संदर्भ: केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए बिहार में प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण (PMAY-G) के अंतर्गत 11,18,937 नए पक्के मकानों को मंजूरी दी है। इस उद्देश्य के लिए 13,427 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसकी घोषणा केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पटना में किया।

बिहार के लिए आवंटन

  • इस आवंटन का स्वीकृति पत्र पटना में आयोजित राज्य स्तरीय गृह प्रवेश कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को सौंपा गया।
  • चालू वित्तीय वर्ष में पूर्ण किए गए 2.35 लाख PMAY-G मकानों के लाभार्थियों को आवास की चाबियाँ सौंपी गईं।
  • वित्तीय वर्ष 2025–26 में बिहार के लिए 5.20 लाख मकानों को मंजूरी दी गई थी, जिसके लिए 6,249 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था।
  • वित्तीय वर्ष 2026–27 में 11.18 लाख मकानों का नया लक्ष्य बिहार में ग्रामीण आवास सहायता के बड़े विस्तार को दर्शाता है।

PMAY-G से संबंधित तथ्य

  • प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण (PMAY-G) ग्रामीण विकास मंत्रालय की केंद्र प्रायोजित ग्रामीण आवास योजना है। इसका उद्देश्य ऐसे पात्र ग्रामीण परिवारों को मूलभूत सुविधाओं से युक्त पक्का मकान उपलब्ध कराना है, जो बेघर हैं या कच्चे/जर्जर मकानों में रह रहे हैं।

प्रमुख विशेषताएँ

  • लक्षित लाभार्थी: बेघर परिवार तथा शून्य, एक या दो कमरों वाले कच्चे/जर्जर मकानों में रहने वाले परिवार।
  • लाभार्थियों का चयन: सामाजिक-आर्थिक एवं जाति जनगणना (SECC), 2011 में दर्ज आवास-वंचना संबंधी मानकों के आधार पर किया जाता है तथा ग्राम सभा द्वारा इसका सत्यापन किया जाता है।
  • मकान का आकार: न्यूनतम 25 वर्ग मीटर, जिसमें स्वच्छ एवं समर्पित खाना पकाने का स्थान भी शामिल है।
  • सहायता की राशि: मैदानी क्षेत्रों में 1.20 लाख रुपये तथा पहाड़ी, दुर्गम और समेकित कार्ययोजना (आईएपी) क्षेत्रों में 1.30 लाख रुपये।
  • धनराशि का हस्तांतरण: लाभार्थियों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से।
  • स्वच्छता से अभिसरण: स्वच्छ भारत मिशन के माध्यम से शौचालय निर्माण के लिए 12,000 रुपये की सहायता।

सर्वोच्च न्यायालय ने उद्योग की परिभाषा पर पुनर्विचार किया

संदर्भ: 20 अगस्त 2026 को सर्वोच्च न्यायालय की नौ-न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ ने कहा कि 1978 के बैंगलोर जल आपूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड बनाम ए. राजप्पा निर्णय में विकसित “उद्योग” की व्यापक एवं श्रमिक-केंद्रित परिभाषा औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के तहत व्याख्या को नियंत्रित नहीं करेगी।

1978 का दृष्टिकोण

  • औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 2(j) में “उद्योग” की परिभाषा दी गई थी। बैंगलोर जल आपूर्ति मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने त्रि-परीक्षण (Triple Test) के माध्यम से इसकी व्यापक व्याख्या की।
  • इस दृष्टिकोण के अनुसार, सामान्यतः कोई गतिविधि “उद्योग” मानी जाती थी यदि उसमें:
    • व्यवस्थित गतिविधि;
    • नियोक्ता और कर्मचारी के बीच सहयोग; तथा
    • मानवीय आवश्यकताओं एवं इच्छाओं की पूर्ति के लिए वस्तुओं या सेवाओं का उत्पादन अथवा वितरण शामिल हो।
  • इस व्याख्या के तहत लाभ कमाना आवश्यक शर्त नहीं था।
  • अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, नगरपालिका निकाय और अन्य संगठित सेवा गतिविधियाँ “उद्योग” के दायरे में आ सकती थीं।
  • वहीं, न्यायपालिका, सशस्त्र बल, पुलिस, विधायी कार्य तथा कानून-व्यवस्था जैसे मुख्य संप्रभु कार्यों को “उद्योग” के दायरे से बाहर रखा गया था।

