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सामान्य अध्ययन-3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन।
संदर्भ: भारत ने जैव विविधता पर कन्वेंशन (CBD) के अंतर्गत अपनी सातवीं राष्ट्रीय रिपोर्ट (NR7) प्रस्तुत की। यह रिपोर्ट 2022 में अपनाए गए कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क (KMGBF) के बाद भारत की प्रगति की पहली व्यापक समीक्षा है।
अन्य संबंधित जानकारी

- यह रिपोर्ट जैव विविधता पर कन्वेंशन (CBD) के अंतर्गत CBD सचिवालय को भारत की आधिकारिक प्रस्तुति है। CBD एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है जिसके माध्यम जैव विविधता पर कन्वेंशन से सदस्य देश जैव विविधता के संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग के लिए प्रतिबद्धता जाहिर करते हैं।
- सभी सदस्य देशों के लिए यह अनिवार्य है कि वे जैव विविधता संरक्षण की दिशा में किए गए कार्यों, प्रगति और चुनौतियों का विवरण देते हुए समय-समय पर अपनी राष्ट्रीय रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
- भारत की यह सातवीं राष्ट्रीय रिपोर्ट वर्ष 2022 में कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क (KMGBF) को अपनाए जाने के बाद उसकी प्रगति की पहली व्यापक समीक्षा है।
- भारत ने इन वैश्विक लक्ष्यों के अनुरूप निर्धारित 23 राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्यों (NBTs) के सापेक्ष अपनी प्रगति का मूल्यांकन किया है।
- इस रिपोर्ट को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 33 अन्य मंत्रालयों और विभागों के आँकड़ों के साथ तैयार किया गया है।
कुनमिंग मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क (GBF)के बारे में
- कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क को चार वर्षों के लम्बे परामर्श और वार्ता प्रक्रिया के बाद, जैव विविधता अभिसमय (CBD) के पक्षकारों के 15वें सम्मेलन (COP-15) के दौरान अपनाया गया था।
- यह फ्रेमवर्क 2050 तक “प्रकृति के साथ सद्भाव में रहने” के वैश्विक दृष्टिकोण को प्राप्त करने के लिए एक महत्वाकांक्षी मार्ग प्रशस्त करता है। साथ ही, यह सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति में सहायता करता है और पूर्ववर्ती CBD रणनीतिक योजनाओं पर आधारित है।
- वैश्विक जैव विविधता संरक्षण और टिकाऊ उपयोग के लिए मार्गदर्शन हेतु इस फ्रेमवर्क के अंतर्गत 2050 के लिए 4 वैश्विक लक्ष्य और 2030 तक प्राप्त किए जाने वाले 23 विशिष्ट लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
- KMGBF ने 2030 तक प्राप्त किए जाने वाले 23 वैश्विक लक्ष्य निर्धारित किए हैं, जिनमें मुख्य हैं:
- वैश्विक भूमि और समुद्र के 30% हिस्से का संरक्षण सुनिश्चित करना।
- निम्नीकृत (क्षरित) पारिस्थितिकी प्रणालियों का पुनरुद्धार करना।
- पर्यावरण में प्रदूषण के स्तर को कम करना।
- आक्रामक विदेशी प्रजातियों के प्रसार को नियंत्रित करना।
- मानव-प्रेरित प्रजातियों के विलुप्तीकरण को रोकना।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
- भारत ने कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क (KMGBF) के अनुरूप अपनी राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना (NBSAP) को अद्यतन किया है।
- संशोधित ढांचे में 23 राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्य (NBT) और 142 संकेतक शामिल हैं, जो एक राष्ट्रीय जैव विविधता निगरानी प्रणाली का निर्माण करते हैं।
