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सामान्य अध्ययन-3: बुनियादी ढाँचा: बंदरगाह।

संदर्भ: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कंटेनर विनिर्माण प्रोत्साहन योजना (CMPS) को मंजूरी दी है। इस योजना के लिए वित्त वर्ष 2039–40 तक ₹10,000 करोड़ का परिव्यय निर्धारित किया गया है। इसका उद्देश्य विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी घरेलू कंटेनर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना, आयात पर निर्भरता कम करना और आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करना है।

कंटेनर विनिर्माण प्रोत्साहन योजना के बारे में

• घोषणा: केंद्रीय बजट 2026–27।

• नोडल मंत्रालय: पत्तन, पोत परिवहन और जहाजरानी मंत्रालय।

• कुल परिव्यय: ₹10,000 करोड़, जिसमें योजना के अंतर्गत वित्त वर्ष 2039–40 तक सहायता प्रदान की जाएगी।

• उद्देश्य: नई (ग्रीनफील्ड) विनिर्माण इकाइयों को प्रोत्साहित करना और मौजूदा (ब्राउनफील्ड) इकाइयों का विस्तार करना। साथ ही, परीक्षण संबंधी अवसंरचना विकसित करना तथा भारत में निर्मित शिपिंग कंटेनरों की लागत प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करना।

• लक्ष्य: वार्षिक घरेलू कंटेनर विनिर्माण क्षमता को लगभग दस गुना बढ़ाकर 7.5 लाख बीस-फुट समतुल्य इकाइयों (TEUs) तक पहुँचाना।

  • TEU कंटेनर क्षमता मापने की मानक इकाई है, जो 20 फुट लंबे शिपिंग कंटेनर पर आधारित है। 40 फुट लंबा कंटेनर 2 TEU के बराबर होता है।

• घरेलू सामग्री की अनिवार्यता: परिचालन सहायता प्राप्त करने वाले निर्माताओं को वित्त वर्ष 2031–32 तक न्यूनतम 70% घरेलू सामग्री की अनिवार्यता पूरी करनी होगी, जिसे वित्त वर्ष 2032–33 से बढ़ाकर 90% कर दिया जाएगा।

• CMPS के घटक: यह योजना तीन प्रमुख घटकों के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

1. ब्याज अनुदान सहायता (ISA)

2. परिचालन व्यय सहायता (OEA)

3. परीक्षण एवं प्रमाणन सहायता

पात्रता एवं सहायता संबंधी प्रमुख प्रावधान

• ग्रीनफील्ड इकाइयाँ: इनकी वार्षिक विनिर्माण क्षमता कम-से-कम 1,00,000 TEU होनी चाहिए।

• ब्राउनफील्ड विस्तार: वार्षिक क्षमता में कम-से-कम 25,000 TEU की वृद्धि करनी होगी तथा सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के तीन वर्षों के भीतर इकाई चालू करनी होगी।

• प्रति कंटेनर परिचालन सहायता:

  • 20 फुट का कंटेनर: ₹49,500।
  • 40 फुट का कंटेनर: ₹86,625।
  • विशेषीकृत 20 फुट का कंटेनर: ₹37,125–₹74,250।

• घरेलू मूल्य संवर्धन: वित्त वर्ष 2031–32 तक न्यूनतम 70% घरेलू सामग्री अनिवार्य होगी, जिसे वित्त वर्ष 2032–33 से बढ़ाकर 90% कर दिया जाएगा।

योजना की आवश्यकता एवं महत्त्व

• आयात पर निर्भरता कम करना: भारत प्रतिवर्ष लगभग 20 लाख खाली कंटेनरों का आयात करता है, जबकि वित्त वर्ष 2023–24 में घरेलू उत्पादन केवल 24,000 TEU था। इससे भारत वैश्विक मालभाड़े में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों के प्रति संवेदनशील हो जाता है।

• घरेलू विनिर्माण का विस्तार: CMPS का लक्ष्य नई विनिर्माण इकाइयों, मौजूदा इकाइयों के विस्तार और प्रौद्योगिकी विकास को समर्थन देकर वार्षिक क्षमता को 7.5 लाख TEU तक पहुँचाना है, जो वार्षिक आयात आवश्यकता का लगभग 37.5% है।

• वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना: परिचालन सहायता और घरेलू सामग्री संबंधी अनिवार्यताएँ लागत संबंधी असमानताओं, विशेषकर चीन की तुलना में, को कम करेंगी। साथ ही, विशेष प्रकार के इस्पात, कॉर्नर कास्टिंग, लकड़ी के फ्रेम और अन्य घटकों की घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करेंगी।

• रोजगार सृजन और निर्यात को बढ़ावा देना: इस योजना से 3,000 प्रत्यक्ष और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की अपेक्षा है। साथ ही, भारत को गुणवत्तापूर्ण शिपिंग कंटेनरों के संभावित वैश्विक निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।

• समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करना: CMPS, प्रस्तावित भारत कंटेनर शिपिंग लाइन (BCSL) की पूरक है, जिसे फरवरी 2026 में हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन (MoU) का समर्थन प्राप्त है। यह योजना पीएम गति शक्ति, राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति और सागरमाला के साथ मिलकर कंटेनरों की उपलब्धता, पत्तन कनेक्टिविटी और मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा देगी।

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