संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-2: कार्यपालिका और न्यायपालिका की संरचना, संगठन और कार्यप्रणाली।
सामान्य अध्ययन -3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन।
संदर्भ: हाल ही में, उच्चतम न्यायालय ने देश में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM) नियमों के “असमान” अनुपालन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जब तक क्रियान्वयन की बाधाएं मौजूद हैं, तब तक वर्तमान पीढ़ी आगे होने वाले विधायी सुधारों की प्रतीक्षा नहीं कर सकती।
अन्य संबंधित जानकारी
- न्यायमूर्तियों की एक पीठ ने भोपाल नगर निगम द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM) नियम, 2016 के अनुपालन से संबंधित राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के आदेशों की अपीलों पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश जारी किए।
- यह आदेश ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026’ के लागू होने से पहले दिया गया है। ध्यातव्य है कि ये नियम 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होंगे।
- न्यायालय ने उल्लेख किया कि स्रोत पर अपशिष्ट पृथक्करण (गीला, सूखा, हानिकारक) कई क्षेत्रों में अभी भी अधूरा है और बड़े डंपसाइट अभी भी अस्तित्व में हैं, यहाँ तक कि महानगरों में भी।
उच्चतम न्यायालय के निर्देशों से संबंधित मुख्य बिंदु
- शासन और संस्थागत जवाबदेही: स्थानीय प्रतिनिधियों (पार्षदों, महापौरों, निगम पार्षदों, वार्ड सदस्यों) को स्रोत-पृथक्करण शिक्षा के लिए प्रमुख सुविधाप्रदाता के रूप में नामित किया गया है।
- उन्हें ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM) नियम, 2026 को लागू करने में प्रत्येक नागरिक को नामांकित करने की वैधानिक जिम्मेदारी दी गई है।
- जिला प्रशासन की भूमिका: जिला कलेक्टरों को ठोस अपशिष्ट अवसंरचना ऑडिट करना चाहिए और नगर निकायों तथा ग्राम पंचायतों में अपशिष्ट प्रबंधन की निगरानी करनी चाहिए।
- उन्हें उच्च अधिकारियों को गैर-अनुपालन की रिपोर्ट करनी चाहिए और अनुपालन रिपोर्ट में फोटोग्राफिक साक्ष्य प्रस्तुत करने चाहिए।
- स्थानीय निकाय: शहरी स्थानीय निकायों को 100% अनुपालन के लिए अतिरिक्त समय-सीमा घोषित करनी चाहिए और ‘थोक अपशिष्ट उत्पादकों’ को नियमों की जानकारी देनी चाहिए, जिन्हें 31 मार्च, 2026 तक अनुपालन करना अनिवार्य है।
- उन्हें जन जागरूकता अभियान शुरू करने का भी निर्देश दिया गया है।
- प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड: प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को चार-चरणीय पृथक्करण (गीला, सूखा, स्वच्छता और विशेष देखभाल अपशिष्ट) के लिए बुनियादी ढांचे की पहचान करनी चाहिए और उसे त्वरित गति से तैयार करना चाहिए।
- पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय: मंत्रालय को नियम 33 के तहत विद्यालयी पाठ्यक्रम में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को एकीकृत करने का निर्देश दिया गया है।
- जागरूकता बढ़ाने के लिए SWM नियम, 2026 के सार का स्थानीय भाषाओं में अनुवाद किया जाना चाहिए।
- न्यायिक अनुपालन: उच्च न्यायालयों और अधिकरणों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके अधिकार क्षेत्र में 1 अप्रैल, 2026 से पूर्ण अनुपालन हो।
