संबंधित पाठ्यक्रम

सामान्य अध्ययन-1: विश्वभर (दक्षिण एशिया और भारतीय उपमहाद्वीप सहित) में प्रमुख प्राकृतिक संसाधनों का वितरण।

सामान्य अध्ययन -3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय।

संदर्भ: खान मंत्रालय ने खनिज पट्टा विस्तार और अतिरिक्त खनिजों को शामिल करने से संबंधित प्रावधानों को क्रियान्वित करने के लिए खनिज (परमाणु और हाइड्रोकार्बन ऊर्जा खनिजों के अलावा) रियायत (द्वितीय संशोधन) नियम, 2026 अधिसूचित किए।

अन्य संबंधित जानकारी

  • ये नियम एमएमडीआर (MMDR) संशोधन अधिनियम, 2025 (सितंबर 2025 से प्रभावी) के माध्यम से खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 में किए गए संशोधनों के अनुसरण में तैयार किए गए हैं।
  • इस संशोधन का उद्देश्य महत्वपूर्ण, रणनीतिक और गहराई में मिलने वाले खनिजों (deep-seated minerals) की खोज, उत्पादन और कुशल उपयोग को बढ़ावा देना है।
  • यह घरेलू खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करके आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य से संरेखित है।
  • ये नियम 2025 में पेश किए गए प्रमुख विधायी परिवर्तनों को लागू करने के लिए परिचालन ढांचा प्रदान करते हैं।

संशोधन के मुख्य प्रावधान

  • सन्निकट क्षेत्रों को शामिल करना: गहराई में मिलने वाले खनिजों के खनन पट्टा (Mining Lease – ML) और समग्र लाइसेंस (Composite Licence – CL) धारकों को सन्निकट क्षेत्रों को शामिल करने के लिए एक बार विस्तार की अनुमति दी गई है।
    • ML के लिए इसकी सीमा मौजूदा क्षेत्र के 10% तक और CL के लिए 30% तक है। नीलामी वाले पट्टों के लिए भुगतान नीलामी प्रीमियम का 10% तय किया गया है और गैर-नीलामी पट्टों के लिए अतिरिक्त रॉयल्टी के बराबर भुगतान देय होगा।
  • गहराई में मिलने वाले खनिजों का इष्टतम निष्कर्षण: यह संशोधन सन्निहित क्षेत्रों में खनिजों के खनन को सक्षम बनाता है। यह खनन कार्यों के आर्थिक रूप से अलाभकारी विखंडन को भी रोकता है।
  • संबद्ध खनिजों को शामिल करना: यह संशोधन मौजूदा पट्टों में गौण खनिजों सहित अतिरिक्त खनिजों को शामिल करने की अनुमति देता है।
    • राज्य सरकारों को 30 दिनों के भीतर ऐसी अनुमति को मंजूरी देनी होगी। सातवीं अनुसूची में सूचीबद्ध महत्वपूर्ण खनिजों, रणनीतिक खनिजों और गहराई में मिलने वाले खनिजों के लिए किसी अतिरिक्त भुगतान की आवश्यकता नहीं है।
  • गौण और प्रमुख खनिजों के लिए प्रावधान: 2025 से पहले दिए गए गौण खनिज पट्टों के लिए, प्रमुख खनिजों को शामिल करने का एक तंत्र प्रदान किया गया है।
  • भविष्य के पट्टों के लिए, G3 स्तर तक अन्वेषण अनिवार्य है (बालू को छोड़कर)। यदि प्रमुख खनिजों की खोज होती है, तो उस क्षेत्र की नीलामी मुख्य खनिज ब्लॉक के रूप में की जाएगी।
  • कैप्टिव खदानों पर प्रतिबंधों को हटाना: कैप्टिव खदानों से खनिजों की बिक्री पर लगी सीमा को हटा दिया गया है।
    • यदि संयंत्र पूरी क्षमता से संचालित होता है, तो अतिरिक्त बिक्री की अनुमति है। वहीं यदि यह क्षमता से कम पर संचालित होता है, तो बिक्री प्रतिवर्ष उपभोग की जाने वाली मात्रा तक सीमित होगी।
  • समयबद्ध और सरल प्रक्रियाएं: यह संशोधन एक सरल और समयबद्ध आवेदन प्रक्रिया शुरू करता है। इसका उद्देश्य खनन क्षेत्र में व्यापार सुगमता  को बढ़ावा देना है।

