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सामान्य अध्ययन-2: भारतीय संविधान—ऐतिहासिक आधार, विकासक्रम, विशेषताएँ, संशोधन, महत्वपूर्ण प्रावधान एवं मूल संरचना; संघ और राज्यों के कार्य एवं उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित मुद्दे एवं चुनौतियाँ।

संदर्भ: मणिपुर सरकार ने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को अद्यतन करने के लिए 1951 को आधार वर्ष के रूप में प्रस्तावित किया है, जिसे केंद्र सरकार की मंजूरी मिलना आवश्यक है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • जनगणना से पहले NRC: मैतेई और नागा संगठनों ने मांग की है कि जनगणना से पहले NRC पूरा किया जाए, जिसके बाद परिसीमन किया जाए। उनका तर्क है कि जनसंख्या-आधारित राजनीतिक प्रतिनिधित्व निर्धारित करने से पहले नागरिकता का सत्यापन किया जाना चाहिए।
  • जनगणना 2027: NRC को जनगणना से पहले पूरा करने की मांग के बीच केंद्र सरकार ने मणिपुर में जनगणना प्रक्रिया स्थगित कर दी है।
  • राज्य सरकार का रुख: गृह मंत्री ने कहा है कि अधिकारी 1951 के NRC अभिलेखों का पता लगा रहे हैं, लेकिन राज्य सरकार स्वतंत्र रूप से NRC लागू नहीं कर सकती और इस संबंध में उसे केंद्र सरकार के साथ आगे की कार्रवाई करनी होगी।

राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को समझना

  • भारतीय नागरिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर (NRIC): यह नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 14A के तहत केंद्र सरकार द्वारा बनाए रखा जाने वाला भारतीय नागरिकों का रजिस्टर है।
  • 1951 का NRC: 1951 की जनगणना के साथ-साथ NRC तैयार किया गया था, जिसमें मणिपुर भी शामिल था। इसमें नाम, माता-पिता का विवरण, राष्ट्रीयता, आयु, व्यवसाय और निवास जैसी जानकारियाँ शामिल थीं।
  • NRC बनाम जनगणना: जनगणना मुख्य रूप से जनसंख्या की गणना से संबंधित प्रक्रिया है, जबकि NRC भारतीय नागरिकों की पहचान एवं पंजीकरण से संबंधित है।
  • NRC बनाम NPR: राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) किसी क्षेत्र में सामान्य रूप से निवास करने वाले व्यक्तियों से संबंधित है, जबकि भारतीय नागरिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर (NRIC) नागरिकता से संबंधित है। NRIC को बनाए रखने का वैधानिक अधिकार केंद्र सरकार के पास है।

मणिपुर 1951 को आधार वर्ष मानना क्यों चाहता है?

  • परमिट प्रणाली का उन्मूलन: बाहरी राज्यों के लोगों के मणिपुर में प्रवेश को नियंत्रित करने वाली तत्कालीन परमिट प्रणाली को 18 नवंबर 1950 को समाप्त कर दिया गया था।
  • सबसे पुराना उपलब्ध आधार: 1951 की जनगणना और NRC परमिट प्रणाली समाप्त होने के बाद उपलब्ध सबसे पुराने जनसांख्यिकीय और नागरिकता-संबंधी अभिलेख प्रदान करते हैं।
  • जनसंख्या वृद्धि: समर्थकों का तर्क है कि दर्ज की गई दशकीय जनसंख्या वृद्धि 1951 में 12.80% से बढ़कर 1961 में 35.04% हो गई, जो बड़े पैमाने पर जनसांख्यिकीय परिवर्तन का संकेत देती है।
  • ऐतिहासिक निरंतरता:1951 को आधार वर्ष बनाने की मांग का उल्लेख 1980 की प्रोसिडिंग्स ऑफ अंडरस्टैंडिंग, 1994 के समझौते और मणिपुर पीपुल्स प्रोटेक्शन बिल, 2018 में मिलता है।
    • इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया गया था, लेकिन यह कानून नहीं बन सका।
  • 1961 का प्रश्न: 1951 का चयन राज्य के भीतर भी निर्विवाद नहीं है। मणिपुर मंत्रिमंडल ने 2022 में इनर लाइन परमिट (ILP) प्रणाली को लागू करने के लिए 1961 को आधार वर्ष के रूप में चुना था। इसके अलावा, 2024 में केंद्र को की गई NRC संबंधी एक सिफारिश में भी 1961 को आधार वर्ष प्रस्तावित किया गया था।

1951 का आधार वर्ष विवादास्पद क्यों है?

