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सामान्य अध्ययन-1 : भारतीय समाज की प्रमुख विशेषताएँ; जनसंख्या एवं उससे संबंधित मुद्दे।

सामान्य अध्ययन-2 : केंद्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति-संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ तथा इन योजनाओं का कार्य निष्पादन।

संदर्भ: वित्तीय वर्ष 2026–27 के दौरान 30 सितंबर 2026 को समाप्त तिमाही के लिए, सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के लिएअटल वयो अभ्युदय योजना  (AVYAY) के एक घटक, वरिष्ठ नागरिकों के लिए एकीकृत कार्यक्रम (IPSr.C) के अंतर्गत 755 परियोजनाओं को अनुदान सहायता के रूप में ₹77.98 करोड़ जारी किए हैं।

अटल वयो अभ्युदय योजना के बारे में

  • शुरुआत : वर्ष 2021 में शुरू की गई AVYAY योजना में वरिष्ठ नागरिकों के लिए पूर्ववर्ती राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPSrC) को समाहित और विस्तारित किया गया। इसके अंतर्गत बुजुर्गों के कल्याण से संबंधित विभिन्न पहलों को एक ही योजना के अंतर्गत लाया गया।
  • नोडल मंत्रालय : सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय।
  • लक्षित समूह : 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक, विशेष रूप से निर्धन एवं कमजोर स्थिति वाले वृद्धजन।
  • उद्देश्य: आश्रय, भोजन, स्वास्थ्य देखभाल और मनोरंजन संबंधी सहायता प्रदान करके जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना; संस्थागत एवं समुदाय-आधारित देखभाल को मजबूत करना; तथा सरकारों, गैर-सरकारी संगठनों, स्थानीय निकायों और समुदायों की क्षमता का निर्माण करके सक्रिय एवं उत्पादक वृद्धावस्था को बढ़ावा देना।
  • AVYAY के घटक:
    • वरिष्ठ नागरिकों के लिए एकीकृत कार्यक्रम (IPSrC): यह वरिष्ठ नागरिक गृहों, निरंतर देखभाल गृहों, मोबाइल चिकित्सा इकाइयों और फिजियोथेरेपी सुविधाओं के संचालन एवं रखरखाव के लिए गैर-सरकारी संगठनों, पंचायती राज संस्थाओं और स्थानीय निकायों सहित पात्र संगठनों को अनुदान सहायता प्रदान करता है।
    • वरिष्ठ नागरिकों के लिए राज्य कार्य योजना (SAPSrC): यह राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कार्य योजनाएँ तैयार करने और लागू करने में सहायता प्रदान करती है। इसके अंतर्गत वृद्धावस्था देखभालकर्ताओं का प्रशिक्षण, मोतियाबिंद शल्य चिकित्सा अभियान तथा राज्य-विशिष्ट अन्य अनुमोदित कल्याणकारी पहलें शामिल हो सकती हैं।
    •  राष्ट्रीय वयोश्री योजना (RVY): यह आयु संबंधी दिव्यांगताओं या शारीरिक दुर्बलताओं से प्रभावित पात्र वरिष्ठ नागरिकों को उनकी कार्यात्मक आत्मनिर्भरता में सुधार के लिए सहायक जीवन-यापन उपकरण प्रदान करती है।
    • उत्पादक सहभागिता के लिए वरिष्ठ नागरिक अवसर (SCOPE): यह एक पोर्टल के माध्यम से अनुभवी वरिष्ठ नागरिकों को रोजगार के अवसरों से जोड़ता है। यह पोर्टल उनकी प्राथमिकताओं का संभावित नियोक्ताओं के साथ मिलान करता है।
    • सीनियरकेयर एजिंग ग्रोथ इंजन (SAGE): यह स्टार्टअप को वृद्धजनों की देखभाल के लिए नवोन्मेषी उत्पाद, सेवाएँ और प्रौद्योगिकियाँ विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करता है। चयनित स्टार्टअप को मार्गदर्शन और बाजार से जुड़ाव की सुविधाओं के साथ ₹1 करोड़ तक की इक्विटी सहायता मिल सकती है।

