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सामान्य अध्ययन-2: शासन के महत्वपूर्ण पहलू, पारदर्शिता और जवाबदेही, ई-गवर्नेंस- अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही और संस्थागत तथा अन्य उपाय।
सामान्य अध्ययन-3: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौतियाँ, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सोशल नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा के बुनियादी सिद्धांत; मनी-लॉन्ड्रिंग और इसकी रोकथाम।
संदर्भ: “राइजिंग रिप्रेशन मीट्स ग्लोबल रेजिस्टेंस: इंटरनेट शटडाउन इन 2025” रिपोर्ट, जिसे एक्सेस नाउ और #KeepItOn अभियान द्वारा जारी किया गया है, वैश्विक स्तर पर इंटरनेट शटडाउन की बढ़ती प्रवृत्ति को रेखांकित करती है।
अन्य महत्वपूर्ण जानकारी:

- यह रिपोर्ट वैश्विक स्तर पर इंटरनेट शटडाउन को समाप्त करने के लिए राइट्सकॉन में 2016 में शुरू किए गए #KeepItOn अभियान का भाग है।
- इस अभियान में अब 106 देशों के 366+ संगठन शामिल हैं, जिनमें नागरिक समाज, अनुसंधान निकाय और मीडिया समूह शामिल हैं।
- डेटा तकनीकी निगरानी और प्रासंगिक स्रोतों जैसे कि समाचार रिपोर्टों और क्षेत्रीय वृत्तांतों पर आधारित है।
- डेटासेट गतिशील है और इसे अपडेट किया जा सकता है, क्योंकि कुछ शटडाउन रिपोर्ट नहीं हो सकते हैं।
- इसने 2025 में 52 देशों में 313 शटडाउन दर्ज किए, जो अब तक का सर्वाधिक है; जबकि भारत में 65 शटडाउन दर्ज किए गए, जो 2017 के बाद से इसका सबसे निचला स्तर है, लेकिन फिर भी विश्व स्तर पर सर्वाधिक में से एक है।
मुख्य निष्कर्ष

- रिकॉर्ड उच्च वैश्विक शटडाउन: 2025 में 52 देशों में इंटरनेट शटडाउन 313 घटनाओं के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुंच गया।
- 2025 का एक भी दिन दुनिया में कहीं न कहीं कम से कम एक शटडाउन के बिना नहीं बीता।
- प्रभावित देशों की संख्या 2016 के 28 से बढ़कर 2025 में 52 हो गई है।
- शटडाउन का क्षेत्रीय संकेंद्रण: एशिया-प्रशांत क्षेत्र में 195 शटडाउन दर्ज किए गए, जो विश्व स्तर पर सर्वाधिक है।
- म्यांमार में सैन्य दमन के कारण सबसे अधिक शटडाउन (95) दर्ज किए गए।
- पूर्वी यूरोप और मध्य एशिया में 29 शटडाउन दर्ज किए गए, जिसमें रूस और बेलारूस ने चुनावों और सुरक्षा स्थितियों के दौरान शटडाउन का उपयोग किया।
- भारत का निरंतर उच्च उपयोग: भारत ने 2025 में 65 शटडाउन दर्ज किए, जो 2017 के बाद से सबसे कम है, लेकिन फिर भी वैश्विक स्तर पर दूसरे स्थान पर रहा।
- इन शटडाउन ने 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रभावित किया।
- ये मुख्य रूप से विरोध प्रदर्शनों, सांप्रदायिक हिंसा, संघर्षों और धार्मिक आयोजनों के दौरान लगाए गए थे।
- कुल शटडाउन (2016 से 920) के मामले में भारत विश्व स्तर पर शीर्ष पर बना हुआ है।
- रिपोर्ट लोकतांत्रिक व्यवस्था में शटडाउन के सामान्यीकरण (normalisation) पर चिंता व्यक्त करती है।
- संघर्ष प्राथमिक कारक के रूप में: संघर्ष मुख्य कारण बना रहा, जिससे 125 शटडाउन (लगभग 40%) हुए।
- शटडाउन का उपयोग संचार को बाधित करने और अत्याचारों को छिपाने के लिए युद्ध के औजारों के रूप में किया गया था।
- इन्हें अक्सर संघर्ष क्षेत्रों में आबादी को अलग-थलग करने और सूचना को नियंत्रित करने के लिए लगाया गया था।
- राजनीतिक अस्थिरता और विरोध प्रदर्शन: विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक अस्थिरता के कारण 19 देशों में 64 शटडाउन हुए।
- सरकारों ने असहमति को दबाने और सार्वजनिक विमर्श (public narratives) को नियंत्रित करने के लिए शटडाउन का उपयोग किया।
- राजनीतिक परिणामों को प्रभावित करने के लिए कई देशों में चुनाव संबंधी शटडाउन दर्ज किए गए।
- मानवाधिकार संबंधी चिंताएँ: लगभग 70 शटडाउन मानवाधिकारों के हनन से जुड़े थे।
- हिंसा को छिपाने, सूचना प्रवाह को प्रतिबंधित करने और दुर्व्यवहारों के दस्तावेजीकरण को रोकने के लिए शटडाउन का उपयोग किया गया।
- इन्होंने आपातकालीन सेवाओं, मानवीय सहायता और आवश्यक जानकारी तक पहुंच को बाधित किया।
- डिजिटल प्रतिबंधों का विस्तार: अधिकारियों ने प्रतिबंधों को दरकिनार करने से रोकने के लिए तेजी से VPNs और अन्य टूल्स को लक्षित किया।
- फेसबुक, व्हाट्सएप, टेलीग्राम और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को ब्लॉक करने के मामलों में वृद्धि हुई।
- नए रुझानों में LEO उपग्रह इंटरनेट सेवाओं का व्यवधान शामिल था, जो वैकल्पिक संपर्क पर नियंत्रण के विस्तार का संकेत देता है।
- सीमा पार शटडाउन: विभिन्न क्षेत्रों में बाहरी कारकों द्वारा कम से कम 18 शटडाउन लगाए गए।
- इनमें साइबर हमले, बुनियादी ढांचे में व्यवधान और संचार प्रणालियों में हस्तक्षेप जैसे तरीके शामिल थे।
- ऐसी कार्रवाइयों ने संघर्षों और संकटों के प्रभाव को और तीव्र कर दिया।
- शासन के उपकरण के रूप में शटडाउन का सामान्यीकरण: अशांति, चुनाव और सुरक्षा चिंताओं के लिए शटडाउन का उपयोग तेजी से एक ‘डिफ़ॉल्ट प्रतिक्रिया’ के रूप में किया जा रहा है।
- यह शासन और नियंत्रण के उपकरण के रूप में डिजिटल प्रतिबंधों के उपयोग के बढ़ते रुझान को दर्शाता है।
- रिपोर्ट चेतावनी देती है कि ऐसा सामान्यीकरण लोकतांत्रिक सिद्धांतों के साथ असंगत है।
- बढ़ता वैश्विक प्रतिरोध: शटडाउन के विरुद्ध नागरिक समाज और कानूनी संस्थानों का प्रतिरोध बढ़ रहा है।
- न्यायालयों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने शटडाउन को अधिकारों के उल्लंघन के रूप में मान्यता देना शुरू कर दिया है।
- जवाबदेही सुनिश्चित करने और ऐसी प्रथाओं के सामान्यीकरण को रोकने के लिए वैश्विक स्तर पर प्रयास जारी हैं।
Sources:
Indian Express
Access Now
The Wire
