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सामान्य अध्ययन –2: विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप तथा उनके अभिकल्पन एवं कार्यान्वयन से संबंधित विषय।

सामान्य अध्ययन –3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास और अनुप्रयोग और रोजमर्रा के जीवन पर उनके प्रभाव।

संदर्भ: स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) के अनुसार, पिछले एक दशक में वार्षिक अंग प्रत्यारोपण की संख्या में लगभग चार गुना वृद्धि हुई है, जो 2013 में 5,000 से भी कम थी और 2025 में बढ़कर लगभग 20,000 हो गई है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • इस परिवर्तन का नेतृत्व राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) द्वारा किया गया है, जिसे अंग आवंटन और साझाकरण के लिए राष्ट्रीय समन्वय प्राधिकरण के रूप में मजबूत किया गया है।
  • जन जागरूकता ने इसमें एक बड़ी भूमिका निभाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में बार-बार की गई अपीलों ने अंग दान को एक सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में सामान्य बनाने में मदद की है।
  • मंत्रालय इस बदलाव को एक अधिक नैतिक, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम प्रत्यारोपण पारिस्थितिकी तंत्र की ओर बढ़ते कदम के रूप में वर्णित करता है।

अंग दान और प्रत्यारोपण

  • अंग दान और प्रत्यारोपण, वह प्रक्रिया है जिसमें एक स्वस्थ अंग को दाता से निकालकर अंग-विफलता से पीड़ित व्यक्ति में प्रत्यारोपित किया जाता है। 
  • इसमें दो सर्जरी शामिल होती हैं—एक अंग प्राप्त करने के लिए और दूसरी उसे प्राप्तकर्ता में प्रत्यारोपित करने के लिए।
  • यह प्रक्रिया जानलेवा अंग रोगों से पीड़ित लोगों को जीवन का दूसरा अवसर प्रदान करती है, हालांकि वैश्विक स्तर पर मांग आपूर्ति से कहीं अधिक है।

अंग दान के प्रकार:

  • मृतक दाता: मृत्यु के बाद उन व्यक्तियों द्वारा अंग दान किए जाते हैं जिन्होंने अपने जीवनकाल में सहमति दी थी। प्रत्यारोपण से पहले डॉक्टर अंग की व्यवहार्यता का आकलन करते हैं।
  • जीवित दाता: एक स्वस्थ व्यक्ति जीवित रहते हुए अपने अंग या उसका एक हिस्सा दान करता है। इसके लिए सख्त चिकित्सा मूल्यांकन और प्राप्तकर्ता के साथ अनुकूलता की जाँच की जाती है।

अंग प्रत्यारोपण की स्थिति

  • अंग प्रत्यारोपण की संख्या 2013 में 5,000 से कम से बढ़कर 2025 में लगभग 20,000 हो गई है, जो प्रत्यारोपण क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि दर्शाती है।
  • अब लगभग 18% प्रत्यारोपण मृतक दाताओं के अंगों से होते हैं, जो कैडेवरिक दान दरों में निरंतर वृद्धि का संकेत है।
  • केवल 2025 में, 1,200 से अधिक परिवारों ने मृत्यु के बाद अंग दान के लिए सहमति दी, जिससे बहु-अंग प्राप्ति संभव हुई और हजारों जानें बचाई गईं।
  • 17 सितंबर, 2023 से अब तक 4.8 लाख से अधिक नागरिकों ने आधार-आधारित डिजिटल सत्यापन प्रणाली के माध्यम से अंग दाता के रूप में पंजीकरण कराया है।
  • भारत ने हृदय, फेफड़े और अग्न्याशय जैसे जटिल प्रत्यारोपणों में मजबूत क्षमताएँ विकसित की हैं, जिनके परिणाम वैश्विक मानकों के बराबर हैं और लागत काफी कम है।
  • भारत कुल अंग प्रत्यारोपण की संख्या में विश्व स्तर पर अमेरिका और चीन के बाद तीसरे स्थान पर है।