MMDR संशोधन अधिनियम, 2025

  • NMET (अब NMEDT) का विस्तार: राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट का विस्तार किया गया है और इसका नाम बदलकर राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण और विकास ट्रस्ट (NMEDT) कर दिया गया है। यह भारत के भीतर (तटीय क्षेत्रों सहित) और विदेशों में भी निधि (फंड) के उपयोग की अनुमति देता है। इसके साथ ही, पट्टाधारकों का योगदान रॉयल्टी के 2% से बढ़ाकर 3% कर दिया गया है।
  • नए और संबद्ध खनिजों को शामिल करना: यह संशोधन मौजूदा पट्टों में नए और संबद्ध खनिजों को शामिल करने में सक्षम बनाता है। इसमें शर्तों के तहत गौण खनिज पट्टों में मुख्य खनिजों की अनुमति देना भी शामिल है। इसके लिए एक अतिरिक्त भुगतान तंत्र शुरू किया गया है, जबकि उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों को इससे छूट दी गई है।
  • सन्निकट क्षेत्रों के लिए एक बार विस्तार: राज्य सरकारें कुशल निष्कर्षण में सहायता के लिए, भुगतान के आधार पर खनन पट्टों या समग्र लाइसेंस क्षेत्रों में सटे हुए सन्निकट क्षेत्रों को शामिल करने के लिए एक बार विस्तार दे सकती हैं। यह विस्तार खनन पट्टों के लिए 10% और समग्र लाइसेंसों के लिए 30% तक सीमित है।
  • खनिज बाजारों और एक्सचेंजों का संवर्धन: केंद्र सरकार को खनिज बाजारों को बढ़ावा देने और खनिजों तथा उनके प्रसंस्कृत रूपों के व्यापार के लिए एक्सचेंज स्थापित करने का अधिकार दिया गया है। इसका उद्देश्य पारदर्शी मूल्य निर्धारण और बेहतर बाजार स्थिरता सुनिश्चित करना है।
  • कैप्टिव खदानों से बिक्री का उदारीकरण: कैप्टिव खदान मालिकों को अब अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने और अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करने के बाद खनिज बेचने की अनुमति है। संसाधन उपयोग को बेहतर बनाने और राज्य के राजस्व को बढ़ाने के लिए इसमें अप्रयुक्त संचित डंप की बिक्री भी शामिल है।
  • नीलामी के लिए पूर्व अनुमोदन की समाप्ति: नीलामी प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने के लिए, समग्र लाइसेंस हेतु कुछ अधिसूचित खनिज ब्लॉकों की नीलामी के लिए केंद्र सरकार के पूर्व अनुमोदन की आवश्यकता को समाप्त कर दिया गया है।

महत्व

  • आर्थिक और औद्योगिक प्रभाव: यह संशोधन महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों की आपूर्ति को बढ़ावा देता है, जिससे घरेलू खनिज उत्पादन में वृद्धि होती है और आयात पर निर्भरता कम होती है।
    • यह औद्योगिक विकास का मार्ग प्रशस्त करता है, खनिजों की बेहतर उपलब्धता के माध्यम से MSMEs (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों) को सहायता प्रदान करता है और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण में योगदान देता है।
  • व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business): यह सरल और समयबद्ध प्रक्रियाएं पेश करता है, जो नियामक देरी को कम करने और खनन क्षेत्र में समग्र व्यावसायिक वातावरण को सुधारने में मदद करती हैं।
  • संसाधनों का इष्टतम उपयोग: यह संशोधन वैज्ञानिक खनन और गहराई में मिलने वाले खनिजों के कुशल निष्कर्षण को बढ़ावा देता है। यह एकीकृत और इष्टतम खनन कार्यों को सक्षम करके खनिज संसाधनों के विखंडन को रोकने में भी मदद करता है।
  • राज्यों को लाभ: अतिरिक्त भुगतान और खनिज उत्पादन में वृद्धि के माध्यम से राज्यों को अधिक राजस्व प्राप्त होता है। राज्य सरकारों को सौंपी गई स्पष्ट भूमिका सहकारी संघवाद की भावना को भी बल प्रदान करती है।

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