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सामान्य अध्ययन-3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास और अनुप्रयोग तथा रोजमर्रा के जीवन पर उनके प्रभाव।
संदर्भ: माइक्रोसॉफ्ट के AI इकोनॉमी इंस्टीट्यूट (AIEI) द्वारा प्रकाशित हालिया ‘AI डिफ्यूजन रिपोर्ट 2025′ भारत और विश्व भर में AI को अपनाने की प्रवृतियों को दर्शाती है। यह रिपोर्ट बेहतर डिजिटल बुनियादी ढांचे, कौशल विकास और समावेशी AI रणनीतियों की आवश्यकता पर बल देती है।
रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष
- वैश्विक निष्कर्ष
- कार्यप्रणाली:
- माइक्रोसॉफ्ट ‘AI प्रसार’ (AI Diffusion) को मापता है, जिसे “रिपोर्ट की गई अवधि के दौरान जनरेटिव AI उत्पाद का उपयोग करने वाले विश्व भर के लोगों की हिस्सेदारी” के रूप में परिभाषित किया गया है।
- यह मीट्रिक एकीकृत और नाम रहित माइक्रोसॉफ्ट टेलीमेट्री (Telemetry) से प्राप्त किया गया है, जिसमें ऑपरेटिंग सिस्टम (OS), डिवाइस-मार्केट शेयर, इंटरनेट की पैठ और जनसंख्या के अंतर को दर्शाने के लिए उचित समायोजन किए गए हैं।
- AI को वैश्विक स्तर पर अपनाना: 2025 की दूसरी छमाही (H2) में यह 1.2 प्रतिशत बढ़कर 16.3 प्रतिशत हो गया, जो वर्ष की पहली छमाही में 15.1 प्रतिशत था। अब दुनिया भर में लगभग छह में से एक व्यक्ति जनरेटिव AI टूल का उपयोग कर रहा है।
- AI को अपनाने में अग्रणी राष्ट्र: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सिंगापुर के लोगों की AI के उपयोग में सबसे अधिक हिस्सेदारी है और ये दोनों सूची में शीर्ष पर बने हुए हैं। इसके बाद नॉर्वे, आयरलैंड, फ्रांस और स्पेन जैसे अन्य छोटे देश हैं।
- AI को अपनाने में बढ़ता अंतराल: AI को अपनाने में ‘ग्लोबल नॉर्थ’ में ‘ग्लोबल साउथ’ की तुलना में लगभग दो गुना तेजी से हो रहा है।
- रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल नॉर्थ में कार्यशील आयु की लगभग 24.7 प्रतिशत आबादी अब इन उपकरणों का उपयोग कर रही है, जबकि ग्लोबल साउथ में यह केवल 14.1 प्रतिशत है।
- AI बुनियादी ढांचे में निवेश: जिन देशों ने डिजिटल बुनियादी ढांचे, AI कौशल और सरकारी स्तर पर इसे अपनाने में जल्दी निवेश किया है (जैसे-संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, नॉर्वे, आयरलैंड, फ्रांस और स्पेन), वे अग्रणी बने हुए हैं।
- नवाचार AI को अपनाने की गारंटी नहीं है: AI बुनियादी ढांचे और अग्रणी मॉडल विकास में अमेरिका के अग्रणी होने के बावजूद, 2025 की दूसरी छमाही में AI उपयोग के मामले में यह 23वें से खिसककर 24वें स्थान पर आ गया।
- डीपसीक (DeepSeek) की अभूतपूर्व सफलता: हालांकि चीनी AI स्टार्टअप के ‘ओपन-वेट’ मॉडल पश्चिमी देशों में लोकप्रिय नहीं हुए हैं, लेकिन उन्होंने रूस, ईरान, क्यूबा और बेलारूस जैसे बाजारों में महत्वपूर्ण पकड़ बनाई है। इसके कारण हैं:
- इसका ओपन सोर्स दृष्टिकोण (अपने मॉडल को ओपन-सोर्स MIT लाइसेंस के तहत जारी करना)।
- पहुंच संबंधी कारक।
- पूरी तरह से निःशुल्क चैटबॉट प्रदान करना।
- कार्यप्रणाली:
- भारत-विशिष्ट निष्कर्ष
- AI उपयोग में मामूली वृद्धि: भारत में AI प्रसार 2025 की पहली छमाही के 14.2 प्रतिशत से बढ़कर दूसरी छमाही में 1.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 15.7 प्रतिशत हो गया।
- प्रमुख बाजार: भारत की पहचान ओपन एआई, एन्थ्रोपिक, गूगल और परप्लेक्सिटी जैसे AI दिग्गजों के लिए एक प्रमुख यूज़र ग्रोथ मार्केट के रूप में की गई है।
- वैश्विक रैंकिंग: 1.45 बिलियन से अधिक की आबादी के साथ, भारत वर्तमान में सूची में 64वें स्थान पर है और चीन, ब्राजील, जर्मनी, जापान और अमेरिका जैसी अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से पीछे है।
- उच्च डिजिटल फुटप्रिंट: भारत 730 मिलियन डिवाइसों के साथ दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन बाजार है।
औसतन, भारतीय प्रति महीने 21 गीगाबाइट (GB) डेटा की खपत करते हैं, जिसके लिए वे प्रति गीगाबाइट 9.2 सेंट (cents) का भुगतान करते हैं, जोकि दुनिया की सबसे कम मोबाइल डेटा दरों में से एक है।