प्रमुख उपलब्धियाँ

  • संस्थागत देखभाल: वरिष्ठ नागरिकों के लिए एकीकृत कार्यक्रम (आईपीएसआरसी) के अंतर्गत 764 वरिष्ठ नागरिक गृहों, 13 निरंतर देखभाल गृहों, 17 मोबाइल चिकित्सा इकाइयों और 3 फिजियोथेरेपी क्लीनिकों को सहायता दी जाती है। इनका मुख्य उद्देश्य निर्धन वरिष्ठ नागरिकों को आश्रय और देखभाल प्रदान करना है।
  • सहायक उपकरण: राष्ट्रीय वयोश्री योजना (आरवीवाई) के अंतर्गत, आयु संबंधी दिव्यांगताओं और शारीरिक दुर्बलताओं से प्रभावित 10.45 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को अब तक लगभग 55.88 लाख सहायक जीवन-यापन उपकरणों से लाभ मिला है।
  •  हेल्पलाइन सहायता: वरिष्ठ नागरिकों के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन एल्डरलाइन (14567) अक्टूबर 2021 में शुरू की गई थी। इस पर 8.66 लाख से अधिक कार्रवाई योग्य कॉल प्राप्त हुई हैं। यह सूचना, मार्गदर्शन, भावनात्मक सहायता और क्षेत्रीय स्तर पर हस्तक्षेप की सुविधा प्रदान करती है।
  • डिजिटल पहल: मई 2026 में सरकार ने कल्याणकारी योजनाओं, वरिष्ठ नागरिक गृहों और सहायता सेवाओं की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए जीवन (JEEVAN) मोबाइल एप्लिकेशन शुरू किया। इसके साथ ही शतायु (SHATAYU) डैशबोर्ड भी शुरू किया गया, जो वरिष्ठ नागरिकों और उनके परिवारों को प्रशिक्षित वृद्धावस्था देखभालकर्ताओं की खोज करने में सहायता करता है।

योजना की आवश्यकता एवं महत्त्व

  • जनसांख्यिकीय वृद्धावस्था की चुनौती का समाधान: भारत में 2011 की जनगणना के अनुसार 10.38 करोड़ वरिष्ठ नागरिक थे। वर्ष 2036 तक इनकी संख्या बढ़कर 23 करोड़ होने का अनुमान है, जिससे स्वास्थ्य देखभाल, आश्रय और सामाजिक सहायता की माँग बढ़ेगी।
  • स्वास्थ्य एवं स्वतंत्र जीवन को समर्थन: राष्ट्रीय वयोश्री योजना (आरवीवाई) आयु संबंधी दिव्यांगताओं से प्रभावित पात्र वृद्धजनों को सहायक उपकरण प्रदान करती है, जबकि आईपीएसआरसी द्वारा समर्थित गृह निर्धन वरिष्ठ नागरिकों को आवासीय देखभाल उपलब्ध कराते हैं।
  • उत्पादक वृद्धावस्था को बढ़ावा : वरिष्ठ नागरिकों के लिए उत्पादक सहभागिता अवसर (स्कोप) अनुभवी वरिष्ठ नागरिकों को रोजगार के अवसरों से जोड़ता है, जिससे वे अपने कौशल और ज्ञान का योगदान जारी रख सकते हैं।
  • सिल्वर इकोनॉमी का विकास : सीनियरकेयर एजिंग ग्रोथ इंजन (सेज) वृद्धजनों की देखभाल से संबंधित उत्पाद, सेवाएँ और प्रौद्योगिकियाँ विकसित करने वाले स्टार्टअप को सहायता प्रदान करता है। इससे वरिष्ठ नागरिकों के अनुकूल समाधानों के बढ़ते बाजार में नवाचार को प्रोत्साहन मिलता है।

चुनौतियाँ एवं आगे की राह

  • अवसंरचना संबंधी कमियाँ: वृद्धजनों की अनुमानित बढ़ती आबादी को देखते हुए संस्थागत क्षमता का विस्तार करना आवश्यक है। इसके साथ ही किफायती घरेलू एवं समुदाय-आधारित देखभाल सेवाओं का भी विस्तार किया जाना चाहिए। राज्यों को जिला स्तर पर कमियों की पहचान करके स्थानीय स्तर पर सुलभ सेवाओं का विस्तार करना चाहिए।
  • प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं की कमी: वरिष्ठ नागरिकों के लिए राज्य कार्य योजना (SAPSRC) और पीएम-स्पेशल के माध्यम से वृद्धावस्था देखभाल संबंधी प्रशिक्षण का विस्तार किया जाना चाहिए। साथ ही, उपयुक्त संदर्भन एवं सूचना मंचों के माध्यम से प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं तक पहुँच में सुधार किया जाना चाहिए।
  • सेवा वितरण में जवाबदेही: प्रभावी क्षेत्रीय निरीक्षण, उपयोगिता प्रमाण-पत्रों को समय पर प्रस्तुत करना और लेखापरीक्षित विवरण सुनिश्चित किए जाने चाहिए। इसके साथ ही, आईपीएसआरसी से वित्तपोषित संस्थानों के लिए ई-अनुदान निगरानी प्रणाली तथा निर्धारित उपस्थिति एवं पारदर्शिता तंत्र को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए।
  • जागरूकता एवं सामाजिक सहायता: एल्डरलाइन (14567), राष्ट्रीय वयोश्री योजना (आरवीवाई) के अंतर्गत सहायक उपकरणों तथा स्कोप के माध्यम से रोजगार के अवसरों के बारे में जागरूकता एवं पहुँच बढ़ाई जानी चाहिए। सामाजिक अलगाव को कम करने और वृद्धजनों को अपने घरों में सुरक्षित रूप से वृद्धावस्था बिताने में सक्षम बनाने के लिए विभिन्न पीढ़ियों के बीच संवाद एवं सहभागिता कार्यक्रमों तथा वृद्धजन-अनुकूल सामुदायिक सहायता को मजबूत किया जाना चाहिए।
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