संबंधित पाठ्यक्रम

सामान्य अध्ययन-2: स्वास्थ्य से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय। 

सामान्य अध्ययन -3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी- विकास और अनुप्रयोग तथा रोजमर्रा के जीवन में उनके अनुप्रयोग।

संदर्भ: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सीमावर्ती क्षेत्रों में इबोला के दुर्लभ ‘बुंडीबुग्यो स्ट्रेन’  के प्रसार के बाद कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) और युगांडा में इबोला के प्रकोप को ‘अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ (PHEIC) घोषित किया है।

अन्य संबंधित जानकारी

• इबोला का यह नवीनतम प्रकोप पूर्वी कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) के इतूरी प्रांत से शुरू हुआ और बाद में सीमा पार आवाजाही  के माध्यम से युगांडा में फैल गया, जिसके पुष्ट मामले कंपाला में भी दर्ज किए गए हैं।

• यह प्रकोप ‘बुंडीबुग्यो इबोलावायरस’ (BDBV) स्ट्रेन के कारण हुआ है। दरअसल, इस वायरस की पहचान पहली बार वर्ष 2007 में युगांडा में की गई थी और इसके लिए वर्तमान में कोई अनुमोदित टीका या विशिष्ट उपचार उपलब्ध नहीं है।

• यह प्रकोप क्षेत्र सशस्त्र संघर्ष, विस्थापन, अत्यधिक छिद्रित सीमाओं और कमजोर स्वास्थ्य देखभाल बुनियादी ढांचे से प्रभावित है, जिससे यहाँ नियंत्रण के प्रयासों में जटिलता आ रही है तथा इबोला के व्यापक प्रसार की चिंताएं बढ़ रही हैं।

• विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वैश्विक समन्वय, निगरानी और आपातकालीन प्रतिक्रिया उपायों को दुरस्त करने के लिए इस प्रकोप को ‘अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ (PHEIC) घोषित किया है।

इबोला रोग के बारे में 

• रोग (EVD/EBOD) एक दुर्लभ लेकिन गंभीर पशुजन्य वायरल बीमारी है, जो ‘फिलोविरिडे’ कुल के ‘ऑर्थोइबोलावायरस’ जीनस से संबंधित वायरसों के कारण होती है।

• इस बीमारी की पहचान पहली बार वर्ष 1976 में वर्तमान कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) में इबोला नदी के निकट की गई थी।

• फ्रूट बैट्स (फल खाने वाले चमगादड़) को इस वायरस का प्राकृतिक पोषिता माना जाता है।

• यह बीमारी संक्रमित पशुओं के संपर्क में आने से मनुष्यों में फैलती है और बाद में संक्रमित व्यक्तियों के शारीरिक तरल पदार्थों के साथ सीधे संपर्क के माध्यम से अन्य मनुष्यों में फैलती है।

• मानव-से-मानव संचरण रक्त, उल्टी, लार, मूत्र, मल, वीर्य या दूषित सतहों/सामग्रियों के संपर्क में आने से होता है।

• इबोला से संक्रमित व्यक्ति केवल लक्षण दिखाई देने के बाद ही संक्रामक होता है।

• इसके शरीर में रोगजनक के प्रवेश करने से लेकर, रोग के पहले लक्षण प्रकट होने के बीच की समयावधि या उद्भवन अवधि 2 से 21 दिनों की होती है, और लक्षण आमतौर पर वायरस के संपर्क में आने के 8 से 10 दिनों के भीतर दिखाई देते हैं।

• इसकी औसत मृत्यु दर (लगभग 50% है, हालांकि यह स्ट्रेन और उपचार की गुणवत्ता के आधार पर भिन्न-भिन्न होती है।

• मानव रोग का कारण बनने वाले इबोला वायरसों के प्रकार 

  • इबोला वायरस (EBOV) → इबोला वायरस रोग (EVD)
  • सूडान वायरस (SUDV) → सूडान वायरस रोग (SVD)
  • बुंडीबुग्यो वायरस (BDBV) → बुंडीबुग्यो वायरस रोग (BVD)
  • ताई फॉरेस्ट वायरस 

• निदान: निदान की पुष्टि प्रयोगशाला जाँचों के माध्यम से की जाती है, जैसे:

  • आरटी-पीसीआर (रिवर्स ट्रांसक्रिपटेस पॉलीमरेज़ चेन रिएक्शन)
  • एलिसा (ELISA) जाँच
  • एंटिजन-कैप्चर डिटेक्शन जाँच
  • कोशिका संवर्धन से वायरस आइसोलेशन 

• उपचार और टीके: शीघ्र गहन सहायक देखभाल, जिसमें पुनर्जलीकरण और लक्षणों का प्रबंधन शामिल है, जीवित रहने की संभावनाओं में उल्लेखनीय सुधार करती है।

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन जायरे स्ट्रेन के कारण होने वाले इबोला वायरस रोग के लिए मोनोक्लोनल एंटीबॉडी उपचार, जैसे कि mAb114 (एंसुविमैब) और REGN-EB3 (इन्माज़ेब) की सिफारिश करता है।
  • अनुमोदित टीकों में शामिल हैं: इरवेबो (एकल-खुराक टीका) तथा जैबडेनो और म्वाबेआ (दो-खुराक वाला नियम)।
  • हालाँकि, वर्तमान प्रकोप में शामिल बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए वर्तमान में कोई अनुम्दित टीका या उपचार उपलब्ध नहीं है, यद्यपि संभावित टीके पर विकासाधीन हैं।
  • रोकथाम और नियंत्रण के उपाय: रोकथाम और नियंत्रण के उपायों में तत्काल रोगी पृथक्करण, संपर्कों की खोज, सुरक्षित अंतिम संस्कार, सख्त संक्रमण-नियंत्रण अभ्यास और सामुदायिक जागरूकता अभियान शामिल हैं।
  • स्वास्थ्य कर्मियों को व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) का उपयोग करने की सलाह दी जाती है, जबकि लोगों को संक्रमित व्यक्तियों, उनके शारीरिक तरल पदार्थों और संक्रमित वन्यजीवों के संपर्क में आने से बचना चाहिए।
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