनीतिक साझेदारी’ का रूप दिया गया।

  • इस साझेदारी का उद्देश्य स्वच्छ एवं हरित प्रौद्योगिकियों, ई-गतिशीलता, चक्रीय अर्थव्यवस्था और सतत औद्योगिक विकास में सहयोग को बढ़ाना है।

• व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग: नॉर्डिक देश भारत- EFTA TEPA फ्रेमवर्क का लाभ उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

  • रक्षा औद्योगिक गलियारों में नॉर्डिक रक्षा फर्मों के लिए भारत ने 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के अवसरों की पेशकश की और पोत निर्माण, स्वच्छ ऊर्जा, स्वास्थ्य देखभाल तथा उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों में अधिक निवेश का आमंत्रण दिया।
  • नेताओं ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते और भारत- EFTA TEPA फ्रेमवर्क के माध्यम से सुदृढ़ व्यापार, निवेश और लचीले आपूर्ति-श्रृंखला संबंधों पर बल दिया।

• क्षेत्र-विशिष्ट सहयोग

  • आइसलैंड: भू-तापीय ऊर्जा और मत्स्यिकी 
  • नॉर्वे: नीली अर्थव्यवस्था, पोत परिवहन और आर्कटिक मामले
  • स्वीडन: उन्नत विनिर्माण और रक्षा नवाचार 
  • फिनलैंड: एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता), दूरसंचार, डिजिटलीकरण और 5G/6G प्रौद्योगिकियाँ
  • डेनमार्क: साइबर सुरक्षा और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियाँ 

• रणनीतिक और वैश्विक मुद्दे: नेताओं ने नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था, बहुपक्षवाद और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के विस्तार सहित वैश्विक संस्थानों के व्यापक सुधार के प्रति अपने समर्थन को दोहराया। 

  • नॉर्डिक देशों ने एक सुधरे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए अपने समर्थन को दोहराया।
  • भारत और नॉर्डिक राष्ट्रों ने सभी रूपों में आतंकवाद की कड़ी निंदा की और आतंकवाद के वित्तपोषण तथा सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।
  • नेताओं ने रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया में जारी तनाव पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया तथा संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान पर बल दिया।

• आर्कटिक और नीली अर्थव्यवस्था सहयोग: ध्रुवीय अनुसंधान, जलवायु अध्ययन और सतत आर्कटिक अभिशासन सहित आर्कटिक सहयोग एक महत्वपूर्ण एजेंडा क्षेत्र के रूप में उभरा।

  • विचार-विमर्श में ‘हिमाद्रि’ और ‘इंडआर्क’ (IndARC) जैसी वैज्ञानिक पहलों के माध्यम से आर्कटिक में भारत की भागीदारी को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
  • दोनों पक्ष समुद्री समाधानों, बंदरगाह आधुनिकीकरण और भारत की ‘सागरमाला’ तथा ‘महासागर’ (MAHASAGAR) पहलों के माध्यम से नीली अर्थव्यवस्था के सहयोग को विस्तार देने पर भी सहमत हुए।

• अनुसंधान, नवाचार और प्रतिभा गतिशीलता: भारत और नॉर्डिक देश विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, प्रयोगशालाओं और स्टार्टअप इकोसिस्टम प्रणालियों के बीच सहयोग को मजबूत करने पर सहमत हुए।

  • नेताओं ने स्टेम (STEM – विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) अनुसंधान, नवाचार, कौशल विकास तथा छात्रों एवं पेशेवरों की गतिशीलता में सहयोग पर बल दिया।
  • भारत और फिनलैंड ने गांधीनगर में ‘विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच 2026’  की संयुक्त मेजबानी करने की भी घोषणा की।
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