संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-2: सरकारी नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप तथा उनके अभिकल्पन और कार्यान्वयन से संबंधित विषय|
संदर्भ: श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा 26 अगस्त 2021 को शुरू किया गए ई-श्रम पोर्टल के वर्ष 2026 में पाँच वर्ष पूरे हो रहे हैं। यह भारत के असंगठित कार्यबल के लिए एक समावेशी और प्रौद्योगिकी-सक्षम सामाजिक सुरक्षा तंत्र के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
ई-श्रम पोर्टल के बारे में
• ई-श्रम असंगठित श्रमिकों के पंजीकरण और कल्याण के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा विकसित किया गया है।
• इसने भारत का पहला आधार-प्रमाणित असंगठित श्रमिकों का राष्ट्रीय डेटाबेस (NDUW) तैयार किया है तथा प्रत्येक पंजीकृत श्रमिक को एक विशिष्ट 12-अंकीय यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) प्रदान किया जाता है।

• असंगठित श्रमिक में असंगठित क्षेत्र में कार्य करने वाला घरेलू/गृह-आधारित श्रमिक, स्व-नियोजित श्रमिक या मजदूरी श्रमिक शामिल है। इसके अलावा, संगठित क्षेत्र में कार्यरत ऐसे श्रमिक भी इसमें शामिल हैं जो EPFO/ESIC के सदस्य नहीं हैं और सरकारी कर्मचारी नहीं हैं।
• इसके प्रमुख उद्देश्यों में सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं का अभिसरण सुनिश्चित करना, प्रवासी और निर्माण श्रमिकों के लिए लाभों की पोर्टेबिलिटी में सुधार करना, API के माध्यम से श्रमिकों के डेटा का सुरक्षित साझाकरण सुगम बनाना तथा आपातकाल और संकट के समय साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण एवं योजना को समर्थन प्रदान करना शामिल है।
• ई-श्रम वन-स्टॉप सॉल्यूशन को 21 अक्टूबर 2024 को लॉन्च किया गया। इसने ई-श्रम पोर्टल को केवल श्रमिकों के डेटाबेस से आगे बढ़ाकर एक एकीकृत सेवा-वितरण प्लेटफॉर्म में परिवर्तित कर दिया।
• इसके अंतर्गत 15 सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं को एक साथ जोड़ा गया है, जिनमें PM-SYM, PMSBY, PMJJBY, NSAP, ONORC और PMAY-G शामिल हैं। साथ ही, यह श्रमिकों को नेशनल करियर सर्विस (NCS), स्किल इंडिया डिजिटल हब और myScheme से जोड़ता है।
• पात्र श्रमिक प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) में नामांकन कर सकते हैं। इसके तहत दुर्घटना में मृत्यु या पूर्ण स्थायी विकलांगता की स्थिति में ₹2 लाख तथा आंशिक स्थायी विकलांगता की स्थिति में ₹1 लाख का बीमा कवर प्रदान किया जाता है।
- प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के अंतर्गत ₹2 लाख का जीवन बीमा कवर प्रदान किया जाता है। प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को 60 वर्ष की आयु के बाद ₹3,000 प्रति माह की सुनिश्चित न्यूनतम पेंशन प्रदान की जाती है।
• वर्ष 2025 में भाषिणी (Bhashini) द्वारा सक्षम 22 भाषाओं में बहुभाषी सुविधा शुरू की गई। पोर्टल प्रवासी श्रमिकों के पारिवारिक विवरण भी दर्ज करता है तथा निर्माण श्रमिकों के डेटा को राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के साथ साझा करने की सुविधा प्रदान करता है, ताकि उनका BOCW बोर्डों में पंजीकरण कराया जा सके।
• पंजीकरण निःशुल्क है और पात्रता की शर्तों के अधीन, 16 वर्ष और उससे अधिक आयु के असंगठित क्षेत्र में कार्यरत श्रमिक ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण करा सकते हैं।
- श्रमिक ई-श्रम पोर्टल, कॉमन सर्विस सेंटर (CSCs), राज्य सेवा केंद्रों तथा सरकारी क्षेत्रीय अधिकारियों के माध्यम से पंजीकरण करा सकते हैं। इसके लिए ई-KYC हेतु आधार और मोबाइल नंबर का उपयोग किया जाता है।
प्रमुख उपलब्धियाँ और महत्व
• बड़े पैमाने पर कवरेज: 31.89 करोड़ पंजीकरण के साथ ई-श्रम ने भारत में असंगठित श्रमिकों के सबसे बड़े डेटाबेस में से एक का निर्माण किया है। इनमें महिलाओं की हिस्सेदारी 54.28% है।
• सामाजिक सुरक्षा में समावेशन: असंगठित श्रमिकों को राष्ट्रीय डिजिटल पहचान प्रदान करके, ई-श्रम पहले से बिखरे हुए श्रमिकों को अधिक औपचारिक और पहचान योग्य सामाजिक सुरक्षा तंत्र से जोड़ता है।
• कल्याणकारी लाभों की पोर्टेबिलिटी: इसका राष्ट्रीय डेटाबेस और अंतर-राज्यीय अभिसरण प्रवासी एवं निर्माण श्रमिकों के लिए कल्याणकारी लाभों की पोर्टेबिलिटी को बेहतर बना सकता है, क्योंकि उनका रोजगार और निवास स्थान अक्सर बदलता रहता है।
• एकीकृत सेवा वितरण: वन-स्टॉप सॉल्यूशन 15 कल्याणकारी योजनाओं को रोजगार, कौशल विकास, अप्रेंटिसशिप और पेंशन सेवाओं के साथ एकीकृत करता है। इससे विभिन्न सेवाओं के बीच बिखराव कम होता है और सरकारी सहायता तक पहुँच बेहतर होती है।
• साक्ष्य-आधारित शासन: API के माध्यम से सुरक्षित डेटा साझाकरण और व्यापक श्रमिक डेटाबेस बेहतर लक्षित लाभ-वितरण, योजना निर्माण, नीति-निर्माण और संकट के समय त्वरित प्रतिक्रिया में सहायता कर सकते हैं।
• भविष्य के रोजगार का समर्थन: लगभग 11.5 लाख गिग एवं प्लेटफॉर्म श्रमिकों का पंजीकरण तथा भाषिणी (Bhashini) के माध्यम से बहुभाषी सुविधा, रोजगार के उभरते स्वरूपों और विविध श्रमिक समूहों के लिए सामाजिक सुरक्षा ढाँचे को मजबूत करती है।
चुनौतियाँ/ बाधाएँ
• अंतिम छोर तक पहुँच: डिजिटल पंजीकरण को वास्तविक रूप से लाभों तक पहुँच में परिवर्तित करना आवश्यक है। इसके लिए निरंतर डिजिटल साक्षरता, जागरूकता और सहायता-आधारित पहुँच सुनिश्चित करनी होगी।
• डेटा की सटीकता और अद्यतन जानकारी: ई-श्रम की प्रभावशीलता श्रमिकों की सटीक एवं नियमित रूप से अद्यतन जानकारी पर निर्भर करती है।
• प्रभावी पोर्टेबिलिटी और अभिसरण: विभिन्न राज्यों और विभागों के बीच एकीकरण इस प्रकार होना चाहिए कि विशेष रूप से प्रवासी और निर्माण श्रमिकों को कल्याणकारी लाभों तक निर्बाध पहुँच सुनिश्चित हो सके।
• उभरते श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा: गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के पंजीकरण को पर्याप्त और टिकाऊ सामाजिक सुरक्षा कवरेज में परिवर्तित करना आवश्यक है।