  • आधार वर्ष के समर्थन में तर्क
    • प्रवास की निगरानी: समर्थक 1951 को बाद के प्रवास और जनसांख्यिकीय बदलावों की पहचान के लिए संदर्भ बिंदु मानते हैं।
    • स्वदेशी पहचान: इस आधार वर्ष को मणिपुर की जनसांख्यिकीय और सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा के साधन के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
    • राजनीतिक प्रतिनिधित्व: मैतेई और नागा संगठन तर्क देते हैं कि भविष्य के परिसीमन के लिए जनसंख्या के आँकड़ों का उपयोग करने से पहले नागरिकता का सत्यापन किया जाना चाहिए।
  • आधार वर्ष को लेकर चिंताएँ
    • अपूर्ण जनगणना: कुकी-ज़ो संगठनों का तर्क है कि 1951 में कई पहाड़ी क्षेत्रों तक पहुँच सीमित थी और वहाँ सड़क संपर्क लगभग नहीं था, जिसके कारण व्यापक और पूर्ण जनगणना करना कठिन था।
    • दस्तावेजीकरण का जोखिम: 75 वर्ष पुराने आधार वर्ष से उन वास्तविक दीर्घकालिक निवासियों को नुकसान हो सकता है, जिनके पास 1951 से संबंधित दस्तावेजी प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
    • सीमा-पार समुदाय: कुकी, ज़ोमी और चिन समुदाय ऐतिहासिक रूप से भारत-म्यांमार सीमा के दोनों ओर निवास करते रहे हैं। ऐसे में एक कठोर ऐतिहासिक कट-ऑफ निर्धारित करना विशेष रूप से विवादास्पद हो जाता है।

जनगणना और परिसीमन से संबंध

  • जनसांख्यिकीय आधार के रूप में जनगणना: जनगणना जनसंख्या संबंधी आँकड़े उपलब्ध कराती है, जिनका उपयोग बाद में परिसीमन सहित विभिन्न प्रशासनिक और राजनीतिक प्रक्रियाओं में किया जाता है।
  • NRC-प्रथम पक्ष: मैतेई और नागा संगठन NRC → जनगणना → परिसीमन का क्रम चाहते हैं, ताकि कथित अवैध प्रवासन भविष्य में राजनीतिक प्रतिनिधित्व को प्रभावित न करे।
  • जनगणना-प्रथम पक्ष: कुकी-ज़ो संगठन NRC/परिसीमन से पहले जनगणना के माध्यम से विश्वसनीय जनसांख्यिकीय आँकड़े स्थापित करने के पक्ष में हैं। उनका तर्क है कि नागरिकता से संबंधित दावों का परीक्षण सत्यापित जनसंख्या आँकड़ों के आधार पर किया जाना चाहिए।
  • परिसीमन का महत्व: मणिपुर में 60 विधानसभा सीटें—घाटी में 40 और पहाड़ी क्षेत्रों में 20 हैं। वर्तमान निर्वाचन क्षेत्र मानचित्र 1973 के परिसीमन पर आधारित है, जो 1971 की जनगणना के आधार पर किया गया था। इसलिए नए जनसंख्या आँकड़ों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व के वितरण पर प्रभाव पड़ सकता है।
  • म्यांमार कारक: 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद म्यांमार से, विशेष रूप से संघर्ष प्रभावित चिन राज्य से लोगों के आने से इस पुराने विवाद में सुरक्षा और जनसांख्यिकीय आयाम भी जुड़ गया है।

प्रमुख मुद्दे और महत्व

  • 1951 के अभिलेखों की विश्वसनीयता: 1951 में कई पहाड़ी क्षेत्रों तक पहुँच सीमित थी और वहाँ संपर्क सुविधाएँ कमजोर थीं। इससे अपूर्ण जनगणना और इन अभिलेखों को नागरिकता के एकमात्र आधार के रूप में उपयोग करने की विश्वसनीयता को लेकर चिंताएँ उत्पन्न होती हैं।
  • दस्तावेजीकरण और बहिष्करण: नागरिकता को 1951 के आधार वर्ष से जोड़ने पर वास्तविक दीर्घकालिक निवासियों, विशेषकर उन लोगों के लिए कठिनाइयाँ उत्पन्न हो सकती हैं जिनके पास पुराने दस्तावेजी अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं या जिनके ऐतिहासिक रिकॉर्ड अनुपलब्ध अथवा असंगत हैं।
  • जनसांख्यिकीय और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ: समर्थक NRC को 1951 के बाद हुए प्रवासन की पहचान करने के एक माध्यम के रूप में देखते हैं, विशेषकर 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद म्यांमार से हुए लोगों के आगमन के संदर्भ में। इसका उद्देश्य जनसांख्यिकीय बदलाव से जुड़ी चिंताओं का समाधान करना भी है।
  • जनगणना–परिसीमन संबंध: NRC → जनगणना → परिसीमन का क्रम राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि नए जनसंख्या आँकड़े राजनीतिक प्रतिनिधित्व के वितरण को प्रभावित कर सकते हैं। वहीं, विरोधी पक्ष का तर्क है कि इन प्रक्रियाओं से पहले समावेशी जनगणना होनी चाहिए।
  • कानूनी और संघीय चुनौती: नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 14A भारतीय नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर को केंद्र सरकार के वैधानिक ढाँचे के अंतर्गत रखती है। इसलिए मणिपुर में NRC लागू करने के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी तथा स्पष्ट कानूनी और साक्ष्य-आधारित प्रक्रिया आवश्यक है।

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