संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-1: महत्वपूर्ण भू-भौतिकी घटनाएँ।
सामान्य अध्ययन -3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण।
संदर्भ: कॉपरनिकस जलवायु परिवर्तन सेवा (C3S) के नवीनतम मासिक जलवायु बुलेटिन के अनुसार, मार्च 2026 वैश्विक स्तर पर अब तक का चौथा सबसे गर्म मार्च रहा है।
बुलेटिन के मुख्य बिंदु
• वैश्विक तापमान की स्थिति का अवलोकन:
- मार्च 2026 वैश्विक स्तर पर अब तक का चौथा सबसे गर्म मार्च दर्ज किया गया, जिसमें औसत सतही वायु तापमान 13.94°C रहा। यह पूर्व-औद्योगिक स्तर (1850-1900) के अनुमानित औसत से 1.48°C अधिक था।
- यूरोप में मार्च 2026 अब तक का दूसरा सबसे गर्म मार्च था और महाद्वीप के अधिकांश हिस्सों में औसत से अधिक शुष्क दशाएँ देखी गईं।
• समुद्र की सतह का तापमान (SST):
- मार्च के लिए वैश्विक समुद्र की सतह के तापमान (SST) का अब तक का दूसरा सबसे उच्चतम स्तर दर्ज किया गया, जो मार्च 2024 के अल नीनो (El Niño) के चरम स्तर (21.14°C) से केवल थोड़ा ही कम था।
- ध्रुवीय क्षेत्रों के अतिरिक्त महासागरों (60°S–60°N) का औसत SST 21°C के निकट बना रहा, जो महासागरों में निरंतर ऊष्मा संचय को रेखांकित करता है।
• समुद्री बर्फ की चरम स्थिति:
- मार्च 2026 में आर्कटिक में अब तक के सबसे कम औसत समुद्री बर्फ विस्तार दर किया गया गया, जो 1991-2020 के औसत से लगभग 5.7% कम पाया गया।
- अंटार्कटिक क्षेत्र में, समुद्री बर्फ का विस्तार मार्च के औसत से 10% कम रहा।
• अल नीनो आउटलुक:
- ये जलवायु संकेतक वर्ष 2026 में अल नीनो की स्थिति विकसित होने की बढ़ती संभावना की ओर संकेत करते हैं।
प्रभाव
• वैश्विक:
- बढ़ता हुआ तापमान हीटवेव, बाढ़ और चक्रवात जैसी चरम मौसम घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि कर सकता है।
- गर्म होते महासागर समुद्री हीटवेव, प्रवाल विरंजन और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में व्यवधान उत्पन्न कर सकते हैं, जिससे वैश्विक मत्स्य पालन और जैव विविधता प्रभावित होगी।
- अल नीनो की संभावना वैश्विक तापमान को और अधिक बढ़ा सकती है, क्योंकि ऐसी घटनाएँ सामान्यतः वैश्विक औसत में 0.1–0.2°C की वृद्धि करती हैं, जिससे जलवायु जोखिम और बढ़ जाते हैं।
- घटती समुद्री बर्फ फीडबैक तंत्र के माध्यम से तापन में तीव्रता लाती है, जो फिर समुद्र के जलस्तर में वृद्धि और ध्रुवीय अस्थिरता में योगदान देती है।
• भारत-विशिष्ट:
- अल नीनो के वर्षों के दौरान भारत में कमजोर या अनियमित मानसून पैटर्न का अनुभव किया जा सकता है, जो कृषि और जल सुरक्षा को प्रभावित करता है।
- हीटवेव और सूखे की स्थिति की बढ़ती संभावना सार्वजनिक स्वास्थ्य, ऊर्जा की मांग और ग्रामीण आजीविका को प्रभावित कर सकती है।
- हिंद महासागर क्षेत्र में गर्म होते महासागर चक्रवाती गतिविधियों को तीव्र कर सकते हैं और तटीय सुभेद्यताओं को बढ़ा सकते हैं।
अल नीनो-दक्षिणी दोलन के बारे में
• ENSO (अल नीनो-दक्षिणी दोलन) एक आवधिक जलवायु परिघटना है जिसमें भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान (SSTs) और वायुमंडलीय परिसंचरण में परिवर्तन सम्मिलित होते हैं।
• सामान्य स्थितियाँ:
- व्यापारिक पवनें भूमध्य रेखा के साथ पूर्व से पश्चिम की ओर चलती हैं।
- पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में गर्म जल संचित होता है, जबकि दक्षिण अमेरिका के निकट ठंडा और पोषक तत्वों से भरपूर जल अपवेलिंग (Upwelling – नीचे से ऊपर आना) के माध्यम से सतह पर आता है।
• अल नीनो चरण (गर्म चरण):
- व्यापारिक पवनें कमजोर हो जाती हैं या विपरीत दिशा में चलने लगती हैं।
- गर्म जल मध्य और पूर्वी प्रशांत क्षेत्र की ओर पूर्व की ओर स्थानांतरित हो जाता है।
- अपवेलिंग कम हो जाती है, जिससे वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण बाधित होता है।
- इसे तब परिभाषित किया जाता है जब समुद्र की सतह का तापमान (SST) निरंतर अवधि के लिए सामान्य से कम से कम 0.5°C अधिक बढ़ जाता है।
- अल नीनो सामान्यतः प्रत्येक 2 से 7 वर्षों में होता है और कई महीनों तक बना रहता है, परंतु इसका कोई निश्चित समय चक्र नहीं है।
• ला नीना चरण (ठंडा चरण):
- व्यापारिक पवनें अधिक शक्तिशाली हो जाती हैं।
- बढ़ी हुई अपवेलिंग के कारण पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से कम हो जाता है।
- यह सामान्य परिसंचरण पैटर्न को और सुदृढ़ करता है।
