लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की जयंती
संदर्भ: प्रधानमंत्री ने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की जयंती (23 जुलाई) पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भारत के स्वतंत्रता संग्राम तथा राष्ट्रीय चेतना के प्रसार में उनके अमूल्य योगदान का स्मरण किया।

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के बारे में
- प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा
- बाल गंगाधर तिलक का जन्म 23 जुलाई, 1856 को रत्नागिरी (वर्तमान महाराष्ट्र) में एक मध्यमवर्गीय चितपावन ब्राह्मण परिवार में हुआ था।
- उन्होंने 1876 में डेक्कन कॉलेज, पुणे से गणित एवं संस्कृत में स्नातक की उपाधि प्राप्त की तथा 1879 में मुंबई विश्वविद्यालय से विधि की डिग्री प्राप्त की।
- 1884 में उन्होंने आधुनिक शिक्षा के प्रसार के उद्देश्य से डेक्कन शिक्षा सोसाइटी की सह-स्थापना की तथा बाद में जन-जागरण और राजनीतिक चेतना फैलाने के लिए ‘केसरी’ (मराठी) एवं ‘द मराठा’ (अंग्रेज़ी) समाचार-पत्रों का प्रकाशन प्रारंभ किया।
- भारत के राष्ट्रीय आंदोलन में भूमिका
- तिलक प्रारंभिक भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक थे तथा उन्हें “लोकमान्य” (जनता द्वारा सम्मानित नेता) के नाम से जाना जाता है।
- उन्होंने ऐतिहासिक नारा दिया—”स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा।” इस नारे ने स्वशासन की मांग को जन-आंदोलन का स्वरूप प्रदान किया।
- लाला लाजपत राय और बिपिन चंद्र पाल के साथ मिलकर उन्होंने प्रसिद्ध लाल-बाल-पाल त्रयी का गठन किया तथा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उग्रवादी (राष्ट्रवादी) दल के प्रमुख नेता के रूप में उभरे।
- उन्होंने गणेश उत्सव (1893) तथा शिवाजी जयंती (1895) को सार्वजनिक उत्सवों का स्वरूप देकर राष्ट्रवाद को जन-जन तक पहुँचाया और व्यापक राजनीतिक भागीदारी को प्रोत्साहित किया।
- 1905 के बंग-भंग के दौरान उन्होंने स्वदेशी एवं बहिष्कार आंदोलनों का प्रबल समर्थन किया तथा कांग्रेस के उदारवादी संवैधानिक दृष्टिकोण का विरोध किया।
- उन पर दो बार राजद्रोह का मुकदमा चलाया गया और उन्हें मांडले (बर्मा, वर्तमान म्यांमार) निर्वासित कर दिया गया। वहीं उन्होंने अपनी प्रसिद्ध कृति ‘गीता रहस्य’ की रचना की, जिसमें उन्होंने भगवद्गीता की व्याख्या निष्काम कर्म (कर्मयोग) के संदेश के रूप में की।
- 1916 में उन्होंने पुणे में भारतीय स्वशासन लीग की स्थापना की तथा लखनऊ समझौते (1916) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और अखिल भारतीय मुस्लिम लीग के बीच सहयोग को बढ़ावा दिया।
विरासत
- लोकमान्य तिलक को भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख शिल्पकारों में गिना जाता है। उन्होंने भारतीय राष्ट्रवाद को एक व्यापक जन-आंदोलन का स्वरूप प्रदान किया।
- स्वराज, स्वदेशी, राष्ट्रीय शिक्षा एवं राजनीतिक आत्मनिर्भरता के उनके विचारों ने महात्मा गांधी सहित अनेक राष्ट्रीय नेताओं को गहराई से प्रभावित किया।
- महात्मा गांधी ने उन्हें “आधुनिक भारत का निर्माता” कहा, जबकि जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें “भारतीय क्रांति का जनक” की उपाधि दी।
