संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-3: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।
संदर्भ: हाल ही में, लार्सन एंड टुब्रो (L&T) ने, अपने ‘हैवी सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर’ (HCI) और ‘हैवी इंजीनियरिंग’ (HE) वर्टिकल्स के माध्यम से, लेजर इंटरफेरोमीटर ग्रेविटेशनल-वेव ऑब्जर्वेटरी (LIGO)-इंडिया स्थापित करने के लिए परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) से एक बड़ा ऑर्डर प्राप्त किया है।
अन्य संबंधित जानकारी
- इस परियोजना को ₹1,000–2,500 करोड़ मूल्य के महत्वपूर्ण ऑर्डर के रूप में वर्गीकृत किया गया है और यह भारत के वैज्ञानिक बुनियादी ढांचे के विकास में एक प्रमुख मील का पत्थर है।
- वेधशाला महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के औंढ़ा में स्थित होगी।
- यह परियोजना भारत की प्रमुख मेगा साइंस पहल का हिस्सा है और इसके 48 महीनों के भीतर पूरा होने की उम्मीद है।
- इसे वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग के माध्यम से विकसित किया जा रहा है, जिसमें शामिल हैं:
- भारतीय भागीदारों में राजा रमन्ना प्रगत प्रौद्योगिकी केंद्र (RRCAT) और प्लाज्मा अनुसंधान संस्थान (IPR) शामिल हैं।
- संयुक्त राज्य अमेरिका की भागीदार संस्था लेजर इंटरफेरोमीटर ग्रेविटेशनल-वेव ऑब्जर्वेटरी प्रयोगशाला है।
- परियोजना को कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (Caltech) और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से अकादमिक और तकनीकी सहायता प्राप्त होगी।
- परियोजना परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा संयुक्त रूप से, नेशनल साइंस फाउंडेशन (NSF), यूएसए के सहयोग से कार्यान्वित की जा रही है।
LIGO-इंडिया की मुख्य विशेषताएं

- कंपन-संवेदनशील (Vibration-Sensitive), उच्च-सटीकता वाले सिविल बुनियादी ढांचे का निर्माण।
- अल्ट्रा-हाई वैक्यूम 8-किमी बीम ट्यूब सिस्टम की स्थापना, जो गुरुत्वाकर्षण-तरंग का पता लगाने का एक मुख्य घटक है।
- मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल सिस्टम, HVAC और अग्नि सुरक्षा प्रणाली, वैक्यूम नियंत्रण और निगरानी प्रणाली तथा संबंधित वैज्ञानिक उपयोगिताओं का एकीकरण।
- एक बार क्रियाशील होने के बाद, LIGO-इंडिया:
- वैश्विक गुरुत्वाकर्षण-तरंग डिटेक्टर नेटवर्क को मजबूत करेगा।
- ब्रह्मांडीय घटनाओं के स्रोत स्थानीयकरण में सुधार करेगा।
- अत्याधुनिक खगोल भौतिकी अनुसंधान में भारत की भूमिका को बढ़ाएगा।
लेजर इंटरफेरोमीटर ग्रेविटेशनल-वेव ऑब्जर्वेटरी (LIGO) के बारे में
- LIGO को गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता लगाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो ब्रह्मांडीय घटनाओं द्वारा उत्पन्न स्पेसटाइम में उत्पन्न तरंगे हैं।
- यह अंतरिक्ष में अत्यंत सूक्ष्म विकृतियों को मापने के लिए मल्टी-किलोमीटर लेजर इंटरफेरोमीटर का उपयोग करता है।
- वर्ष 1916 में, अल्बर्ट आइंस्टीन के सामान्य सापेक्षता सिद्धांत ने गुरुत्वाकर्षण तरंगों की भविष्यवाणी की थी।
- उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि जब विशाल वस्तुएं (जैसे ब्लैक होल) त्वरित होती हैं, तो वे इस स्पेसटाइम के ताने-बाने में वैसी ही तरंगे पैदा करती हैं, जैसी किसी तालाब में पत्थर फेंकने पर उत्पन्न होती हैं। ये गुरुत्वाकर्षण तरंगें हैं।
- लेजर इंटरफेरोमेट्री एक उच्च-सटीक माप तकनीक है जो दूरी, विस्थापन या सतह की गुणवत्ता में अविश्वसनीय रूप से छोटे परिवर्तनों का पता लगाने के लिए प्रकाश तरंगों के व्यतिकरण गुणों का उपयोग करती है।
- वैज्ञानिक महत्व:
- यह ब्लैक होल विलय, न्यूट्रॉन स्टार टकराव और सुपरनोवा विस्फोट जैसी घटनाओं का पता लगाता है।
- गुरुत्वाकर्षण तरंगों की खोज के कारण LIGO प्रयोग के प्रमुख योगदानकर्ताओं को 2017 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला।
गुरुत्वाकर्षण-तरंग (GW) डिटेक्टरों का वैश्विक नेटवर्क
LIGO-इंडिया गुरुत्वाकर्षण-तरंग वेधशालाओं के विश्वव्यापी नेटवर्क में शामिल होगा, जिससे त्रिकोणीयकरण और पता लगाने की सटीकता में वृद्धि होगी।
- भारतीय डिटेक्टर को जोड़ने से वैश्विक आकाश कवरेज और ब्रह्मांडीय स्रोतों का पता लगाने की सटीकता में काफी सुधार होगा।
- मौजूदा नेटवर्क, जिसे अक्सर LIGO-Virgo-KAGRA (LVK) सहयोग कहा जाता है, वर्तमान में कई प्रमुख सुविधाओं का संचालन या समर्थन करता है:
- LIGO हैनफोर्ड और LIGO लिविंगस्टन (USA): वाशिंगटन और लुइसियाना में स्थित ट्विन 4-किमी आर्म इंटरफेरोमीटर।
- Virgo इंटरफेरोमीटर (इटली): पीसा के पास स्थित 3-किमी आर्म डिटेक्टर, जो यूरोपीय गुरुत्वाकर्षण वेधशाला (EGO) द्वारा संचालित है।
- KAGRA (जापान): कामियोका वेधशाला में स्थित 3-किमी भूमिगत क्रायोजेनिक डिटेक्टर।
- GEO600 (जर्मनी): हनोवर के पास 600-मीटर का डिटेक्टर, जिसका उपयोग मुख्य रूप से नई इंटरफेरोमीटर प्रौद्योगिकियों को विकसित करने के लिए किया जाता है।
भारत के लिए महत्व
- यह वैश्विक बिग साइंस परियोजनाओं में भारत को एक प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में स्थापित करता है।
- प्रिसिजन इंजीनियरिंग, खगोल भौतिकी और ब्रह्मांड विज्ञान, तथा अल्ट्रा-हाई वैक्यूम और लेजर प्रौद्योगिकियों में क्षमताओं को मजबूत करता है।
- बड़े पैमाने के वैज्ञानिक बुनियादी ढांचे में स्वदेशी विशेषज्ञता को बढ़ावा देता है।
- प्रमुख वैश्विक संस्थानों के साथ सहयोग के माध्यम से भारत की वैज्ञानिक कूटनीति को बढ़ाता है।
