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सामान्य अध्ययन-2: स्वास्थ्य से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास एवं प्रबंधन से संबंधित विषय; गरीबी एवं भूख से संबंधित विषय; केंद्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ तथा इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन।
संदर्भ: 23 सितंबर 2026 को आयुष्मान भारत के आठ वर्ष पूरे हो गए, जो भारत द्वारा सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की दिशा में आगे बढ़ते हुए वित्तीय सुरक्षा, प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल और डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचना के विस्तार को दर्शाता है।
अन्य संबंधित जानकारी
• 23 सितंबर 2018 को शुरू किया गया, आयुष्मान भारत को सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) को आगे बढ़ाने के लिए तैयार किया गया था। इसका उद्देश्य सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच में सुधार करना और कमजोर परिवारों को उच्च चिकित्सा व्यय से वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना था।
• नवीनतम सरकारी आकलन के अनुसार, 60 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को प्रतिवर्ष ₹5 लाख तक का स्वास्थ्य कवरेज उपलब्ध है, जबकि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में 540 करोड़ से अधिक बार लोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया है, जिससे जमीनी स्तर पर प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल को मजबूती मिली है।
• 31 अगस्त 2026 तक, एबी-पीएमजेएवाई ने 13.25 करोड़ के आसपास अस्पताल में भर्ती मामलों, जिनकी कुल राशि ₹2.03 लाख करोड़ है, को सुविधा प्रदान की है। यह सुविधा 38,000 से अधिक सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों के माध्यम से प्रदान की गई है।
आयुष्मान भारत को समझना
• आयुष्मान भारत केवल एक स्वास्थ्य-बीमा योजना न होकर एक व्यापक स्वास्थ्य सेवा संरचना है।
• इसे प्रारंभ में दो परस्पर संबंधित घटकों के साथ शुरू किया गया था—हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर, जिन्हें अब आयुष्मान आरोग्य मंदिर (AAMs) कहा जाता है, और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY)।
• इसके बाद इसका विस्तार चार घटकों वाली रूपरेखा के रूप में किया गया, जिसमें आयुष्मान आरोग्य मंदिर (AAMs), AB-PMJAY, प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (PM-ABHIM) और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) शामिल हैं।
- AB-PMJAY: माध्यमिक और तृतीयक अस्पताल में भर्ती होने के लिए लगभग 12 करोड़ आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों, जो व्यापक रूप से आबादी के निचले 40% हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं, को प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का कैशलेस स्वास्थ्य कवरेज प्रदान करती है। 2024 में इसका विस्तार करके 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी व्यक्तियों को, उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना, इसमें शामिल किया गया।
- आयुष्मान आरोग्य मंदिर: व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करते हैं। यह मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल से आगे बढ़कर गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग एवं प्रबंधन, मानसिक स्वास्थ्य, मौखिक स्वास्थ्य, नेत्र एवं ईएनटी देखभाल, प्रथम-स्तरीय आपातकालीन देखभाल तथा आवश्यक दवाओं और नैदानिक सेवाओं की निःशुल्क सुविधा प्रदान करते हैं।
- PM-ABHIM: इसे 2021 में 2021–22 से 2025–26 की अवधि के लिए ₹64,180 करोड़ के परिव्यय के साथ शुरू किया गया। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य अवसंरचना, रोग निगरानी, प्रयोगशालाओं, गंभीर देखभाल क्षमता और महामारी से निपटने की तैयारी को मजबूत करना है।

• ABDM: इसे 2021 में राष्ट्रीय स्तर पर शुरू किया गया। यह आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (ABHA) और सहमति-आधारित स्वास्थ्य रिकॉर्ड साझा करने की व्यवस्था के केंद्र में एक इंटरऑपरेबल डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करता है।
सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज और आयुष्मान भारत
• डब्ल्यूएचओ सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (यूएचसी) को इस रूप में परिभाषित करता है कि सभी लोगों को जब और जहाँ आवश्यकता हो, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पूरी श्रृंखला तक बिना किसी वित्तीय कठिनाई के पहुँच प्राप्त हो। इसमें जीवन के सभी चरणों में स्वास्थ्य संवर्धन, रोकथाम, उपचार, पुनर्वास और प्रशामक देखभाल शामिल हैं।
• यूएचसी समानता, गैर-भेदभाव और स्वास्थ्य के अधिकार के सिद्धांतों पर आधारित है। सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) के लक्ष्य 3.8 का उद्देश्य वर्ष 2030 तक सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज प्राप्त करना है।
• 1978 में अपनाई गई अल्मा-अता घोषणा ने प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल को सभी के लिए स्वास्थ्य के लक्ष्य की प्राप्ति की कुंजी के रूप में पहचान दी।