- नियोजन और नीतिगत संरेखण का चरण काफी हद तक पूरा हो चुका है, किंतु वास्तविक कार्यान्वयन अभी भी एक प्रमुख चुनौती बना हुआ है।
- जैव विविधता-समावेशी नियोजन (NBT 1): भारत का वन और वृक्ष आवरण 8,27,357 वर्ग किमी (कुल भौगोलिक क्षेत्र का 25.17%) है।
- 2021 और 2023 के बीच इसमें 1,445.81 वर्ग किमी की वृद्धि दर्ज की गई है।
- राष्ट्रव्यापी आर्द्रभूमि सूची, तटीय राज्यों में एकीकृत तटीय क्षेत्र प्रबंधन योजनाएं, संरक्षित क्षेत्रों के चारों ओर पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों (ESZ) की घोषणा, और PARIVESH 2.0 के माध्यम से डिजिटल पर्यावरणीय मंजूरी की शुरुआत।
- पारिस्थितिकी तंत्र बहाली (NBT 2): भारत के भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 29.77% (≈9.7 करोड़ हेक्टेयर) भूमि क्षरण की प्रक्रिया से गुज़र रहा है।
- बॉन चैलेंज के तहत भारत ने 2030 तक 2.6 करोड़ हेक्टेयर क्षरित भूमि को बहाल करने का संकल्प लिया है।
- अब तक 2.41 करोड़ हेक्टेयर भूमि को बहाल किया जा चुका है या वह बहाली की प्रक्रिया में है।
- वन कार्बन स्टॉक बढ़कर 7,285.5 मिलियन टन हो गया है। मैंग्रोव आवरण और बांस क्षेत्र का भी विस्तार हुआ है।
- संरक्षण कवरेज और प्रजाति पुनर्प्राप्ति (NBT 3 और 4): भारत का संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क वर्तमान में देश के भौगोलिक क्षेत्र के 5% से कुछ अधिक हिस्से को कवर करता है।
- भारत में समुद्री संरक्षित क्षेत्रों के दायरे में निरंतर विस्तार हो रहा है। इसके साथ ही, ‘अन्य प्रभावी क्षेत्र-आधारित संरक्षण उपायों’ (OECMs) की पहचान करने की प्रक्रिया भी गतिमान है।
- 2030 तक 30% संरक्षण लक्ष्य प्राप्त करना अभी भी चुनौती बना हुआ है।
- प्रजातियों की रिकवरी:
- बाघ आबादी: 3,167
- एशियाई शेर और एक सींग वाले गैंडे कीआबादी में वृद्धि या स्थिरता दर्ज की गई है।
- हिम तेंदुए का पहला राष्ट्रीय जनसंख्या मूल्यांकन पूर्ण।
- गिद्ध संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम जारी है।
- कृषि और परिदृश्य में जैव विविधता: वनों के बाहर के वृक्ष’ भारत के कुल वृक्ष आवरण (Tree Cover) में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
- कृषि वानिकी भारत के भौगोलिक क्षेत्र के लगभग 8.65% हिस्से को कवर करती है।
- मैंग्रोव आवरण के विस्तार और वन कार्बन स्टॉक में हुई वृद्धि, जलवायु शमन और जैव विविधता संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
- निगरानी और शासन संबंधी चुनौतियां: जैव विविधता का डेटा कई विभागों के बीच विभाजित है ।
- कई संकेतकों में मानकीकृत निगरानी प्रोटोकॉल का अभाव है।
- डेटा संग्रहण अंतरालों में अंतर दीर्घकालिक प्रवृत्ति विश्लेषण को प्रभावित करता है।
- बाढ़, सूखा और वनाग्नि जैसे जलवायु परिवर्तन के प्रभाव पारिस्थितिक तंत्र पर दबाव बढ़ा रहे हैं।
- 2030 लक्ष्यों की ओर समग्र प्रगति: राष्ट्रीय लक्ष्यों में से केवल NBT 1 (समावेशी भूमि और समुद्र-उपयोग नियोजन) और NBT 2 (पारिस्थितिकी तंत्र बहाली) ही स्पष्ट रूप से सही दिशा में प्रगति कर रहे हैं।
- कई अन्य लक्ष्य अभी भी मापने योग्य परिणामों के बजाय केवल नीतिगत पहलों पर निर्भर हैं जो सशक्त कार्यान्वयन की आवश्यकता को दर्शाता है।
Source:
Downtoearth
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