- उनकी रचनाएँ, विशेषकर ‘गीता रहस्य’, तथा निर्भीक राष्ट्रवाद की उनकी विचारधारा आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करती है और भारत की राजनीतिक एवं बौद्धिक विरासत का अभिन्न अंग बनी हुई है।
चंद्रशेखर आज़ाद की जयंती
संदर्भ: प्रधानमंत्री ने 23 जुलाई को चंद्रशेखर आज़ाद की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें निर्भीक साहस और अटूट देशभक्ति का प्रतीक बताया तथा कहा कि उनका बलिदान आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करता है।

चंद्रशेखर आज़ाद के बारे में
- 23 जुलाई, 1906 को भाबरा (वर्तमान चंद्रशेखर आज़ाद नगर), वर्तमान मध्य प्रदेश में उनका जन्म हुआ। उन्होंने अपना बचपन भील क्षेत्र में बिताया, जहाँ उन्होंने तीरंदाजी और निशानेबाजी में असाधारण दक्षता प्राप्त की।
- किशोरावस्था में उन्होंने महात्मा गांधी द्वारा प्रारंभ किए गए असहयोग आंदोलन (1921) में भाग लिया। गिरफ्तारी के बाद जब उनसे नाम पूछा गया तो उन्होंने अपना नाम “आज़ाद”, पिता का नाम “स्वतंत्रता” और निवास “जेल” बताया। इसी घटना के बाद वे चंद्रशेखर आज़ाद के नाम से प्रसिद्ध हुए।
- वे हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन से जुड़े। काकोरी ट्रेन कार्रवाई (1925) के बाद वे इसके प्रमुख नेताओं में उभरकर सामने आए। 1928 में उन्होंने भगत सिंह तथा अन्य क्रांतिकारियों के साथ मिलकर इस संगठन का पुनर्गठन कर हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन की स्थापना की तथा इसके उद्देश्यों में समाजवादी विचारधारा को शामिल किया।
- लाला लाजपत राय की मृत्यु के बाद चलाए गए क्रांतिकारी अभियान में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। इस अभियान के अंतर्गत जे. पी. सॉन्डर्स की हत्या (1928) की गई। आज़ाद भूमिगत रहते हुए संगठन की गतिविधियों के संचालन और विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे।
- 27 फ़रवरी, 1931 को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क (वर्तमान चंद्रशेखर आज़ाद पार्क) में ब्रिटिश पुलिस ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया। उन्होंने अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार कि वे जीवित कभी गिरफ्तार नहीं होंगे, लंबी मुठभेड़ के बाद अपनी अंतिम गोली स्वयं पर चलाकर वीरगति प्राप्त की।
विरासत
- चंद्रशेखर आज़ाद को भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महानतम क्रांतिकारियों में गिना जाता है।
- उन्होंने अपने अदम्य साहस, संगठनात्मक नेतृत्व और ब्रिटिश शासन से पूर्ण स्वतंत्रता के प्रति अटूट समर्पण के माध्यम से देश की अनेक पीढ़ियों को प्रेरित किया।
- उनका जीवन देशभक्ति, त्याग, आत्मसम्मान और बलिदान का अद्वितीय उदाहरण माना जाता है तथा वे आज भी भारत के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।
प्रथम स्वदेशी एक्सपेंडेबल टर्बो जेट इंजन
संदर्भ: भारत ने 350 किलोग्राम थ्रस्ट श्रेणी के प्रथम स्वदेशी एकबारगी उपयोग (एक्सपेंडेबल) टर्बो जेट इंजन का सफलतापूर्वक विकास किया है। यह स्वदेशी विमान प्रणोदन प्रौद्योगिकी तथा रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