वर्तमान सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के प्रमुख बिंदु

  • न्यायालय ने स्पष्ट किया कि 1978 का त्रि-परीक्षण औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के अंतर्गत लंबित सभी विवादों पर लागू रहेगा।
  • वर्तमान संविधान पीठ द्वारा निर्धारित संशोधित परीक्षण भविष्य में दायर होने वाले मामलों पर भावी रूप से लागू होगा।
  • औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 की व्याख्या स्वतंत्र रूप से की जानी होगी। 1978 का निर्णय इस संहिता के लिए बाध्यकारी व्याख्यात्मक ढाँचा नहीं होगा।
  • जिन मामलों में अंतिम रूप से निर्णय हो चुका है, वे इस निर्णय से प्रभावित नहीं होंगे।
  • न्यायालय ने माना कि पूर्ववर्ती सिद्धांत में सुधार की आवश्यकता थी, क्योंकि इससे श्रम-कानूनों का संरक्षण बहुत व्यापक स्तर के प्रतिष्ठानों तक विस्तारित हो गया था।
  • हालांकि, न्यायालय ने निरस्त हो चुके औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के अंतर्गत लंबित मामलों के लिए 1978 के निर्णय को समाप्त नहीं किया।

भारतजापान समुद्री सुरक्षा सहयोग

संदर्भ: भारत और जापान ने 20 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में समुद्री सुरक्षा सहयोग पर व्यवस्था ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी के बीच हुई वार्ता के बाद हुआ।

सहयोग के प्रमुख क्षेत्र

  • समुद्री क्षेत्र जागरूकता (MDA): समुद्री गतिविधियों से संबंधित सूचनाओं का आदान-प्रदान।
  • समुद्री संचार मार्ग (SLOCs): महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार एवं नौवहन मार्गों की सुरक्षा।
  • नौसैनिक संचालन: नौसैनिक जहाजों की यात्राएँ, संयुक्त सैन्य अभ्यास तथा सैन्यकर्मियों का आदान-प्रदान।
  • लॉजिस्टिक्स: बंदरगाहों तक पहुँच तथा रखरखाव एवं मरम्मत संबंधी सहायता।
  • मानवीय मिशन: खोज एवं बचाव तथा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत।
  • विशेष अभियान: विशेष बलों के बीच आदान-प्रदान एवं सहयोग तथा एकीकृत थिएटर कमांड के साथ समन्वय।

रक्षा प्रौद्योगिकी सहयोग

  • DRDO–ATLA: उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में सहयोग।
  • यूनिकॉर्न: इसे प्रारंभिक संयुक्त रक्षा उपकरण परियोजनाओं में से एक के रूप में चिन्हित किया गया है।
  • संयुक्त जहाज निर्माण: ‘मेक इन इंडिया’ के अंतर्गत नौसैनिक जहाजों के डिजाइन एवं निर्माण में सहयोग की संभावनाएँ तलाशना।
  • शिपयार्ड: रखरखाव एवं मरम्मत के लिए दोनों देशों के शिपयार्ड का पारस्परिक उपयोग।

प्रमुख सैन्य अभ्यास

  • धर्म गार्जियन: भारत–जापान थल सेना का संयुक्त सैन्य अभ्यास।
  • जिमेक्स: भारत–जापान नौसेना का संयुक्त समुद्री सैन्य अभ्यास।
  • वीर गार्जियन: भारत–जापान वायु सेनाओं का संयुक्त सैन्य अभ्यास।
  • वीर गार्जियन 2026: पहली बार जापानी लड़ाकू विमान भारत में इस अभ्यास में भाग लेंगे।
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