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सामान्य अध्ययन-3: प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कृषि सब्सिडी से संबंधित मुद्दे; समावेशी विकास और इससे संबंधित विषय।

संदर्भ: कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (DA&FW) द्वारा कराए गए तृतीय-पक्ष मूल्यांकन में पाया गया है कि किसान क्रेडिट कार्ड–संशोधित ब्याज सहायता योजना (KCC-MISS) के अंतर्गत निवेश किए गए प्रत्येक ₹1 से कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र में ₹2.30 का शुद्ध मूल्य संवर्धन होता है।

मूल्यांकन के प्रमुख निष्कर्ष

  • उच्च आर्थिक प्रतिफल: KCC-MISS के अंतर्गत निवेश किए गए प्रत्येक ₹1 से कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र में ₹2.30 का शुद्ध मूल्य संवर्धन होता है, जो योजना के मजबूत आर्थिक गुणक प्रभाव को दर्शाता है।
  • ब्याज भार में कमी: योजना की शुरुआत से 2024-25 तक, अनुमानित ₹1.87 लाख करोड़ की ब्याज सहायता के माध्यम से योजना ने किसानों के ब्याज भार को कम किया है।
  • फसल सघनता एवं विविधीकरण में वृद्धि: रियायती ऋण की उपलब्धता ने लाभार्थियों को अधिक क्षेत्र में खेती करने, फसल सघनता बढ़ाने, एक से अधिक मौसम में खेती अपनाने तथा फसल पोर्टफोलियो में विविधता लाने में सक्षम बनाया है। इसमें बेहतर सिंचाई सुविधाओं और समय पर ऋण की उपलब्धता का भी योगदान रहा है।
  • ऋण अनुशासन में सुधार: पर्याप्त कार्यशील पूंजी की समय पर उपलब्धता ने कृषि आदानों की समय पर खरीद को सुगम बनाया है। वहीं, समय पर ऋण चुकौती प्रोत्साहन (PRI) प्राप्त करने वाले लाभार्थियों ने बेहतर ऋण चुकौती व्यवहार प्रदर्शित किया है, जिससे कृषि ऋण प्रदान करने में बैंकों का विश्वास बढ़ा है।
  • संबद्ध गतिविधियों को बढ़ावा: योजना ने डेयरी, पशुधन एवं अंतर्देशीय मत्स्यपालन के विस्तार में सहायता की है, आय के विविधीकरण को बढ़ावा दिया है तथा विशेष रूप से पूर्वोत्तर क्षेत्र में अंतर्देशीय मत्स्यपालन के लिए कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं (WCR) को पूरा किया है।

किसान क्रेडिट कार्ड–संशोधित ब्याज सहायता योजना (KCC-MISS) के बारे में

  • उद्देश्य: यह एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है, जिसके अंतर्गत किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के माध्यम से किसानों को फसल उत्पादन एवं पात्र संबद्ध गतिविधियों के लिए समय पर और किफायती अल्पकालिक संस्थागत ऋण उपलब्ध कराया जाता है।
  • ब्याज संबंधी लाभ:
    • ₹3 लाख तक के पात्र अल्पकालिक फसल ऋण पर 7% वार्षिक ब्याज दर लागू होती है।
    • केवल पशुपालन या मत्स्यपालन के लिए लिए गए ऋणों पर ₹2 लाख तक की राशि के लिए ब्याज संबंधी लाभ उपलब्ध है।
    • समय पर ऋण चुकाने वाले किसानों को अतिरिक्त 3% त्वरित ऋण चुकौती प्रोत्साहन (PRI) दिया जाता है, जिससे प्रभावी ब्याज दर घटकर 4% रह जाती है।
  • कवरेज: किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से फसल उत्पादन तथा पात्र संबद्ध गतिविधियों जैसे: पशुपालन, डेयरी, मत्स्यपालन और मधुमक्खी पालन के लिए रियायती अल्पकालिक ऋण उपलब्ध कराया जाता है।
  • प्रमुख विशेषताएँ:
    • सरकार पात्र ऋणदाता संस्थानों को ब्याज सहायता प्रदान करती है।
    • त्वरित ऋण चुकौती प्रोत्साहन (PRI) के माध्यम से किसानों को समय पर ऋण चुकाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
    • लघु एवं सीमांत किसानों (SMFs) के लिए परक्राम्य भंडारण रसीदों (NWRs) के आधार पर पात्र फसलोत्तर ऋण भी शामिल हैं। इससे किसानों को कृषि उपज की मजबूरी में कम कीमत पर बिक्री करने से बचाने में सहायता मिलती है।

