संबंधित पाठ्यक्रम

सामान्य अध्ययन-3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण और नवीन प्रौद्योगिकी का विकास; सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियाँ और उनका प्रबंधन। 

संदर्भ: हाल ही में, भारत ने विशाखापत्तनम में INS अरिधमन (S4) नामक अपनी तीसरी स्वदेशी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) को कमीशन किया।

अन्य संबंधित जानकारी

  • INS अरिधमन, INS अरिहंत (2016 में कमीशन) और INS अरिघात (अगस्त 2024 में कमीशन) के बाद लगातार तीसरी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) है।
    • चौथी SSBN, जिसका कोडनेम S4* है (जिसे अरिसुदन नाम दिया जा सकता है), वर्तमान में समुद्री परीक्षणों से गुजर रही है।
    • SSBN का अर्थ ‘शिप सबमर्सिबल बैलिस्टिक न्यूक्लियर’ (ship submersible ballistic nuclear) या परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी है।
  • ये घटनाक्रम 1980 के दशक में शुरू किए गए वर्गीकृत ‘उन्नत प्रौद्योगिकी पोत’ (Advanced Technology Vessel – ATV) प्रोजेक्ट का भाग हैं।
  • INS अरिधमन भारत की “द्वितीय प्रहार” (second-strike) क्षमता को महत्वपूर्ण रूप से उन्नत करता है, जो राष्ट्र के ‘परमाणु त्रय’ (nuclear triad) के एक महत्वपूर्ण चरण को पूरा करता है, जिसका अर्थ है कि भारत हवा, जमीन और समुद्र के नीचे से परमाणु हथियार लॉन्च कर सकता है।
  • अरिधमन के शामिल होने के साथ, भारत संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, यूनाइटेड किंगडम और चीन जैसे देशों के एक चुनिंदा समूह में शामिल हो गया है, जो परमाणु-संचालित पनडुब्बियों द्वारा समर्थित एक पूर्ण विकसित परमाणु त्रय का संचालन करते हैं।
  • भारत की परमाणु संपत्तियों का प्रबंधन सामरिक बल कमान (Strategic Forces Command – SFC) द्वारा किया जाता है; इस त्रि-स्तरीय प्रणाली के भीतर, समुद्री घटक को सबसे सुरक्षित माना जाता है, जिसका मुख्य कारण पनडुब्बियों की स्टील्थ (stealth) क्षमता और गतिशीलता है।
  • भारत रूसी निर्मित अकुला-श्रेणी की परमाणु-संचालित आक्रामक पनडुब्बी (SSN) ‘चक्र III’ को शामिल करने की तैयारी करके अपने आक्रामक पनडुब्बी बेड़े को भी मजबूत कर रहा है, जिसके 2027-28 के आसपास कमीशन होने की संभावना है।
    • SSBN के विपरीत, जो रणनीतिक निवारण (strategic deterrence) के लिए डिज़ाइन की गई हैं, आक्रामक पनडुब्बियों (SSNs) का कार्य दुश्मन के जहाजों का शिकार करना और नौसेना की संपत्तियों की रक्षा करना है।

INS अरिधमन (S4) की प्रमुख विशेषताएँ 

  • विस्थापन (Displacement): जलमग्न होने पर लगभग 7,000 टन (पिछले मॉडलों की तुलना में लगभग 1,000 टन भारी)।
  • प्रणोदन (Propulsion): भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित एक उन्नत 83 मेगावाट कॉम्पैक्ट लाइट वॉटर रिएक्टर (CLWR) द्वारा संचालित, जो बढ़ी हुई स्टील्थ क्षमता के लिए कम ध्वनिक संकेत (acoustic signatures) प्रदान करता है।
  • स्वदेशी सामग्री: लगभग 70%, जो भारत के आत्मनिर्भरता के लक्ष्यों को आगे बढ़ाता है।
  • मिसाइल क्षमता: इसमें आठ लॉन्च ट्यूब हैं, जो अरिहंत और अरिघात की मिसाइल क्षमता को दोगुना कर देती हैं।
  • मिसाइल पेलोड: इसकी आठ वर्टिकल लॉन्च ट्यूब 24 K-15 सागरिका कम दूरी की मिसाइलों (~750 किमी रेंज) या आठ K-4 परमाणु-क्षमताओं वाली सबमरीन-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइलों (SLBM) (~3,500 किमी रेंज) को ले जा सकती हैं।
  • सहनशक्ति (Endurance): सतह पर आए बिना महीनों तक जलमग्न परिचालन करने में सक्षम, जो इसे पारंपरिक पनडुब्बियों की तुलना में कहीं अधिक स्टील्थ बनाता है।
  • स्टील्थ क्षमताएँ: इसे इसकी अत्याधुनिक संचार, नेविगेशन, सेंसर और हथियार-नियंत्रण प्रणालियों के कारण गेम-चेंजर माना जाता है, जो सटीक हमलों को सक्षम बनाती हैं।

INS अरिधमन का रणनीतिक महत्व

  • परमाणु त्रय को सुदृढ़ करना: यह भारत के परमाणु त्रय में योगदान देता है, जिससे जल, थल और वायु से परमाणु हथियार लॉन्च करने की क्षमता मिलती है।
  • उन्नत परमाणु निवारण: बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं वाली परमाणु-संचालित पनडुब्बी के रूप में, यह परमाणु हमले के बाद भी जीवित रह सकती है और जवाबी कार्रवाई कर सकती है, इस प्रकार भारत की “नो फर्स्ट यूज” (पहले उपयोग नहीं) नीति को मजबूत करती है और विश्वसनीय न्यूनतम निवारण (Credible Minimum Deterrence) बनाए रखती है।
  • रणनीतिक समुद्री लाभ: हिंद महासागर क्षेत्र में चीन द्वारा परमाणु पनडुब्बियों की तैनाती को देखते हुए, परमाणु निवारण के लिए भारत की परमाणु-संचालित पनडुब्बियों की क्षमता निर्माण अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • भारत की नौसेना शक्ति को बढ़ावा: यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दो परमाणु-संचालित पनडुब्बियों के साथ भारत की नौसेना शक्ति को बढ़ाता है, जो रणनीतिक लाभ प्रदान करती है और चीन जैसे देशों के लिए निवारक का कार्य करती है।
  • परिचालन लचीलापन और क्षेत्रीय सुरक्षा: INS अरिधमन को शामिल करना अधिक स्थिर ‘निरंतर समुद्र में’ (continuous at-sea) निवारण मुद्रा सुनिश्चित करके भारत के समुद्री सुरक्षा ढाँचे को बढ़ाता है, जिससे क्षेत्रीय निवारण और स्थिरता मजबूत होती है।
Shares: