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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय| 

संदर्भ: हाल ही में, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने औद्योगिक आंकड़ों की सटीकता और प्रासंगिकता में सुधार करने हेतु औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) को ‘नियत-आधार प्रणाली’ से ‘श्रृंखला-आधारित पद्धति’ में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव दिया है।

अन्य संबंधित जानकारी

• यह प्रस्ताव MoSPI के चर्चा पत्र 2.0 के माध्यम से जारी किया गया है।

• यह सुधार IIP, सकल घरेलू उत्पाद (GDP) और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) सहित समष्टिगत आर्थिक संकेतकों  के चल रहे आधार वर्ष संशोधन अभ्यास का हिस्सा है।

• वर्तमान में, IIP का संकलन लैस्पेयर फ्रेमवर्क (Laspeyres framework) का उपयोग करके किया जाता है, जिसमें आधार वर्ष के संशोधन तक उद्योग भारांक (Weights) अपरिवर्तित बने रहते हैं।

• MoSPI ने उल्लेख किया कि मांग, तकनीक और नीति में तीव्र परिवर्तनों के कारण नए उद्योग उभर रहे हैं जबकि पुराने उद्योगों का पतन हो रहा है, जिससे नियत भारांक कम प्रासंगिक हो गए हैं।

• प्रस्तावित श्रृंखला-आधारित IIP प्रतिवर्ष उद्योग और क्षेत्रीय भारांकों को अद्यतन करेगा, जिससे सूचकांक वर्तमान उत्पादन संरचना को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित कर सकेगा।

श्रृंखलाबद्ध IIP हेतु कार्यप्रणाली

• वार्षिक श्रृंखला सूचकांक प्रतिवर्ष भारांकों को अद्यतन करता है। उदाहरण के लिए, 2011 और 2012 के बीच तुलना हेतु 2011 के भारांकों का उपयोग किया जाता है, जबकि 2012 और 2013 के बीच तुलना हेतु 2012 के भारांकों का उपयोग किया जाता है।

• प्रत्येक वर्ष की तुलना पिछले वर्ष से उन भारांकों के आधार पर की जाती है जो केवल एक वर्ष पुराने होते हैं।

• श्रृंखला की अवधारणा का मुख्य सिद्धांत पिछले वर्ष के भारांकों का उपयोग करके एक वर्ष के लिए श्रृंखला कड़ी (Chain Link – CL) उत्पन्न करना है, और प्रत्येक सूचकांक मूल्य वास्तविक श्रृंखला कड़ी और पिछले सूचकांक के आधार पर निर्मित किया जाता है।

• नए ढांचे के तहत, खनन, विनिर्माण और विद्युत के भारांकों को हालिया सकल मूल्य वर्धन (GVA) अनुमानों और उद्योगों के वार्षिक सर्वेक्षण (ASI) का उपयोग करके प्रतिवर्ष संशोधित किया जाएगा।

• श्रृंखला-बद्ध दृष्टिकोण विसंगतियों को कम करेगा, सटीकता में सुधार करेगा और भारत के औद्योगिक आंकड़ों को उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में प्रचलित वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप बनाएगा।

श्रृंखला-आधारित IIP की मुख्य विशेषताएँ

• वार्षिक भारांक अद्यतन: पुरानी प्रणाली के विपरीत, जिसने एक दशक (जैसे 2011-12) के लिए भारांकों को स्थिर कर दिया था, श्रृंखला-आधारित विधि प्रतिवर्ष क्षेत्र और उद्योग के भारांक अद्यतन करती है।

• संबद्ध संवृद्धि दर: संवृद्धि को किसी दूरस्थ आधार वर्ष के बजाय ठीक पूर्ववर्ती वर्ष (t-1) के सापेक्ष मापा जाता है। इन वार्षिक परिवर्तनों को फिर एक दीर्घकालिक श्रृंखला बनाने के लिए आपस में “श्रृंखलाबद्ध” किया जाता है।

• परिवर्तनीय बास्केट: यह पद्धति उभरते उद्योगों (जैसे सेमीकंडक्टर या ई-वाहन घटक) को लगभग वास्तविक समय में शामिल करने और अप्रचलित उद्योगों को धीरे-धीरे हटाने की अनुमति देती है।

• डेटा स्रोत: क्षेत्रीय भारांक (खनन, विनिर्माण, विद्युत) नवीनतम राष्ट्रीय लेखा (National Accounts) डेटा से प्राप्त किए जाएंगे, जबकि उद्योग-स्तरीय भारांकों के लिए उद्योगों के वार्षिक सर्वेक्षण (ASI) का उपयोग किया जाएगा।

भारत में श्रृंखला -बद्ध सूचकांक शुरू करने की आवश्यकता

• योज्यता की हानि: श्रृंखला-बद्ध IIP में, कुल सूचकांक निचले स्तर के सूचकांकों का सटीक योग नहीं होता है, जिससे NIC वर्गीकरण स्तरों पर विसंगतियां उत्पन्न होती हैं।

• सूचकांक विचलन का जोखिम: कीमतों या मात्रा में बार-बार उतार-चढ़ाव या उलटफेर के कारण श्रृंखला बनाने से ‘विचलन’ उत्पन्न हो सकता है, जहाँ सूचकांक सामान्यीकरण के बाद भी अपने मूल स्तर पर नहीं लौटता है।

• कालिक तुलनात्मकता में कमी: हालांकि श्रृंखला-बद्धता वर्तमान सटीकता में सुधार करती है, यह उप-क्षेत्रों के बीच या लंबी ऐतिहासिक अवधियों में प्रत्यक्ष तुलना को अधिक जटिल बना देती है।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP)

• केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO) 1950 से औद्योगिक उत्पादन सूचकांक संकलन और प्रकाशन के लिए जिम्मेदार था।

• मई 2019 में एक बड़ा संगठनात्मक परिवर्तन हुआ, जब भारत सरकार ने राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (NSO) बनाने के लिए CSO और राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय (NSSO) का विलय कर दिया।

• मई 2019 से, राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय औद्योगिक उत्पादन सूचकांक जारी करता है।

• आधार वर्ष को हमेशा 100 का मान दिया जाता है। भारत में IIP श्रृंखला का वर्तमान आधार वर्ष 2011-12 है। अतः, यदि वर्तमान IIP 116 है, तो इसका अर्थ है कि आधार वर्ष की तुलना में 16% की वृद्धि हुई है।

• वर्तमान IIP बास्केट में तीन क्षेत्रों के तहत 839 प्रतिनिधि वस्तुएं शामिल हैं:

  • खनन – 14.37%
  • विनिर्माण – 77.63%
  • विद्युत – 7.99%

• आठ प्रमुख (कोर) उद्योग औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में शामिल वस्तुओं के कुल भारांक के 40.27 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं।

Source:
Money Control
PIB
Financial Express

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