संबंधित पाठ्‌यक्रम

सामान्य अध्ययन-2: सरकारी नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप तथा उनके अभिकल्पन और कार्यान्वयन से संबंधित विषय।

सामान्य अध्ययन -3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय।

संदर्भ: कपड़ा मंत्रालय ने गुवाहाटी में आयोजित राष्ट्रीय वस्त्र मंत्रियों के सम्मेलन में DLTT पहल की घोषणा की है। यह पहल देशभर में वस्त्र क्षेत्र के समावेशी, सतत विकास के लिए एक व्यापक कार्यक्रम है।

DLTT पहल की मुख्य विशेषताएँ

  • उद्देश्य: 100 उच्च क्षमता वाले जिलों को वैश्विक निर्यात चैंपियन में बदलना और जिला-विशिष्ट दृष्टिकोण को अपनाते हुए 100 आकांक्षी जिलों को आत्मनिर्भर वस्त्र केंद्रों में बदलना।
  • कार्यप्रणाली: तीन प्रमुख मापदंडों पर सभी जिलों का डेटा-संचालित मूल्यांकन: –
    • निर्यात प्रदर्शन,
    • MSME इकोसिस्टम और
    • कार्यबल की उपस्थिति।
  • द्विआयामी जिला रणनीति: अधिकतम परिणाम सुनिश्चित करने के लिए जिले की श्रेणी के अनुरूप कार्यान्वयन ढांचा तैयार करना।
    • चैंपियन जिले: मेगा कॉमन फैसिलिटी सेंटर का उन्नयन, उद्योग 4.0 प्रौद्योगिकियों के एकीकरण और प्रत्यक्ष निर्यात बाजार संबंधों को मजबूत करने जैसे उन्नत संवर्द्धन पर ध्यान केंद्रित करना।
    • आकांक्षी जिले: बुनियादी कौशल प्रशिक्षण, कार्यबल प्रमाणन, कच्चे माल के बैंकों और स्वयं सहायता समूहों तथा सहकारी समितियों के माध्यम से सूक्ष्म उद्यमों को समर्थन देकर आधारभूत इकोसिस्टम के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना।
  • विशेष फोकस: जनजातीय बेल्ट के विकास, बेहतर कनेक्टिविटी और प्रीमियम वैश्विक बाजारों के लिए अद्वितीय सांस्कृतिक हस्तशिल्प की भौगोलिक संकेत (GSI) टैगिंग हेतु पूर्वी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में पूर्वोदय अभिसरण दृष्टिकोण।
  • संस्थान-उद्योग-अकादमिक लिंकेज: आर्थिक अवसर प्रदान करके और भारत को वैश्विक वस्त्र क्षेत्र में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाकर वस्त्र समूहों को सशक्त बनाने के लिए रणनीतिक अभिसरण और सहयोगात्मक साझेदारी।

जिला आधारित वस्त्र परिवर्तन (DLTT) योजना का महत्व

  • विकेंद्रीकृत विकास: यह जिलों को “वन-साइज़-फिट्स-ऑल” दृष्टिकोण के बजाय परिवर्तन की इकाइयों के रूप में सशक्त बनाती है और स्थानीय शक्तियों (हथकरघा, पावरलूम, वस्त्र, तकनीकी वस्त्र) के साथ संरेखित है।
  • विनिर्माण को बढ़ावा देना: MSME क्षमताओं को बढ़ाना, वैश्विक वस्त्र मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति को मजबूत करना और आत्मनिर्भर भारत एवं मेक इन इंडिया का समर्थन करना।
  • क्षेत्रीय समानता: क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने के लिए पूर्वी, आदिवासी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित करना।

वस्त्र क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए इसी तरह की अन्य पहल

  • कपड़ो के लिए PLI (उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन) योजनाएँ: मानव निर्मित फाइबर (MMF) और तकनीकी वस्त्रों पर ध्यान देने के साथ वृद्धिशील बिक्री के आधार पर विनिर्माण वृद्धि के लिए प्रोत्साहन।
  • पीएम मित्र पार्क (MITRA -मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल): विश्व स्तरीय एकीकृत टेक्सटाइल पार्क बनाने के लिए।
  • राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (NTTM): मेडिकल टेक्सटाइल, जियो-टेक्सटाइल, रक्षा और औद्योगिक वस्त्रों में प्रमुख फोकस क्षेत्रों के साथ।
  • समर्थ उद्योग भारत 4.0: वस्त्र मूल्य श्रृंखलाओं में कौशल और प्रौद्योगिकी को अपनाना।
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