प्रथम स्वदेशी एक्सपेंडेबल टर्बो जेट इंजन के बारे में
- इस इंजन का डिज़ाइन रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के गैस टर्बाइन अनुसंधान प्रतिष्ठान द्वारा विकसित किया गया है।
- यह 350 किलोग्राम थ्रस्ट श्रेणी का भारत का प्रथम स्वदेशी एकबारगी उपयोग (एक्सपेंडेबल) टर्बो जेट इंजन है।
- एकबारगी उपयोग (एक्सपेंडेबल) टर्बो जेट इंजन ऐसा टर्बो जेट प्रणोदन तंत्र है, जिसे केवल एक बार उपयोग किए जाने वाले अभियानों के लिए विकसित किया जाता है। इसका उपयोग एकबारगी उपयोग वाले हवाई मंचों को शक्ति प्रदान करने के लिए किया जाता है। पुनः उपयोग किए जाने वाले विमान इंजनों के विपरीत, इसे मिशन पूरा होने के बाद वापस प्राप्त करने या पुनः उपयोग के लिए नहीं बनाया जाता।
- गैस टर्बाइन अनुसंधान प्रतिष्ठान ने इंजन के निर्माण एवं संयोजन के लिए हैदराबाद स्थित आज़ाद इंजीनियरिंग को अपना औद्योगिक भागीदार चुना, जो भारत के रक्षा क्षेत्र में निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
- आज़ाद इंजीनियरिंग ने इस इंजन का सफलतापूर्वक निर्माण कर इसे गैस टर्बाइन अनुसंधान प्रतिष्ठान को सौंप दिया। यह उपलब्धि वर्षों की उच्च-परिशुद्ध अभियांत्रिकी, उन्नत विनिर्माण तकनीकों तथा भारत के वैज्ञानिक एवं औद्योगिक समुदायों के घनिष्ठ सहयोग का परिणाम है।
- जेट इंजन प्रौद्योगिकी को विश्व की सबसे जटिल अभियांत्रिकी विधाओं में से एक माना जाता है, जिसके लिए अत्यधिक परिशुद्धता, उन्नत धातुकर्म, विशेष सामग्रियों तथा अत्यंत उच्च गुणवत्ता वाले विनिर्माण मानकों की आवश्यकता होती है।
- वर्तमान में विश्व के केवल कुछ ही देशों ने इस तकनीकी क्षमता में महारत हासिल की है।
महत्त्व
- यह उपलब्धि उन्नत प्रणोदन प्रणालियों के डिज़ाइन एवं निर्माण में भारत की बढ़ती क्षमता को प्रदर्शित करती है।
- इससे विदेशी प्रौद्योगिकियों पर निर्भरता में कमी आएगी।
- यह स्वदेशी विमानन एवं रक्षा विनिर्माण को और अधिक सशक्त बनाएगी।
- यह रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य को और मजबूती प्रदान करेगी।
कुशा लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (LRSAM)
संदर्भ: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा तट के निकट स्थित डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वीप से स्वदेशी ‘कुशा’ लंबी दूरी की सतह से वायु में मार करने वाली मिसाइल (LRSAM) का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया।

कुशा लंबी दूरी की सतह से वायु में मार करने वाली मिसाइल के बारे में
- विकासकर्ता: इस प्रणाली का विकास रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा परियोजना कुशा के अंतर्गत किया गया है। इसे विस्तारित दूरी वायु रक्षा प्रणाली के नाम से भी जाना जाता है।
- लक्ष्य अवरोधन: परीक्षण के दौरान इसने उच्च गति एवं उच्च ऊँचाई वाले हवाई खतरे का अनुकरण करने वाले इलेक्ट्रॉनिक लक्ष्य को सफलतापूर्वक भेदा तथा सभी मिशन उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया।
