संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-2: सांविधिक, विनियामक एवं विभिन्न अर्ध-न्यायिक निकाय; सरकारी नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों के विकास के लिए एवं हस्तक्षेप तथा उनके अभिकल्पन और कार्यान्वयन से संबंधित विषय।
सामान्य अध्ययन -3: संरक्षण; पर्यावरण प्रदूषण एवं क्षरण।
संदर्भ: दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) बढ़कर 244 होने और ‘खराब’ श्रेणी में पहुँचने के बाद, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 21 अक्टूबर 2026 को दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के चरण-I को लागू किया।
अन्य संबंधित जानकारी
• भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के पूर्वानुमानों के बाद यह निर्णय लिया गया। इन पूर्वानुमानों के अनुसार, आगामी दिनों में वायु गुणवत्ता ‘खराब’ श्रेणी में बने रहने की संभावना थी।
• CAQM ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) की संबंधित एजेंसियों को चरण-I के उपायों को तत्काल प्रभाव से लागू करने, उनकी निगरानी करने तथा उनकी समीक्षा करने का निर्देश दिया।
ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के बारे में
• GRAP एक आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र है, जिसका उद्देश्य प्रदूषण नियंत्रण संबंधी क्रमिक रूप से अधिक कठोर उपायों के माध्यम से दिल्ली-NCR में वायु गुणवत्ता को और खराब होने से रोकना है।
• वर्ष 2016 में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की सिफारिशों के आधार पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने 12 जनवरी 2017 को GRAP को अधिसूचित किया।
• कार्यान्वयन: प्रारंभ में पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम एवं नियंत्रण) प्राधिकरण (EPCA) द्वारा लागू की गई GRAP की निगरानी अब CAQM द्वारा की जाती है। CAQM का गठन CAQM अधिनियम, 2021 के अंतर्गत एक वैधानिक निकाय के रूप में किया गया है।
• GRAP कैसे कार्य करता है?

- GRAP दिल्ली के औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के आधार पर निर्धारित चार चरणों के माध्यम से कार्य करता है। उपायों को लागू करने का निर्णय लेते समय वायु गुणवत्ता संबंधी पूर्वानुमानों एवं मौसम संबंधी परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाता है।
- संचयी दृष्टिकोण: उच्चतर चरण लागू होने पर पहले के चरणों के उपाय भी जारी रहते हैं तथा प्रदूषण बढ़ने के साथ अतिरिक्त प्रतिबंध लागू किए जाते हैं।
• संस्थागत ढाँचा
- समन्वय: वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM), केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC), राज्य सरकारों, नगर निकायों तथा अन्य प्रवर्तन एजेंसियों के माध्यम से GRAP के कार्यान्वयन में समन्वय स्थापित करता है।
- क्षेत्रीय दृष्टिकोण: दिल्ली-NCR में समन्वित कार्रवाई आवश्यक है, क्योंकि वायु प्रदूषण के अनेक स्रोत हैं, जिनमें वाहनों से होने वाला उत्सर्जन, निर्माण कार्यों से उत्पन्न धूल, औद्योगिक गतिविधियाँ, कचरा एवं बायोमास जलाना शामिल हैं। सर्दियों में प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियाँ इस समस्या को और गंभीर बना देती हैं।
GRAP-I के अंतर्गत प्रमुख उपाय
• सड़क की धूल एवं निर्माण गतिविधियाँ: अधिकारियों को मशीनों से सड़कों की सफाई, पानी का छिड़काव एवं धूल को नियंत्रित करने के उपाय करने चाहिए। साथ ही, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करना तथा निर्माण सामग्री एवं अपशिष्ट को उचित ढंग से ढककर ले जाना आवश्यक है।
• अपशिष्ट प्रबंधन एवं खुले में जलाना: संबंधित एजेंसियों को कचरे का उचित संग्रहण एवं निपटान सुनिश्चित करना चाहिए, अवैध रूप से कचरा फेंकने तथा लैंडफिल में आग लगने की घटनाओं को रोकना चाहिए और कचरे एवं बायोमास को खुले में जलाने पर प्रतिबंध लागू करना चाहिए।
• वाहनों से होने वाला प्रदूषण एवं यातायात प्रबंधन: अधिकारियों को प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) संबंधी नियमों एवं लागू वाहन प्रतिबंधों का पालन सुनिश्चित करना चाहिए। गंतव्य तक न जाने वाले ट्रकों को पूर्वी एवं पश्चिमी परिधीय एक्सप्रेसवे की ओर मोड़ना तथा यातायात जाम वाले स्थानों पर यातायात प्रवाह में सुधार करना चाहिए।
• औद्योगिक उत्सर्जन एवं डीजल जनरेटर सेट: उद्योगों, ईंट भट्ठों एवं हॉट-मिक्स संयंत्रों को उत्सर्जन मानकों का पालन करना तथा अनुमोदित ईंधनों का उपयोग करना चाहिए। डीजल जनरेटर सेट से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित किया जाना चाहिए, नियमित रूप से बैकअप बिजली के उपयोग को हतोत्साहित करना चाहिए तथा बिजली आपूर्ति में व्यवधान को न्यूनतम रखना चाहिए।
• होटल, रेस्तराँ एवं भोजनालय: होटल, रेस्तराँ एवं खुले भोजनालयों को तंदूर में कोयले एवं लकड़ी के उपयोग पर लागू प्रतिबंध का पालन करना चाहिए तथा बिजली, गैस या अन्य अनुमत स्वच्छ ईंधनों का उपयोग करना चाहिए।
• सार्वजनिक परिवहन एवं जन-जागरूकता: अधिकारियों को सार्वजनिक परिवहन एवं साझा आवागमन को प्रोत्साहित करना चाहिए, जागरूकता अभियान चलाने चाहिए, निर्धारित माध्यमों से प्रदूषण संबंधी शिकायतों का निवारण करना चाहिए तथा पटाखों के उपयोग पर लागू प्रतिबंधों का पालन सुनिश्चित करना चाहिए।
• नागरिक चार्टर: नागरिकों को वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) रखना चाहिए, अनावश्यक रूप से वाहन का इंजन चालू रखने से बचना चाहिए, सार्वजनिक परिवहन या साझा वाहन का उपयोग करना चाहिए, कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में छाँटना चाहिए, खुले में कचरा जलाने से बचना चाहिए तथा निर्धारित ऐप के माध्यम से प्रदूषण संबंधी उल्लंघनों की सूचना देनी चाहिए।