KCC-MISS का महत्व

  • संस्थागत कृषि ऋण को सुदृढ़ करना: समय पर और किफायती औपचारिक ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित करता है, जिससे किसानों की अनौपचारिक एवं उच्च ब्याज वाले वित्तीय स्रोतों पर निर्भरता कम होती है।
  • कृषि उत्पादकता में वृद्धि: गुणवत्तापूर्ण बीज, उर्वरक, कृषि मशीनरी एवं अन्य कृषि आदानों की समय पर खरीद को सुगम बनाता है, जिससे उत्पादकता में सुधार और कृषि आय में वृद्धि होती है।
  • ग्रामीण आजीविकाओं में विविधीकरण को बढ़ावा: डेयरी, मत्स्यपालन, पशुपालन एवं मधुमक्खी पालन जैसे संबद्ध क्षेत्रों के लिए रियायती ऋण उपलब्ध कराकर आय के विविधीकरण और आजीविका की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा देता है।
  • वित्तीय समावेशन को आगे बढ़ाना: किसानों को औपचारिक संस्थागत वित्त व्यवस्था से जोड़ने के साथ बैंकिंग सेवाओं, फसल बीमा एवं अन्य ऋण-संबद्ध वित्तीय उत्पादों तक पहुँच को सुगम बनाता है।

कृषि ऋण वितरण में चुनौतियाँ

  • कमजोर वर्ग के किसानों तक सीमित पहुँच: किरायेदार किसान, बटाईदार, मौखिक पट्टेदार एवं भूमिहीन कृषकों को अक्सर औपचारिक भूमि स्वामित्व अभिलेखों के अभाव में संस्थागत ऋण प्राप्त करने में कठिनाई होती है।
  • क्षेत्रीय ऋण असंतुलन: राज्यों एवं क्षेत्रों के बीच कृषि ऋण का वितरण अभी भी असमान है। कई अपर्याप्त सेवा वाले क्षेत्रों में संस्थागत ऋण की पहुँच कमजोर बनी हुई है।
  • संबद्ध एवं फसलोत्तर गतिविधियों के लिए अपर्याप्त ऋण: कवरेज में विस्तार के बावजूद संबद्ध क्षेत्रों, फसलोत्तर प्रबंधन, भंडारण एवं मूल्य संवर्धन के लिए ऋण प्रवाह अभी भी अपनी संभावित क्षमता से कम है।
  • ऋण उपयोग एवं पुनर्भुगतान संबंधी जोखिम: जलवायु आघात, फसल विफलता, ऋणग्रस्तता एवं वित्तीय साक्षरता की कमी ऋण के उत्पादक उपयोग तथा समय पर ऋण चुकौती को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकती है।

आगे की राह

  • समावेशी ऋण पहुँच का विस्तार: KCC की प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए तथा किरायेदार किसानों, महिला किसानों एवं अन्य वंचित समूहों तक पहुँच बढ़ाने के लिए लचीले पात्रता मानदंड और डिजिटल पंजीकरण को बेहतर किया जाए।
  • डिजिटल कृषि ऋण को सुदृढ़ करना: किसान ऋण पोर्टल, आधार-सक्षम KCC, ई-KYC एवं प्रौद्योगिकी-आधारित ऋण मूल्यांकन का उपयोग करके पारदर्शिता, दक्षता एवं समय पर ऋण वितरण में सुधार किया जाए।
  • एकीकृत कृषि वित्त को बढ़ावा देना: कृषि उत्पादकता एवं किसानों की आय को अधिकतम करने के लिए रियायती ऋण को फसल बीमा, कृषि विस्तार सेवाओं, बाजार पहुँच एवं मूल्य-श्रृंखला अवसंरचना के साथ जोड़ा जाए।
  • परिणाम-आधारित मूल्यांकन का संस्थानीकरण: योजना की संरचना को बेहतर बनाने, लक्षित लाभार्थियों तक पहुँच सुनिश्चित करने तथा साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण के माध्यम से सार्वजनिक संसाधनों के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर स्वतंत्र मूल्यांकन किया जाए।
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