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सामान्य अध्ययन-3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास तथा नई प्रौद्योगिकी का विकास; सूचना प्रौद्योगिकी एवं कंप्यूटर के क्षेत्र में जागरूकता।

संदर्भ: राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) के अंतर्गत, भारत ने लॉन्च के दो साल के भीतर 1,000 किमी के क्वांटम संचार नेटवर्क का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • यह उपलब्धि 8 वर्षों में 2,000 किमी सुरक्षित क्वांटम संचार के लक्ष्य के मुकाबले समय से पहले प्राप्त कर ली गई है।
  • यह नेटवर्क क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन (QKD) पर आधारित है और इसे ‘QNu लैब्स’ द्वारा स्वदेशी तकनीक का उपयोग करके विकसित किया गया है।
  • 1,000 किमी का यह नेटवर्क विश्व स्तर पर सबसे लंबे QKD परिनियोजन (deployments) में से एक है, जो सुरक्षित क्वांटम संचार में ऐतिहासिक प्रगति का प्रतीक है।
  • यह क्लासिकल बाइनरी सिस्टम (0 और 1) के स्थान पर क्वांटम सिद्धांतों का उपयोग करके डेटा ट्रांसमिशन को सक्षम बनाता है।

महत्व

  • यह रक्षा, वित्तीय प्रणालियों और महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए सुरक्षित संचार बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करता है।
  • स्वदेशी क्वांटम क्षमता में तीव्र प्रगति को प्रदर्शित करता है, जिससे विदेशी प्रौद्योगिकियों पर निर्भरता कम होती है।
  • वैश्विक क्वांटम प्रौद्योगिकी की दौड़ में भारत की स्थिति को बेहतर बनाता है।
  • साइबर खतरों के विरुद्ध एक सुरक्षित डिजिटल इकोसिस्टम बनाने में योगदान देता है।
  • स्टार्टअप की बढ़ती भागीदारी और R&D फंडिंग, उद्योग की बढ़ती रुचि और इकोसिस्टम के विकास को दर्शाती है।

राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM)

  • इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 19 अप्रैल, 2023 को 2023-24 से 2030-31 की अवधि के लिए ₹6003.65 करोड़ के वित्तीय परिव्यय के साथ अनुमोदित किया गया था।
  • यह प्रधानमंत्री विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सलाहकार परिषद (PM-STIAC) के तहत नौ पहलों में से एक है।
  • यह क्वांटम कंप्यूटिंग, संचार, सेंसिंग और सामग्रियों को आगे बढ़ाने पर केंद्रित है।
  • मिशन का उद्देश्य देश में क्वांटम प्रौद्योगिकियों को विकसित करना, पोषित करना और विस्तार देना है, साथ ही अनुसंधान एवं विकास, स्टार्टअप और कुशल मानव संसाधनों का एक सशक्त पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है।
  • यह क्वांटम-आधारित आर्थिक विकास को गति देने, तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ाने और भारत को अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों में अग्रणी बनाने का प्रयास करता है।
  • मुख्य उद्देश्य:
    • क्वांटम कंप्यूटिंग विकास: सुपरकंडक्टिंग और फोटोनिक प्लेटफॉर्म पर 20-50 क्यूबिट (3 वर्ष), 50-100 क्यूबिट (5 वर्ष) और 1000 क्यूबिट (8 वर्ष) तक के क्वांटम कंप्यूटर बनाना।
    • सैटेलाइट-आधारित क्वांटम संचार: 2000 किमी से अधिक क्वांटम-सुरक्षित संचार सक्षम करना और अंतर्राष्ट्रीय संपर्क के लिए विस्तार करना।
    • इंटर-सिटी QKD नेटवर्क: विश्वसनीय नोड्स के साथ ऑप्टिकल फाइबर इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग करके 2000 किमी का क्वांटम संचार नेटवर्क विकसित करना।
    • मल्टी-नोड क्वांटम नेटवर्क: ‘एंटेंगल्मेंट स्वैपिंग’ और क्वांटम रिपीटर्स का उपयोग करके स्केलेबल क्वांटम नेटवर्क (2-3 नोड) स्थापित करना।
    • क्वांटम सेंसिंग और परमाणु घड़ियाँ: नेविगेशन, संचार और रक्षा अनुप्रयोगों के लिए अत्यधिक संवेदनशील सेंसर और उच्च-सटीक घड़ियाँ विकसित करना।
    • क्वांटम सामग्री और उपकरण: क्वांटम उपकरणों और फोटोन प्रणालियों के लिए सुपरकंडक्टर्स और टोपोलॉजिकल सामग्री जैसी उन्नत सामग्री विकसित करना।
  • कार्यान्वयन रणनीति:
    • पूरे भारत में चार थीमैटिक हब (T-Hubs) स्थापित किए गए हैं।
    • ये हब 17 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों के 14 तकनीकी समूहों को एक साथ लाते हैं।
    • फोकस क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी नवाचार, कौशल विकास, उद्यमिता, उद्योग भागीदारी और वैश्विक सहयोग शामिल हैं।
    • महिला वैज्ञानिकों की भागीदारी को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित किया जाता है।
  • हब-स्पोक-स्पाइक मॉडल: प्रत्येक T-Hub एक हब-स्पोक-स्पाइक संरचना का अनुसरण करता है।
    • हब (Hubs): अनुसंधान का समन्वय करने वाले केंद्रीय संस्थान।
    • स्पोक (Spokes): विषयगत अनुसंधान परियोजनाएँ।
    • स्पाइक (Spikes): व्यक्तिगत अनुसंधान समूह।

राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) के तहत पहल

  • क्वांटम-सेफ इकोसिस्टम फ्रेमवर्क: एक अवधारणा पत्र भारत के डिजिटल बुनियादी ढांचे को क्वांटम खतरों से सुरक्षित करने के लिए एक रणनीतिक रोडमैप की रूपरेखा तैयार करता है।
  • रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO): DRDO क्वांटम-सुरक्षित सिमेट्रिक और एसिमेट्रिक क्रिप्टोग्राफिक एल्गोरिदम के साथ क्वांटम-रेजिलिएंट सुरक्षा योजनाओं का विकास और परीक्षण कर रहा है।
  • सोसाइटी फॉर इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन एंड सिक्योरिटी (SETS): SETS पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (PQC) अनुसंधान को आगे बढ़ा रहा है और इसे FIDO ऑथेंटिकेशन सिस्टम और IoT सुरक्षा अनुप्रयोगों में लागू किया है।
  • सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DoT): C-DoT ने QKD, PQC फ्रेमवर्क और क्वांटम सुरक्षित वीडियो IP फोन जैसे समाधान विकसित किए हैं।
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