- क्षमताएँ: यह प्रणाली निम्नलिखित हवाई खतरों को व्यापक दूरी एवं विभिन्न ऊँचाइयों पर निष्क्रिय करने के लिए विकसित की गई है— लड़ाकू विमान, क्रूज़ मिसाइल, मानव रहित हवाई वाहन, बड़े शत्रु विमान
- स्वदेशी प्रणाली: इसके सभी प्रमुख घटकों, जैसे— अवरोधक मिसाइलें, रडार, प्रक्षेपक, कमान एवं नियंत्रण प्रणाली का विकास डीआरडीओ की प्रयोगशालाओं ने भारतीय उद्योगों के सहयोग से किया है।
- अवरोधक मिसाइल के संस्करण: इसे तीन संस्करणों में विकसित किया जा रहा है— M–1: 150 किलोमीटर, M –2: 250 किलोमीटर, M –3: 350–400 किलोमीटर
महत्त्व
- यह उपलब्धि लंबी दूरी की बहु-स्तरीय वायु रक्षा प्रणालियों के स्वदेशी डिज़ाइन, विकास एवं तैनाती में सक्षम देशों के विशिष्ट समूह में भारत को शामिल करती है।
- यह भारत की प्रस्तावित ‘सुदर्शन चक्र’ वायु रक्षा प्रणाली का एक प्रमुख घटक होगा, जिसका उद्देश्य स्वदेशी बहु-स्तरीय वायु सुरक्षा कवच स्थापित करना है।
- यह एस-400 ट्रायम्फ प्रणाली का स्थानापन्न नहीं, बल्कि उसका पूरक है। यह मध्यम दूरी की सतह से वायु में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली और एस-400 के बीच की क्षमता संबंधी कमी को पूरा करेगा।
- इससे लंबी दूरी की आयातित वायु रक्षा प्रणालियों पर भारत की निर्भरता कम होगी तथा रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भर भारत को और अधिक मजबूती मिलेगी।
- यह प्रणाली लड़ाकू विमानों, क्रूज़ मिसाइलों, मानव रहित हवाई वाहनों तथा भविष्य के उच्च गति वाले हवाई खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने की भारत की क्षमता को सुदृढ़ करेगी, जिससे देश की वायु रक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।
NSE का निफ्टी 500 अहिंसा सूचकांक
संदर्भ: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की सहायक कंपनी एनएसई इंडाइसेज़ लिमिटेड ने निफ्टी 500 अहिंसा सूचकांक लॉन्च किया है। यह पशु कल्याण आधारित नैतिक निवेश पर केंद्रित भारत का पहला शेयर बाज़ार सूचकांक है।
सूचकांक के बारे में
- इस सूचकांक का विकास अहिंसागेन फाउंडेशन के सहयोग से उसके अहिंसा निवेश आंदोलन के अंतर्गत किया गया है, जिसका उद्देश्य निवेश संबंधी निर्णयों में पशु कल्याण को शामिल करना है।
- इसका उद्देश्य निवेशकों को ऐसी कंपनियों में निवेश का अवसर प्रदान करना है, जिनकी व्यावसायिक गतिविधियाँ अहिंसा (हिंसा न करने) के सिद्धांत के अनुरूप हों तथा जो उत्तरदायी निवेश को बढ़ावा देती हों।
- यह निफ्टी 500 में शामिल कंपनियों में से एक विशेष मूल्यांकन प्रणाली के आधार पर चयन करता है। इस प्रक्रिया में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर कंपनियों के उत्पाद, सेवाएँ तथा व्यावसायिक गतिविधियों का मूल्यांकन किया जाता है। मूल्यांकन के बाद कंपनियों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है-हरित श्रेणी, नारंगी श्रेणी, लाल श्रेणी। इनमें से केवल हरित श्रेणी की कंपनियों को इस सूचकांक में शामिल किया जाता है।
- वर्तमान में इस सूचकांक में 326 कंपनियाँ शामिल हैं। इनका भार मुक्त प्रवाह बाज़ार पूँजीकरण के आधार पर निर्धारित किया जाता है तथा किसी एक कंपनी का अधिकतम भार 5% तक सीमित रखा गया है।