- प्रवर्तन तंत्र: न्यायालय ने निर्णय दिया कि गैर-अनुपालन को अब प्रशासनिक चूक नहीं माना जाएगा और तीन-टियर प्रवर्तन प्रणाली पेश की।
- इसमें तत्काल जुर्माना, निरंतर उल्लंघन के लिए आपराधिक अभियोजन और देखरेख में विफल रहने वाले अधिकारियों को जवाबदेही ठहराना शामिल है।
- न्यायालय ने यह भी कहा कि ठोस अपशिष्ट उल्लंघन दंडात्मक अपराध हैं और वास्तविक समय में प्रवर्तन के लिए मोबाइल कोर्ट तैनात किए जा सकते हैं।
- व्यावहारिक और जागरूकता उपाय: अनिवार्य अभियान नागरिकों के बीच अपशिष्ट न्यूनीकरण और पृथक्करण जागरूकता को बढ़ावा देंगे।
- न्यायालय ने घरेलू कंपोस्टिंग, सुरक्षित स्वच्छता अपशिष्ट प्रबंधन और क्षेत्रीय भाषाओं में नियमों के अनुवाद पर भी जोर दिया।
उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का महत्व
- जीवन के अधिकार का महत्व: यह स्थापित करता है कि स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के मूल अधिकार का हिस्सा है।
- सख्त प्रवर्तन की ओर बदलाव: यह सलाहकारी अनुपालन से जुर्माने, आपराधिक दायित्व और आधिकारिक जवाबदेही के माध्यम से प्रवर्तनीय अपशिष्ट शासन की ओर संक्रमण का प्रतीक है।
- बहु-स्तरीय जवाबदेही: यह निर्वाचित प्रतिनिधियों, जिला प्रशासन, नियामकों, न्यायपालिका और नागरिकों को शामिल करते हुए एक ‘संपूर्ण-सरकार’ ढांचा तैयार करता है।
- बढ़ते अपशिष्ट के बीच तात्कालिकता: तीव्र शहरीकरण और आर्थिक विकास से बढ़ते अपशिष्ट उत्पादन के कारण तत्काल कार्रवाई (“अभी नहीं तो कभी नहीं”) पर जोर देता है।
- सशक्त पर्यावरणीय शासन: यह SWM नियम, 2026 से पहले संस्थानों को तैयार करता है और भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा और पर्यावरणीय विश्वसनीयता को बढ़ावा देता है।
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM) नियम, 2026 के बारे में
- केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM) नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं।
- ये नियम 1 अप्रैल, 2026 को लागू होंगे और SWM नियम, 2016 को प्रतिस्थापित करेंगे।
- उद्देश्य:
- SWM नियम, 2016 को अधिक सख्त नियामक व्यवस्था से बदलना।
- लैंडफिल-आधारित निपटान से चक्रीय अर्थव्यवस्था दृष्टिकोण की ओर बढ़ना।
- न्यूनीकरण (Reduction), पुन: उपयोग (Reuse), पुनर्चक्रण (Recycling) और स्रोत पर प्रसंस्करण को बढ़ावा देना।
- नगर पालिकाओं की जिम्मेदारी से साझा कानूनी जवाबदेही की ओर बढ़ना।
- प्रवर्तनीय अनुपालन सुनिश्चित करना और जुर्माना लगाना।
SWM नियम 2026 की मुख्य विशेषताएं
- अपशिष्ट पदानुक्रम और चार-चरणीय पृथक्करण: एक अपशिष्ट पदानुक्रम पेश करता है: निवारण → न्यूनीकरण → पुन: उपयोग → पुनर्चक्रण → रिकवरी → निपटान (अंतिम विकल्प)। पृथक्करण को गीला-सूखा से बढ़ाकर चार श्रेणियों में विस्तारित किया गया है: गीला अपशिष्ट, सूखा अपशिष्ट, स्वच्छता अपशिष्ट (जैसे सैनिटरी टॉवल, टैम्पोन, कंडोम) और विशेष-देखभाल अपशिष्ट (जैसे दवाएं, पेंट के डिब्बे, बल्ब, ट्यूब लाइट)।
- शहरी स्थानीय निकायों को हरे कूड़ादान (गीला अपशिष्ट), नीले कूड़ादान (सूखा अपशिष्ट) और लाल कूड़ादान (सार्वजनिक शौचालयों में स्वच्छता अपशिष्ट) देने होंगे।
