संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-2: सरकारी नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन से संबंधित विषय।
सामान्य अध्ययन -3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय; समावेशी विकास और उससे संबंधित विषय।
संदर्भ: हाल ही में, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गांधीनगर, गुजरात में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के लिए देश की पहली केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) आधारित ‘डिजिटल फूड करेंसी’ पायलट परियोजना का शुभारंभ किया।
अन्य संबंधित जानकारी
- यह पहल सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के प्रोग्रामेबल ई-रुपये (e₹) को एकीकृत करती है, ताकि खाद्य सब्सिडी का पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त वितरण सुनिश्चित किया जा सके।
- अपने प्रारंभिक चरण में, यह चार जिलों: अहमदाबाद, सूरत, आणंद और वलसाड के 26,000 से अधिक लाभार्थी परिवारों को कवर करेगी।
- गुजरात PDS के तहत डिजिटल रुपया-आधारित राशन वितरण का परीक्षण करने वाला पहला राज्य है।
- सरकार ने संकेत दिया है कि इस पायलट परियोजना का जल्द ही केंद्र शासित प्रदेशों चंडीगढ़, पुडुचेरी और दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव में विस्तार किया जाएगा।
- पिछले कई वर्षों में, सरकार ने भारत के खाद्य सुरक्षा इकोसिस्टम को बदलने के लिए कई उपाय किए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- ‘एक राष्ट्र एक राशन कार्ड’ (ONORC) योजना।
- आधार-सक्षम प्रमाणीकरण के लिए ई-पॉस (e-POS) उपकरणों का परिनियोजन
- ‘राइटफुल टारगेटिंग डैशबोर्ड’ के माध्यम से डेटा-आधारित सत्यापन।
- ‘अन्न चक्र’ के माध्यम से डिजिटल आपूर्ति-श्रृंखला इष्तमीकरण।
- ‘अन्न सहायता’ जैसे सशक्त शिकायत निवारण तंत्र।
प्रमुख विशेषताएँ
- CBDC फ्रेमवर्क के तहत, भारतीय रिज़र्व बैंक के माध्यम से जारी डिजिटल कूपन सीधे लाभार्थियों को प्रोग्रामेबल डिजिटल मुद्रा (e₹) के रूप में हस्तांतरित किए जाएंगे।
- लाभार्थी राशन की दुकानों पर CBDC कूपन या वाउचर कोड का उपयोग करके अपना खाद्यान्न प्राप्त कर सकते हैं।
- यह प्रणाली सुरक्षित, पता लगाने योग्य और रियल टाइम लेनदेन को सुनिश्चित करते हुए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और ई-पॉस परिचालन संबंधी चुनौतियों का समाधान करेगी।
- मासिक खाद्य सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के RBI-सक्षम डिजिटल वॉलेट में प्रोग्रामेबल टोकन के रूप में जमा की जाती है। इन टोकन में मद, मात्रा और मूल्य के संबंध में विशिष्ट विवरण अंकित होते हैं।
लाभ और रूपरेखा
- प्रोग्रामेबिलिटी: ये डिजिटल कूपन “लॉक” होते हैं और इनका उपयोग केवल अधिकृत उचित दर दुकानों (FPS) पर राशन की खरीद के लिए ही किया जा सकता है।
- प्रमाणीकरण: यह प्रणाली बिक्री केंद्रों पर बार-बार बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की आवश्यकता को समाप्त करती है, इसके स्थान पर लेनदेन के लिए QR कोड या वाउचर कोड का उपयोग किया जाता है।
- ‘अन्नपूर्ति‘ ATM के साथ एकीकरण: लाभार्थी अपने डिजिटल टोकन का उपयोग नव-शुरू किए गए ‘अन्नपूर्ति’ ग्रेन ATM पर कर सकते हैं।
- संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) द्वारा भारत सरकार के सहयोग से विकसित ‘अन्नपूर्ति’ ग्रेन ATM एक स्वचालित, बायोमेट्रिक-सक्षम मशीन है जिसे 24/7 खाद्यान्न (चावल, गेहूं, दालें) वितरित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- पारदर्शिता: रियल टाइम डिजिटल ट्रेल बनाकर, इस परियोजना का लक्ष्य लीकेज, खाद्यान्न की चोरी और बिचौलियों की भूमिका को समाप्त करना है।
केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) के बारे में
- केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) किसी देश के केंद्रीय बैंक द्वारा जारी और विनियमित संप्रभु मुद्रा का एक डिजिटल रूप है।
- निजी क्रिप्टोकरेंसी के विपरीत, CBDC वैध मुद्रा (कानूनी निविदा) है, जिसे राज्य का समर्थन प्राप्त है और यह भौतिक नकदी के साथ 1:1 का मूल्य बनाए रखती है।
- डिजिटल रुपया हमारी मुद्रा का इलेक्ट्रॉनिक संस्करण है, जिसका उपयोग लेनदेन करने या मूल्य को डिजिटल रूप से संचित करने के लिए किया जा सकता है, ठीक उसी तरह जैसे मुद्रा नोटों का भौतिक रूप में उपयोग किया जाता है।
- CBDC को आम तौर पर उनके लक्षित उपयोगकर्ताओं के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है:
- रिटेल CBDC (rCBDC): इसे आम जनता के लिए रोजमर्रा के लेनदेन जैसे खरीदारी या P2P (व्यक्ति-से-व्यक्ति) हस्तांतरण के लिए डिज़ाइन किया गया है। दिसंबर 2022 में शुरू किया गया भारत का रिटेल पायलट अब लाखों उपयोगकर्ताओं को कवर करता है और UPI QR कोड के साथ अंतर-संचालनीय है।
- थोक CBDC (wCBDC): यह अंतर-बैंक निपटान और उच्च-मूल्य वाले लेनदेन के लिए वित्तीय संस्थानों तक सीमित है। इसका उद्देश्य निपटान जोखिमों को कम करना और बैक-एंड वित्तीय बुनियादी ढांचे की दक्षता में सुधार करना है।