- इस सूचकांक का हर छह माह में पुनर्गठन एवं पुनर्संतुलन किया जाता है। इसका आधार दिवस 1 अप्रैल, 2016 तथा आधार मान 1,000 निर्धारित किया गया है।
- इसे निष्क्रिय निवेश उत्पादों के लिए मानक सूचकांक के रूप में तैयार किया गया है, जिनमें शामिल हैं-एक्सचेंज ट्रेडेड फंड, सूचकांक आधारित निधियाँ, अन्य संरचित निवेश उत्पाद। साथ ही यह शेयर बाज़ार में विविधीकृत निवेश भी सुनिश्चित करता है।
महत्त्व
- यह सूचकांक पर्यावरण, सामाजिक एवं सुशासन आधारित निवेश ढाँचे का विस्तार करते हुए पशु कल्याण को निवेश निर्णयों का एक महत्वपूर्ण मानदंड बनाता है, जिससे नैतिक एवं मूल्य-आधारित निवेश को बढ़ावा मिलता है।
- यह उत्तरदायी निवेश उत्पादों की बढ़ती मांग को दर्शाता है तथा निवेशकों की बदलती प्राथमिकताओं के अनुरूप भारत के विषय-आधारित सूचकांकों को और अधिक सुदृढ़ बनाता है।
परीक्षोपयोगी तथ्य
- बीएसई सात्त्विक सूचकांक: इसे पहले बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज द्वारा शुरू किया गया था। यह सात्त्विक (शाकाहार-अनुकूल) सिद्धांतों का पालन करने वाली कंपनियों का प्रदर्शन दर्शाता है।
- इसके विपरीत, निफ्टी 500 अहिंसा सूचकांक पशु कल्याण आधारित व्यापक मूल्यांकन प्रणाली अपनाता है, जिससे यह पशु कल्याण पर विशेष रूप से केंद्रित भारत का पहला शेयर बाज़ार सूचकांक बन गया है।
ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 26-2
संदर्भ: भारतीय नौसेना ने 20–23 जुलाई, 2026 के दौरान कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसैनिक कमान में आयोजित ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 26-2 का सफलतापूर्वक समापन किया। यह चार दिवसीय बहुराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा प्रशिक्षण अभ्यास था।
प्रमुख बिंदु
- इस अभ्यास का आयोजन दक्षिणी नौसैनिक कमान, भारतीय नौसेना के नेतृत्व वाले संयुक्त कार्यबल-154 तथा संयुक्त समुद्री बल के सहयोग से किया गया।
- इस अभ्यास में संयुक्त समुद्री बल के 27 भागीदार देशों के 276 सैन्यकर्मियों ने भाग लिया। इनके अतिरिक्त 76 प्रशिक्षकों एवं विषय-विशेषज्ञों तथा चार अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी सहभागिता की।
- इस अभ्यास के माध्यम से भारतीय नौसेना ने अपनी आधुनिक प्रशिक्षण अवसंरचना, सिमुलेटर, उच्च स्तरीय प्रशिक्षण विशेषज्ञता का प्रदर्शन किया, जिससे दक्षिणी नौसैनिक कमान की प्रमुख समुद्री प्रशिक्षण केंद्र के रूप में भूमिका और सुदृढ़ हुई।
संयुक्त कार्यबल-154 के बारे में
- संयुक्त कार्यबल-154 संयुक्त समुद्री बल का समर्पित प्रशिक्षण कार्यबल है। संयुक्त समुद्री बल एक बहुराष्ट्रीय समुद्री साझेदारी है, जिसमें 40 से अधिक देश शामिल हैं। इसका प्रमुख उद्देश्य बहुराष्ट्रीय समुद्री प्रशिक्षण के माध्यम से सदस्य देशों की क्षमता, परस्पर संचालन क्षमता तथा व्यावसायिक तत्परता को बढ़ाना है।
- वर्तमान में संयुक्त कार्यबल-154 की कमान भारतीय नौसेना के पास है। यह हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की प्राथमिक सुरक्षा एवं प्रशिक्षण भागीदार के रूप में भूमिका तथा क्षेत्रीय समुद्री क्षमता निर्माण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को व्यक्त करता है।
