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सामान्य अध्ययन-2: केंद्र और राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति-संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं और उन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; सामाजिक क्षेत्र के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय; विभिन्न संवैधानिक निकायों के कार्य और उत्तरदायित्व।

संदर्भ: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा किए गए हालिया ऑडिट ने ओडिशा में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) के लिए कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में गंभीर कमियों को उजागर किया है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • रिपोर्ट से पता चलता है कि पात्र PVTG जनसंख्या के आधे से अधिक हिस्से को लक्षित योजनाओं के तहत लाभ नहीं मिला, जिससे शासन और अंतिम-मील वितरण से संबंधित चिंताएँ बढ़ गई हैं।
  • ओडिशा विधानसभा में पेश किए गए इस ऑडिट में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति विकास विभाग के साथ-साथ ‘ओडिशा PVTG अधिकारिता और आजीविका सुधार कार्यक्रम’ जैसी योजनाओं की सूक्ष्मता से जाँच की गई।
  • ये निष्कर्ष पीएम जनमन (PM JANMAN) जैसी हालिया पहलों के संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं, जिनका उद्देश्य PVTGs की सामाजिक-आर्थिक स्थितियों में सुधार करना है, लेकिन वे पूरी तरह से प्रभावी पहचान और वितरण प्रणालियों पर आधारित हैं।

CAG रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष:

  • लाभार्थियों का बहिष्करण: ऑडिट में पाया गया कि ओडिशा की कुल 2.94 लाख PVTG जनसंख्या में से लगभग 54% (करीब 1,60,000 लोग) प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं के दायरे से बाहर रहे।
  • नये पहचाने गए गाँवों की उपेक्षा: एक बेसलाइन सर्वेक्षण में 1,138 नए PVTG गाँवों की पहचान की गई थी, लेकिन कल्याणकारी कार्यक्रम केवल 541 गाँवों में ही लागू किए गए, जिससे मात्र 1.34 लाख लोग कवर हो सके।
    • इस बहिष्करण का मुख्य कारण नई माइक्रो प्रोजेक्ट एजेंसियों (MPAs) का क्रियान्वित न होना था, जिन्हें इन क्षेत्रों में कवरेज विस्तार के लिए बनाया गया था।
  • निष्क्रिय बुनियादी ढाँचा और संपत्तियों की खराब स्थिति: विकास परिसंपत्तियों का एक बड़ा हिस्सा गैर-कार्यात्मक पाया गया:
    • 55% पेयजल परियोजनाएं और 58% सिंचाई परियोजनाएं खराब/निष्क्रिय थीं।
    • भारी निवेश के बावजूद 46% आजीविका संबंधी प्रसंस्करण इकाइयाँ संचालित नहीं थीं।
  • वंचित परिवारों में बुनियादी सेवाओं का अभाव: योजनाओं के दायरे से बाहर रह गए PVTG परिवारों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति अत्यंत दयनीय थी; केवल 18% के पास सुरक्षित पेयजल और लगभग 34% के पास एलपीजी (LPG) कनेक्शन की सुविधा थी।
  • मनरेगा (MGNREGS) की विफलता: मनरेगा के तहत केवल 10% PVTG परिवारों को ही अनिवार्य 100 दिनों का काम मिल सका। लगभग 1.22 लाख परिवारों को कोई काम नहीं मिला, फिर भी उन्हें ‘बेरोजगारी भत्ता’ देने से इनकार कर दिया गया।
  • बाल विवाह रोकने में विफलता: ‘विलंबित विवाह प्रोत्साहन कार्यक्रम’ 2019 से 2024 के बीच केवल 43% गाँवों तक ही पहुँच सका, जो इसके अकुशल क्रियान्वयन को दर्शाता है।

विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTGs) कौन हैं?

  • विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTGs) अनुसूचित जनजातियों (STs) के भीतर एक विशिष्ट उप-श्रेणी है, जिन्हें जनजातियों में सबसे अधिक हाशिए पर रहने वाले और वंचित समूहों के रूप में पहचाना गया है।
  • इनकी पहचान स्थिर या घटती जनसंख्या, कृषि-पूर्व स्तर की तकनीक (जैसे शिकार, संग्रहण, झूम खेती), आर्थिक पिछड़ापन, भौगोलिक अलगाव और साक्षरता के अत्यंत निम्न स्तर से की जाती है।
  • ढेबर आयोग (1960–61) ने सबसे पहले जनजातियों के भीतर असमानताओं पर प्रकाश डाला और अनुसूचित जनजातियों के सबसे कमजोर वर्गों पर विशेष ध्यान देने की सिफारिश की थी।
  • इसी आधार पर, भारत सरकार ने 1975 में ‘आदिम जनजातीय समूह’ (PTGs) नामक एक अलग श्रेणी बनाई, जिसमें 52 समुदायों को सूचीबद्ध किया गया। 1993 में, इसमें 23 और समुदायों को जोड़ा गया, जिससे कुल संख्या 75 हो गई।
  • वर्ष 2006 में, उनकी विशेष स्थिति को दर्शाने के लिए PTG का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTGs) कर दिया गया।
  • वर्तमान में, 75 PVTGs भारत के 18 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश (अंडमान और निकोबार द्वीप समूह) में फैले हुए हैं। इन 75 सूचीबद्ध समूहों में से ओडिशा में सर्वाधिक (13) समूह पाए जाते हैं।
  •  जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA) के 2023 के सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में PVTGs की अनुमानित जनसंख्या लगभग 47.5 लाख है। मध्य प्रदेश में इनकी अनुमानित जनसंख्या सर्वाधिक (13.22 लाख) है, इसके बाद महाराष्ट्र (6.7 लाख) का स्थान है।

PVTGs के समक्ष चुनौतियाँ

  • सामाजिक-आर्थिक हाशिए पर होना: जनसंख्या का छोटा आकार, भौगोलिक अलगाव और कृषि-पूर्व निर्वाह पद्धतियों के कारण ये समूह विकास संकेतकों के सबसे निचले पायदान पर बने हुए हैं।
  • बुनियादी सेवाओं तक सीमित पहुँच: दूरदराज के क्षेत्रों में अपर्याप्त स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, स्वच्छता और बुनियादी ढाँचे के कारण उनका मानव विकास बाधित होता है और गरीबी का चक्र बना रहता है।
    • उदाहरण के लिए: ओडिशा में 13 PVTGs पर किए गए 2018 के एक सर्वेक्षण में लगभग 37.4% की अत्यंत कम साक्षरता दर का पता चला, जो राज्य के औसत (लगभग 73%) से बहुत कम है।
  • भूमि अपवंचन और विस्थापन: खनन, औद्योगीकरण और विकास परियोजनाओं के लिए भूमि अतिक्रमण से उनकी पारंपरिक भूमि और आजीविका को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है।
    • उदाहरण के लिए: ‘ग्रेट निकोबार विकास परियोजना’ शोम्पेन जनजाति के अस्तित्व के लिए खतरा उत्पन्न करती है।
  • वन अधिकार अधिनियम (FRA) का अकुशल क्रियान्वयन: उनके पारंपरिक आवास और आजीविका अधिकारों को मान्यता देने के लिए यह अधिनियम अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन इसकी प्रगति निराशाजनक रही है।
    • उदाहरण के लिए: लोकसभा में जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA) द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वन अधिकार अधिनियम (2006) के लागू होने के बाद पिछले 2 दशकों में केवल 10 PVTGs को ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों में ‘हैबिटेट राइट्स’ (आवास अधिकार) प्रदान किए गए हैं।
  • सांस्कृतिक क्षरण और जलवायु संवेदनशीलता: आत्मसातीकरण के दबाव के कारण पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक पहचान खतरे में है। साथ ही, जलवायु परिवर्तन के कारण संसाधनों की कमी और चरम मौसमी घटनाओं से उनकी आजीविका की असुरक्षा और बढ़ गई है।

सरकार द्वारा उठाए गए कदम

  • प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (PM-JANMAN): जनजातीय गौरव दिवस (15 नवंबर) 2023 को प्रारंभ किया गया, इसका उद्देश्य स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका और बुनियादी ढांचे की कमियों को दूर करके विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का उत्थान करना है।
  • एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS): जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA) द्वारा कक्षा 6वीं से 12वीं तक के अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए इस प्रमुख योजना का कार्यान्वयन किया जा रहा है। प्रत्येक EMRS में 5% सीटें PVTG छात्रों के लिए आरक्षित हैं।
  • उच्च शिक्षा सहायता: ‘राष्ट्रीय फेलोशिप’ योजना के अंतर्गत कुल 750 स्लॉट में से 25 स्लॉट, और अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए ‘राष्ट्रीय प्रवासी छात्रवृत्ति’ योजना के तहत 20 में से 3 स्लॉट PVTG उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं।
  • राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम (NSTFDC): यह PVTGs सहित अनुसूचित जनजातियों की आय-सृजन गतिविधियों, कौशल विकास और स्वरोजगार उद्यमों के लिए रियायती वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

SOURCES
Down to Earth
Bussiness standard
Hindustan Times
Indian Express

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