संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-1: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय गतिविधि, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ।
सामान्य अध्ययन-3: आपदा एवं आपदा प्रबंधन।
संदर्भ: वर्ष 2026 में उत्तर हिंद महासागर के ऊपर बनने वाला पहला चक्रवात ‘चक्रवात अर्नब’ 28 अक्टूबर 2026 को एक अति प्रचंड चक्रवाती तूफान के रूप में आंध्र प्रदेश–यनम तट पर स्थल से टकराया, जिसके बाद इसकी तीव्रता कम हो गई।
अन्य संबंधित जानकारी

- चक्रवात अर्नब 28 अक्टूबर को बापटला और विशाखापत्तनम के बीच तट पर स्थल से टकराया। इस दौरान इसकी निरंतर पवन गति 125–135 किमी प्रति घंटा थी और हवा के झोंकों की गति 150 किमी प्रति घंटा तक पहुँच गई।
- 23 अक्टूबर को बनने के बाद, यह 27 अक्टूबर तक एक अति प्रचंड चक्रवाती तूफान में बदल गया।
- बांग्लादेश ने WMO–UNESCAP की क्षेत्रीय नामकरण प्रणाली के अंतर्गत “अर्नब” नाम प्रस्तावित किया था। बंगाली भाषा में इसका अर्थ “महासागर” या “समुद्र” है।
चक्रवात अर्नब की तीव्रता बढ़ने के कारण
- गर्म महासागरीय जल: समुद्र की सतह का तापमान लगभग 26°C या उससे अधिक होना तथा 50–100 मीटर की गहराई तक पर्याप्त ऊष्मा का उपलब्ध होना उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के निर्माण और तीव्रता बढ़ने के लिए ऊर्जा प्रदान करता है।
- अल नीनो का प्रभाव: अल नीनो वायुमंडलीय परिसंचरण और पवन प्रतिरूपों में बदलाव लाता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने उल्लेख किया कि अल नीनो के दौरान बनने वाले चक्रवात भूमध्य रेखा के अपेक्षाकृत निकट उत्पन्न होते हैं और आंध्र प्रदेश तथा तमिलनाडु की ओर बढ़ सकते हैं।
- अनुकूल वायुमंडलीय एवं महासागरीय परिस्थितियाँ: पवन कतरनी, वायुमंडलीय सीमा परतें, संवहन, ऊपरी महासागर का परिसंचरण तथा वायु-समुद्र अंतःक्रियाएँ सामूहिक रूप से चक्रवात की तीव्रता को प्रभावित करती हैं। इसलिए केवल अल नीनो के आधार पर अर्नब के तीव्र गति से प्रबल होने की व्याख्या नहीं की जा सकती।
- अधिक तीव्रता और पूर्व उदाहरण: अर्नब 23 अक्टूबर को निम्न दाब प्रणाली से विकसित होकर 27 अक्टूबर तक अति प्रचंड चक्रवाती तूफान बन गया। वर्ष 2014 में चक्रवात हुदहुद, जो अल नीनो वाले वर्ष में आंध्र प्रदेश के तट से टकराया था, इसका एक प्रासंगिक पूर्व उदाहरण है।

उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के बारे में
- उष्णकटिबंधीय चक्रवात तीव्र निम्न दाब प्रणालियाँ हैं, जो उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में गर्म महासागरीय जल के ऊपर बनती हैं।
- इनकी प्रमुख विशेषताएँ हैं:
- 119 किमी प्रति घंटे से अधिक की तेज पवनें।
- भारी वर्षा और तूफानी ज्वार।
- इनके निर्माण के लिए कुछ विशिष्ट परिस्थितियाँ आवश्यक होती हैं, जिनमें शामिल हैं:
- समुद्र की सतह का तापमान 26–27°C से अधिक होना।
- उच्च आर्द्रता और कम ऊर्ध्वाधर पवन कतरनी (विंड शीयर)।
- विभिन्न क्षेत्रों में इन प्रणालियों को अलग-अलग नामों से जाना जाता है, जैसे हिंद महासागर में चक्रवात, अटलांटिक महासागर में हरिकेन और प्रशांत महासागर में टाइफून।
- जलवायु परिवर्तन चक्रवातों की प्रकृति को प्रभावित कर रहा है, जिससे उनकी तीव्रता में वृद्धि, तीव्र प्रगाढ़न तथा भौगोलिक वितरण में बदलाव देखने को मिल रहे हैं।
- पवन गति और संभावित विनाश की तीव्रता के आधार पर चक्रवातों को निम्नलिखित श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है:
- निम्न दाब: पवन गति 31 किमी प्रति घंटे से कम।
- अवदाब: पवन गति 32–61 किमी प्रति घंटे।
- चक्रवाती तूफान: पवन गति 62–88 किमी प्रति घंटे।
- प्रचंड चक्रवाती तूफान: पवन गति 89–117 किमी प्रति घंटे।
- अति प्रचंड चक्रवाती तूफान: पवन गति 118–167 किमी प्रति घंटे।
- अत्यंत प्रचंड चक्रवाती तूफान: पवन गति 168–221 किमी प्रति घंटे।
- सुपर चक्रवात: पवन गति 221 किमी प्रति घंटे से अधिक।