- थोक अपशिष्ट उत्पादक (BWG) जवाबदेही: थोक उत्पादकों को ऐसी संस्थाओं के रूप में परिभाषित किया गया है जिनका क्षेत्रफल ≥ 20,000 वर्ग मीटर, जल उपयोग ≥ 40,000 लीटर/दिन, या अपशिष्ट उत्पादन ≥ 100 किलोग्राम/दिन है। इसमें आवासीय समितियां, मॉल, कॉलेज, होटल, सरकारी संस्थान, टाउनशिप और 5,000 वर्ग मीटर से बड़े संस्थान तथा RWA शामिल हैं।
- उनकी जिम्मेदारियों में स्रोत पर पृथक्करण, एक वर्ष के भीतर अधिकृत संस्थाओं को पुनर्चक्रण योग्य वस्तुएं सौंपना, केंद्रीय पोर्टल के माध्यम से प्रमाणन-आधारित अनुपालन, 30 जून तक अनिवार्य वार्षिक रिटर्न और ऑन-साइट गीला अपशिष्ट प्रसंस्करण शामिल हैं।
- प्रदूषक भुगतान सिद्धांत (Polluter Pays Principle): पोर्टल पर पंजीकरण न करने, गलत रिपोर्टिंग, जाली दस्तावेज, अनुचित अपशिष्ट प्रबंधन और मिश्रित अपशिष्ट डंपिंग के लिए पर्यावरणीय मुआवजा प्रदान करता है।
- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशानिर्देशों के अनुसार मिश्रित अपशिष्ट डंपिंग पर उच्च लैंडफिल शुल्क लगेगा, जिससे गैर-अनुपालन होने पर लैंडफिल निपटान महंगा हो जाएगा।
- केंद्रीकृत ट्रैकिंग प्रणाली: थोक उत्पादकों, स्थानीय निकायों, अपशिष्ट परिवहन और प्रसंस्करण एजेंसियों, अपशिष्ट बीनने वालों, निपटान सुविधाओं, रेलवे, हवाई अड्डों और SEZ को ट्रैक करने के लिए एक केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल पेश करता है।
- यह ठोस अपशिष्ट की जीवनचक्र निगरानी को सक्षम बनाता है।
- थोक उत्पादकों की बढ़ती जिम्मेदारी: ‘विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व’ (EPR) के समान विस्तारित जिम्मेदारी पेश करता है, जो मार्च 2027 तक स्थानीय निकायों द्वारा उप-नियम (By-laws) बनाने के बाद लागू होगी।
- यह पोर्टल पर पंजीकरण, अपशिष्ट लेखांकन, चार-स्तरीय पृथक्करण और ऑन-साइट कंपोस्टिंग को अनिवार्य बनाता है।
- लैंडफिल न्यूनीकरण उपाय: लैंडफिल का उपयोग केवल गैर-पुनर्चक्रण योग्य, गैर-रिकवर होने योग्य कचरे के लिए किया जाएगा।
- स्थानीय निकायों को 31 अक्टूबर, 2026 तक पुराने (Legacy) लैंडफिल का मानचित्रण करना होगा, समयबद्ध उपचार योजनाएं तैयार करनी होंगी और बायोरिमेडिएशन (सूक्ष्मजीवी अपशिष्ट न्यूनीकरण) और बायोमाइनिंग (उपयोगी सामग्री की रिकवरी) का उपयोग करना होगा।
- अपशिष्ट से ऊर्जा और ईंधन प्रतिस्थापन: ≥ 1500 kcal/kg कैलोरी मान वाले कचरे का उपयोग ‘अपशिष्ट-व्युत्पन्न ईंधन’ (RDF) और सीमेंट तथा थर्मल संयंत्रों में सह-प्रसंस्करण के लिए किया जाना चाहिए।
- उद्योगों को ठोस ईंधन को RDF से बदलना होगा, जो 6% से शुरू होकर छह वर्षों के भीतर 15% तक बढ़ जाएगा।
- पहाड़ी क्षेत्रों और द्वीपों के लिए विशेष प्रावधान: इसमें पर्यटक उपयोग शुल्क, अपशिष्ट क्षमता के आधार पर पर्यटकों के आगमन का विनियमन, नामित संग्रह बिंदु और होटल/रेस्तरां द्वारा अनिवार्य स्थानीय गीला अपशिष्ट प्रसंस्करण शामिल है। सामुदायिक भागीदारी पर जोर दिया गया है।
- संस्थागत तंत्र: कार्यान्वयन के लिए केंद्रीय और राज्य स्तरीय समितियों के गठन का प्रावधान करते हैं, जिसमें राज्य समितियों की अध्यक्षता मुख्य सचिव या केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक करेंगे।
- ये निकाय प्रभावी प्रवर्तन के लिए उपायों की सिफारिश करेंगे।