• भारत में यूएचसी की अवधारणा भोरे समिति की रिपोर्ट से जुड़ी है। वर्ष 1946 में समिति ने भारत के लिए ऐसी स्वास्थ्य प्रणाली की सिफारिश की, जो निवारक और उपचारात्मक स्वास्थ्य देखभाल को एकीकृत करे तथा भुगतान करने की क्षमता पर ध्यान दिए बिना सभी को चिकित्सा देखभाल तक पहुँच प्रदान करे।
• आयुष्मान भारत यूएचसी के विभिन्न आयामों को संबोधित करता है: AB-PMJAY अस्पताल में भर्ती होने के लिए वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है; AAMs व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल का विस्तार करते हैं; ABDM स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता और पोर्टेबिलिटी को समर्थन देता है; तथा PM-ABHIM स्वास्थ्य प्रणाली की क्षमता और आपात स्थितियों से निपटने की तैयारी को मजबूत करता है।
आठ वर्षों का विस्तार और प्रभाव
• वित्तीय सुरक्षा: 31 अगस्त 2026 तक, एबी-पीएमजेएवाई ने ₹2.03 लाख करोड़ की राशि के 13.25 करोड़ अस्पताल में भर्ती मामलों में सहायता प्रदान की थी। 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों तथा आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं जैसे निर्दिष्ट समूहों को शामिल किए जाने से योजना का लाभार्थी आधार व्यापक हुआ है।
• प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल: एएएम में 540 करोड़ से अधिक संचयी बार लोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया, जबकि सितंबर 2026 तक व्यापक टेलीमेडिसिन नेटवर्क के माध्यम से 50 करोड़ से अधिक टेली-परामर्श किए जा चुके थे। इन केंद्रों में विस्तारित सेवा पैकेज के माध्यम से निवारक, स्वास्थ्य संवर्धक, उपचारात्मक, पुनर्वासात्मक और प्रशामक देखभाल समुदायों के और करीब पहुँच रही है।
• डिजिटल स्वास्थ्य: 17 सितंबर 2026 तक, 97.61 करोड़ से अधिक एबीएचए आईडी सक्रिय थीं और 119.95 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड उनसे जोड़े जा चुके थे। यह सहमति-आधारित डिजिटल स्वास्थ्य सूचना के आदान-प्रदान के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की पोर्टेबिलिटी और निरंतरता को समर्थन देता है।
• वित्तीय बोझ में कमी: कुल स्वास्थ्य व्यय में जेब से किए जाने वाले व्यय (ओओपीई) की हिस्सेदारी 2014–15 में 62.6% से घटकर 2022–23 में 43.4% हो गई। सरकार इस व्यापक गिरावट का श्रेय सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय में वृद्धि और एबी-पीएमजेएवाई सहित सार्वजनिक रूप से वित्तपोषित स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के विस्तार को देती है।
अंतराल और चुनौतियाँ
• सार्वजनिक वित्तपोषण नीति लक्ष्य से कम: सरकारी स्वास्थ्य व्यय 2022–23 में बढ़कर जीडीपी का 1.43% हो गया, लेकिन यह अभी भी राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 के तहत निर्धारित जीडीपी के 2.5% के लक्ष्य से कम है। इससे अवसंरचना, स्वास्थ्य कार्यबल और सेवा वितरण में निरंतर निवेश सीमित होता है।
• परिवारों पर वित्तीय बोझ बना हुआ है: यद्यपि कुल स्वास्थ्य व्यय में जेब से किए जाने वाले व्यय (OOPI) की हिस्सेदारी 2013–14 में 64.2% से घटकर 2022–23 में 43.4% हो गई, फिर भी परिवार सीधे स्वास्थ्य देखभाल पर एक महत्वपूर्ण हिस्सा खर्च करते हैं। इससे संकेत मिलता है कि सार्वजनिक रूप से वित्तपोषित स्वास्थ्य कवरेज के विस्तार से वित्तीय कठिनाई पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
• सेवा कवरेज अभी भी अधूरा: डब्ल्यूएचओ के भारत के लिए नवीनतम उपलब्ध यूएचसी सेवा कवरेज सूचकांक का स्कोर 2021 में 0–100 के पैमाने पर 63 था, जबकि गैर-संचारी रोग (NSD) उप-सूचकांक 54 था। यह आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावी कवरेज में लगातार बने हुए अंतराल को दर्शाता है।
• मानव संसाधन और भौगोलिक अंतराल: डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात 1:811 होने के बावजूद, स्वास्थ्य कार्यबल की उपलब्धता असमान बनी हुई है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) में 40,583 डॉक्टर/चिकित्सा अधिकारी और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में 26,280 विशेषज्ञ/चिकित्सा अधिकारी हैं।
आगे की राह
• प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करना: निवारक, स्वास्थ्य संवर्धक और दीर्घकालिक देखभाल सेवाओं के लिए एएएम को प्रथम संपर्क केंद्र के रूप में सुदृढ़ किया जाए, जिससे द्वितीयक और तृतीयक स्वास्थ्य सुविधाओं पर पड़ने वाले अनावश्यक दबाव को कम किया जा सके।
• वित्तीय सुरक्षा को और मजबूत करना: अस्पताल में भर्ती होने के कवरेज के साथ-साथ दवाओं, नैदानिक सेवाओं और बाह्य रोगी देखभाल की सार्वजनिक व्यवस्था को मजबूत किया जाए, क्योंकि ये परिवारों के स्वास्थ्य व्यय के महत्वपूर्ण घटक बने हुए हैं।
• सार्वजनिक निवेश में वृद्धि और निरंतरता: जीडीपी के 2.5% के सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ते हुए संसाधनों की दक्षता और समान वितरण में सुधार किया जाए।
• स्वास्थ्य कार्यबल और क्षेत्रीय असमानताओं का समाधान: प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों, विशेष रूप से कम सेवा वाले ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में विशेषज्ञों की उपलब्धता में सुधार किया जाए। इसके साथ बेहतर रेफरल और टेलीमेडिसिन नेटवर्क विकसित किए जाएँ।
