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सामान्य अध्ययन-3: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंम्प्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक सम्पदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता; सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियां एवं उनका प्रबंधन-संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच संबंध।

संदर्भ: हाल ही में, रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने रक्षा बलों की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए कई पूंजी अधिग्रहण प्रस्तावों को मंजूरी दी।

अन्य संबंधित जानकारी

• रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने लगभग ₹2.38 लाख करोड़ के प्रस्तावों के लिए ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ (Acceptance of Necessity – AoN) प्रदान की है। यह भारत की रक्षा खरीद प्रक्रिया का प्रथम चरण है।

• ये स्वीकृतियाँ भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना और भारतीय तटरक्षक के लिए दी गई हैं, जो क्षमता संवर्धन के प्रति एक व्यापक और एकीकृत दृष्टिकोण को दर्शाती हैं।

• इन स्वीकृतियों का मुख्य उद्देश्य सशस्त्र बलों में भारत की युद्ध तत्परता, निगरानी क्षमता, गतिशीलता और संचार बुनियादी ढांचे को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाना है।

• ये स्वीकृतियाँ ऐसे समय में दी गई हैं जब बहु-आयामी युद्ध, सीमा पर तनाव और उभरते तकनीकी खतरे जैसी सुरक्षा चुनौतियाँ बनी हुई  हैं।

• बड़े पैमाने पर AoN स्वीकृतियों के साथ-साथ, रक्षा मंत्रालय ने सेना के लिए तुंगुस्का वायु रक्षा प्रणालियों की खरीद और नौसेना के P-8I टोही बेड़े के रखरखाव सहायता के लिए ₹858 करोड़ के अनुबंधों पर भी हस्ताक्षर किए हैं।

विभिन्न प्रणालियों/हथियारों से संबंधित मुख्य बिंदु

भारतीय सेना

• वायु रक्षा ट्रैक्ड प्रणाली: युद्धक्षेत्र में रडारों/सेंसरों को एकीकृत करने वाला, वास्तविक समय में वायु रक्षा नियंत्रण/रिपोर्टिंग के लिए एक गतिशील C4I प्लेटफॉर्म। 

• कवच-भेदी टैंक गोला-बारूद: मिश्रित/प्रतिक्रियाशील कवच (कंपोजिट/रिएक्टिव आर्मर) से लैस आधुनिक मुख्य युद्धक टैंकों (MBT) को नष्ट करने के लिए अगली पीढ़ी के टैंक-रोधी गोले। 

• धनुष तोप प्रणाली: 155 मिमी/45 कैलिबर हॉवित्जर (स्वदेशी), 38–40 किमी की मारक क्षमता, सभी प्रकार के भू-भागों में गतिशीलता, सटीक-निर्देशित गोला-बारूद। 

• उच्च-क्षमता रेडियो रिले: सामरिक नेटवर्क के लिए उच्च थ्रूपुट और जैमर-रोधी लिंक के साथ सुरक्षित युद्धक्षेत्र संचार। 

• रनवे-स्वतंत्र हवाई निगरानी: हवाई पट्टियों के बिना अग्रिम क्षेत्रों में निरंतर आसूचना, निगरानी और टोह (ISR) के लिए वीटीओएल (VTOL) मानवरहित हवाई वाहन (UAV)।

भारतीय वायु सेना

• S-400 लॉन्ग रेंज SAM (5 अतिरिक्त स्क्वाड्रन): 400 किमी. रेंज और यह एक साथ कई लक्ष्यों (विमान, क्रूज़ मिसाइल, AWACS) को भेदने में सक्षम है।

• मध्यम परिवहन विमान (MTA): पुराने होते An-32/Il-76 बेड़े  को प्रतिस्थापित करने के लिए रणनीतिक/युद्ध एयरलिफ्टर (250–300 टन क्षमता)।

• रिमोटली पायलेटेड स्ट्राइक एयरक्राफ्ट: सटीक प्रहारों, स्टील्थ ISR गहन भेदन मिशन (7-8 वर्ष समयसीमा) के लिए डीआरडीओ का ‘घातक’ यूसीएवी (UCAV)।

भारतीय तटरक्षक

• भारी क्षमता वाले एयर कुशन वाहन (ACVs): उथले जल क्षेत्रों में तीव्र गति से तटीय अभियानों, खोज एवं बचाव (SAR) तथा रसद आपूर्ति (लॉजिस्टिक्स) हेतु उभयचर होवरक्राफ्ट।

इस कदम का महत्व

• बहु-स्तरीय रक्षा को सुदृढ़ करना: लंबी दूरी की हवाई रक्षा मिसाइलों और निगरानी प्लेटफार्मों जैसी उन्नत प्रणालियों का अधिग्रहण, हवाई और जमीनी खतरों के विरुद्ध भारत की बहु-स्तरीय रक्षा संरचना को उन्नत करता है।

• परिचालन तैयारी को प्रोत्साहन: विभिन्न सेवाओं (सेना के अंगों) में किए गए ये उन्नयन पारंपरिक और विषम (असममित) युद्ध, जिसमें ड्रोन-रोधी अभियान और नेटवर्क-केंद्रित युद्ध सम्मिलित हैं, के लिए तत्परता में सुधार करते हैं।

• सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण: पुराने हो चुके प्लेटफार्मों का प्रतिस्थापन और नई प्रौद्योगिकियों का समावेश भारतीय सशस्त्र बलों के निरंतर चल रहे आधुनिकीकरण में योगदान देता है, जो उन्हें वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाता है।

• रणनीतिक निवारण: उन्नत हथियार प्रणालियाँ और निगरानी क्षमताएं एक अस्थिर क्षेत्रीय सुरक्षा वातावरण में भारत की निवारण मुद्रा (डेटरेंस पोस्चर) को सुदृढ़ करती हैं।

• आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा: स्वदेशी खरीद, रखरखाव और मरम्मत क्षमताओं पर अधिक ध्यान रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता और आयात निर्भरता को कम करने के सरकार के प्रयासों का समर्थन करता है।

रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) के बारे में

• रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) रक्षा खरीद के संबंध में भारत में निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था है।

• इसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री द्वारा की जाती है और इसमें सशस्त्र बलों तथा रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी सम्मिलित होते हैं।

• रक्षा अधिग्रहण परिषद पूंजीगत अधिग्रहणों के लिए ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ (AoN) प्रदान करने हेतु उत्तरदायी है, जो खरीद प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक है।

• यह परिषद यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है कि खरीद प्रक्रिया रणनीतिक आवश्यकताओं, बजटीय बाधाओं और स्वदेशीकरण के लक्ष्यों के अनुरूप हो।

SOURCES
PIB
Indian Express

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