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सामान्य अध्ययन-1: महिला और महिला संगठनों की भूमिका, जनसंख्या और संबद्ध मुद्दे, निर्धनता और विकास संबंधित विषय, शहरीकर, उसकी समस्याएँ और रक्षोपाय।

संदर्भ: नई दिल्ली में आयोजित ‘कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं  पर वैश्विक सम्मेलन’ (GCWAS–2026), कृषि और कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं के सशक्त नेतृत्व, सहभागिता और नवाचार के आह्वान के साथ संपन्न हुआ।

अन्य संबंधित जानकारी

कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं पर वैश्विक सम्मेलन 2026 (GCWAS–2026)
कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं पर वैश्विक सम्मेलन 2026 (GCWAS–2026)
  • इस सम्मेलन में 18 देशों के नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों, विकास भागीदारों और महिला नेतृत्वकर्ताओं ने लिंग-उत्तरदायी नीतियों, समावेशी नवाचारों और सतत कृषि विकास पर चर्चा करने के लिए एक साझा मंच पर सहभागिता की।
  • समापन सत्र के दौरान, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक ने इस बात पर बल दिया कि यह सम्मेलन लिंग-उत्तरदायी कृषि-खाद्य प्रणालियों के लिए नए सिरे से की जाने वाली कार्यवाही की शुरुआत का प्रतीक होना चाहिए।
  • इस मंच का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में महिलाओं पर केंद्रित अनुसंधान, विस्तार सेवाओं और क्षमता-निर्माण पहलों को बढ़ावा देना है, जिसमें साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण के लिए ‘लिंग-विभेदित डेटा’ द्वारा सहायता प्रदान की जाएगी।
  • सम्मेलन में ‘दिल्ली घोषणापत्र’ को स्वीकार किया गया, जो ‘कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिला’ विषय पर एक ‘वैश्विक गठबंधन’  बनाने का आह्वान करती है, ताकि लिंग-उत्तरदायी नीतियों को बढ़ावा दिया जा सके और कृषि-खाद्य मूल्य श्रृंखलाओं में महिलाओं की भागीदारी को सशक्त बनाया जा सके।
  • इस सम्मेलन में नौ विषयगत तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जो निम्नलिखित मुद्दों पर केंद्रित थे:
    • लैंगिक समानता और सामाजिक समावेशन
    • कृषि में महिला नेतृत्व
    • जेंडर-परिवर्तनकारी परिवर्तन के लिए उभरती प्रौद्योगिकियाँ
    • महिलाओं का आर्थिक समावेशन
    • नीति और बाजार तक पहुँच
    • कृषि-खाद्य प्रणालियों में युवाओं की भागीदारी

कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं पर वैश्विक सम्मेलन (GCWAS–2026)

  • यह संवाद, ज्ञान साझाकरण और सहयोग के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय मंच है, जिसका उद्देश्य कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व को बढ़ावा देना है।
  • इसका आयोजन 12–14 मार्च 2026 तक नई दिल्ली में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा कृषि विज्ञान उन्नति न्यास (TAAS), CGIAR और पौध किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (PPV&FRA) के सहयोग से किया गया था।
  • इस कार्यक्रम में 500 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें शोधकर्ता, नीति-निर्माता, महिला किसान, उद्यमी, गैर-सरकारी संगठन (NGOs), किसान संगठन, उद्योग प्रतिनिधि और छात्र सम्मिलित थे।
  •   इस सम्मेलन ने कृषि में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए सर्वोत्तम पद्धतियों, सफलता की कहानियों और नवीन समाधानों को साझा करने के लिए एक वैश्विक मंच के रूप में कार्य किया।
  • इसका उद्देश्य कृषि-खाद्य मूल्य श्रृंखला में महिलाओं की भूमिका को सशक्त बनाने के लिए लिंग-उत्तरदायी नीतियों, तकनीकी नवाचारों और संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देना था।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • कृषि में महिलाओं की भूमिका को बढ़ावा देना: कृषि श्रम बल में महिलाओं का योगदान लगभग 60–70% है, जो ज्ञान, ऋण, बाजार और प्रशिक्षण तक उनकी पहुँच का विस्तार करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
  • दिल्ली घोषणापत्र ‘कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाएँ’ विषय पर एक ‘वैश्विक गठबंधन’ स्थापित करने का आह्वान करता है। यह घोषणापत्र हितधारकों को निम्नलिखित के लिए प्रतिबद्ध करता है:
    • लिंग-उत्तरदायी नीतियों और संस्थागत सुधारों को बढ़ावा देना
    • भूमि, वित्त, प्रौद्योगिकी, बाजार और डिजिटल नवाचार तक महिलाओं की पहुँच में सुधार करना
    • महिला किसानों और कृषि-व्यवसाय दिग्गजों के बीच नेतृत्व और उद्यमिता को मजबूती प्रदान करना:
    • लिंग-उत्तरदायी बजटिंग सुनिश्चित करना
    • लिंग-विभेदित डेटा के व्यवस्थित संग्रहण का विस्तार करना
    • लिंग ऑडिट और प्रगति रिपोर्टिंग जैसे उत्तरदायित्व तंत्र स्थापित करना
    • बड़े पैमाने पर विस्तार करने योग्य नवाचारों और महिला-नेतृत्व वाले विकास मॉडलों के वैश्विक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना
  • जैव विविधता संरक्षकों के रूप में महिलाओं को मान्यता: पादप आनुवंशिक संसाधनों और जैव विविधता के संरक्षण में महिलाएँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, फिर भी उनके योगदान को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
    • सम्मेलन में ऐसे जमीनी स्तर के संरक्षकों को सशक्त बनाने के लिए संस्थागत और वित्तीय सहायता की आवश्यकता पर बल दिया गया।
  • महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देना: भागीदारों ने अनुशंसा की है कि:
    • बीज मूल्य श्रृंखलाओं में नियामक प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया जाए
    • महिलाओं को ‘संरक्षकों’ से ‘कृषि-उद्यमियों’ के रूप में संक्रमण हेतु समर्थन प्रदान करना
    • ऋण तक पहुँच, विकास वित्त और बाजार जुड़ाव का विस्तार करना
    • महिला-नेतृत्व वाले कृषि-व्यवसाय उद्यमों का विस्तार करना
  • स्वास्थ्य और सततता के साथ कृषि का एकीकरण: प्रतिनिधियों ने समावेशी विकास को समर्थन देने के लिए ‘वन हेल्थ’ जैसे फ्रेमवर्क के माध्यम से कृषि, पोषण, स्वास्थ्य और पर्यावरणीय सततता को आपस में जोड़ने के महत्व पर बल दिया।
  • लिंग-उत्तरदायी नवाचार और प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देना: अनुशंसाओं में निम्नलिखित सम्मिलित थे:
    • महिला-अनुकूल कृषि प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना
    • स्थानीयकृत डिजिटल उपकरणों और परामर्श सेवाओं के माध्यम से डिजिटल अंतराल को पाटना
    • जलवायु-अनुकूल कृषि को सुदृढ़ करना
    • महिला किसानों के बीच डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना
  • संस्थागत अभिसरण का सुदृढ़ीकरण: सम्मेलन में सरकारी कार्यक्रमों, अनुसंधान संस्थानों, विश्वविद्यालयों और निजी क्षेत्र के भागीदारों के बीच सुदृढ़ सहयोग का आह्वान किया गया।
    • विश्वविद्यालयों को महिला-नेतृत्व वाली कृषि-उद्यमिता के लिए ‘इनोवेशन और इनक्यूबेशन केंद्र’ के रूप में चिन्हित किया गया।
  • सुझाए गए प्रमुख नीतिगत और शासन संबंधी सुधारों में शामिल हैं:
    • कृषि नीतियों में लैंगिक समानता का मुख्यधाराकरण को मुख्य धारा में लाना
    • महिलाओं के भूमि अधिकारों और उत्पादक संसाधनों तक उनकी पहुँच सुनिश्चित करना
    • लिंग-उत्तरदायी विस्तार प्रणालियों का सुदृढ़ीकरण
    • लिंग-उत्तरदायी प्रभाव मैट्रिक्स और निगरानी प्रणालियों की शुरुआत

Source :
PIB
DD News
President of India
ICAR

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