भारत में अंग दान के लिए कानूनी ढाँचा और पहल

  • मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम (THOTA), 1994: यह भारत का प्राथमिक कानून है जो अंग प्रत्यारोपण को विनियमित करता है।
    • इसे व्यावसायिक तस्करी को रोकने और अंग प्राप्ति के लिए कानूनी प्रक्रियाएं स्थापित करने हेतु बनाया गया था।
    • इस अधिनियम ने ‘ब्रेन-स्टेम डेथ’ को कानूनी मृत्यु के रूप में मान्यता दी, जिससे मृतक दान संभव हुआ, और मानव अंगों की बिक्री पर कड़े दंड का प्रावधान किया।
  • मानव अंग प्रत्यारोपण (संशोधन) अधिनियम, 2011: इसने 1994 के कानून का विस्तार करते हुए अंगों के साथ-साथ ऊतकों (जैसे त्वचा, हड्डी, कॉर्निया और हृदय वाल्व) को भी शामिल किया।
  • सरकार की नई पहल: भारत सरकार ने अंग दान के लिए “एक राष्ट्र, एक नीति” का प्रस्ताव दिया है। प्रमुख सुधारों में शामिल हैं:
    • मृतक दाता अंग प्रत्यारोपण के लिए पंजीकरण हेतु निवास स्थान (Domicile) की अनिवार्यता को समाप्त करना, जिससे किसी भी राज्य में पंजीकरण संभव हो सके।
    • पात्रता के लिए 65 वर्ष की ऊपरी आयु सीमा को समाप्त करना, जिससे किसी भी उम्र के लोग पंजीकरण करा सकें।
  • जागरूकता और प्रचार पहल:
    • अंगदान महोत्सव और अंगदान जन-जागरूकता अभियान जैसे बड़े अभियान।
    • प्रति वर्ष 3 अगस्त को भारतीय अंगदान दिवस का आयोजन, ताकि दाता परिवारों का सम्मान किया जा सके और प्रत्यारोपण क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य को मान्यता मिले।

राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO)

  • राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन भारत में अंग और ऊतक दान व प्रत्यारोपण का सर्वोच्च राष्ट्रीय निकाय है, जिसकी स्थापना मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण (संशोधन) अधिनियम, 2011 के तहत हुई और यह स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
  • यह देशभर में अंगों की प्राप्ति, आवंटन, वितरण, रजिस्ट्रेशन, नीति-निर्देशन, प्रशिक्षण और जागरूकता गतिविधियों का समन्वय करता है तथा दिल्ली और एनसीआर के लिए नोडल एजेंसी के रूप में भी कार्य करता है।
  • NOTTO के दो प्रमुख प्रभाग हैं—नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू रिमूवल एंड स्टोरेज नेटवर्क और नेशनल बायोमटेरियल सेंटर (राष्ट्रीय ऊतक बैंक)।
  • क्षेत्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (ROTTO):
    • ये क्षेत्रीय स्तर की सरकारी संस्थाएँ हैं, जो NOTTO और राज्य एजेंसियों के बीच मध्यस्थ समन्वय निकाय के रूप में कार्य करती हैं।
    • ये सामान्यतः सरकारी अस्पतालों में स्थित होती हैं और कई राज्यों में अंग प्राप्ति, आवंटन और प्रत्यारोपण गतिविधियों की निगरानी करती हैं।
  • राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (SOTTO):
    • ये राज्य स्तर की नोडल एजेंसियाँ हैं, जो संबंधित राज्य में अंगदान और प्रत्यारोपण की प्रक्रियाओं का समन्वय करती हैं।
    • ये अस्पतालों, स्वास्थ्य पेशेवरों और सरकारी निकायों के साथ मिलकर दाता पंजीकरण को बढ़ावा देती हैं, अंग आवंटन का प्रबंधन करती हैं, नियमों का पालन सुनिश्चित करती हैं और जागरूकता फैलाती हैं।

Source:
Pib
Notto
Ddindia
Organindia

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