संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-3: प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कृषि सब्सिडी तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से संबंधित मुद्दे; सार्वजनिक वितरण प्रणाली-उद्देश्य,कार्यप्रणाली,सीमाएँ, पुनर्गठन; बफर स्टॉक और खाद्य सुरक्षा से संबंधित विषय।
संदर्भ: आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने विपणन सत्र 2026-27 हेतु कच्चे जूट के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि को मंजूरी दी।
अन्य संबंधित जानकारी

- वर्ष 2026–27 सत्र के लिए TD-3 श्रेणी के कच्चे जूट का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹5,925 प्रति क्विंटल तय किया गया है।
- TD-3 (टोस्सा देसी) कई भौतिक गुणों के आधार पर भारतीय जूट निगम (JCI) द्वारा परिभाषित एक विशिष्ट गुणवत्ता श्रेणी है।
- संशोधित न्यूनतम समर्थन मूल्य, विपणन सत्र 2025-26 (₹5650 प्रति क्विंटल) की तुलना में ₹275 प्रति क्विंटल (या 4.9%) अधिक है।
- यह न्यूनतम समर्थन मूल्य, अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत पर 61.8% का प्रतिफल सुनिश्चित करता है।
- यह निर्णय केंद्रीय बजट 2018-19 में घोषित उस सिद्धांत के अनुरूप है, जिसके तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत (A2+FL) के कम से कम 1.5 गुना तय किया जाना है।
- पिछले कुछ वर्षों में, सरकार ने कच्चे जूट के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को वर्ष 2014-15 के ₹2,400 प्रति क्विंटल से बढ़ाकर वर्ष 2026-27 में ₹5,925 प्रति क्विंटल कर दिया है यानी इसमें कुल ₹3,525 प्रति क्विंटल (2.5 गुना) की वृद्धि हुई है।
- भारतीय जूट निगम (JCI) मूल्य समर्थन कार्यों को निष्पादित करने के लिए केंद्र सरकार की नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है।
भारत की MSP व्यवस्था
- न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की शुरुआत वर्ष 1966-67 में की गई थी। यह भारत सरकार द्वारा निर्धारित वह मूल्य है जो कृषि उत्पादकों को कृषि कीमतों में होने वाली किसी भी तीव्र गिरावट से सुरक्षा प्रदान करता है।
- आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) द्वारा बुआई के मौसम की शुरुआत में, कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों के आधार पर कुछ विशिष्ट फसलों (वर्तमान में 23) के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की घोषणा की जाती है।
- सरकार 22 अनिवार्य फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और गन्ने के लिए ‘उचित और लाभकारी मूल्य’ (FRP) की घोषणा करती है।
- फसलों की सूची इस प्रकार है:
- अनाज (7): धान, गेहूं, मक्का, ज्वार, बाजरा, जौ और रागी
- दलहन (5): चना, अरहर (तुअर), मूंग, उड़द और मसूर।
- तिलहन (7): मूंगफली, रेपसीड-सरसों, सोयाबीन, तिल, सूरजमुखी, कुसुम और रामतिल (नाइजर सीड)।
- वाणिज्यिक फसलें (4): खोपरा (छिलका रहित नारियल +), गन्ना, कपास और कच्चा जूट।
- न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के लिए सिफारिशें तैयार करते समय, कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) विभिन्न कारकों पर विचार करता है, जैसे — उत्पादन लागत (A2+FL विधि), मांग और आपूर्ति की स्थिति, अंतर-फसल मूल्य समानता, सामान्य मूल्य स्तर पर प्रभाव, घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय कीमतें, आदि।
किसानों पर राष्ट्रीय आयोग: स्वामीनाथन समिति
- इसने सिफारिश की थी कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) उत्पादन लागत (C2) से कम से कम 50% अधिक होना चाहिए।
- इसने उत्पादन लागत के तीन स्तरों का सुझाव दिया था:
- A2: फसल उत्पादन हेतु सभी प्रकार के नकद व्यय, जैसे बीज, खाद, रसायन, श्रम लागत, ईंधन लागत और सिंचाई लागत।
- A2+FL: इसमें A2 के साथ-साथ अवैतनिक पारिवारिक श्रम का एक अन्तर्निहित मूल्य सम्मिलित है।
- C2: C2 के अंतर्गत, A2 और FL में अनुमानित भूमि किराया और कृषि हेतु लिए गए ऋण पर ब्याज की लागत को जोड़ा जाता है।
- वर्तमान में, कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) उत्पादन लागत की गणना के लिए A2+FL विधि का उपयोग करता है।
जूट फसल और भारत के जूट उद्योग के बारे में

- जूट, जिसे गोल्डन फाइबर भी कहा जाता है, एक ऐसी फसल है जो आर्द्र उष्णकटिबंधीय जलवायु में अच्छी तरह से पनपती होती है और इसकी वृद्धि के लिए लगभग 50 सेमी जल की आवश्यकता होती है।
- बेहतर वृद्धि के लिए लिए इस फसल को 15°C से 34°C के बीच का औसत तापमान और 65% औसत सापेक्षिक आर्द्रता की आवश्यकता होती है।
- इसे मिट्टी के सभी प्रकारों, जैसे चिकनी मिट्टी से लेकर बलुई दोमट तक सभी में उगाया जा सकता है, किंतु दोमट जलोढ़ मिट्टी इसके लिए सबसे अच्छी होती है।
- यह एक नकदी फसल है, और इसे मार्च से मई तक बोया जाता है तथा मौसम की स्थिति के आधार पर जून के अंत से सितंबर तक इसकी कटाई होती है।
- खेती और उपयोग की दृष्टि से यह कपास के बाद भारत की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण रेशेदार फसल है।
- भारत विश्व में जूट का सबसे बड़ा उत्पादक है। यह अनुमानित विश्व उत्पादन का लगभग 50% साझा करता है। हालांकि, विशाल घरेलू बाजार की मांग के कारण अधिकांश जूट (कुल उत्पादन का लगभग 90%) की खपत घरेलू स्तर पर ही हो जाती है।
- भारत के प्रमुख जूट उत्पादक राज्य पश्चिम बंगाल (सबसे बड़ा जूट उत्पादक राज्य), असम, बिहार, ओडिशा और आंध्र प्रदेश हैं।
- भारत जूट और जूट उत्पादों का मुख्य रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, मिस्र, जर्मनी, इटली, जापान, सऊदी अरब और तुर्की को निर्यात करता है।
