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सामान्य अध्ययन-3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।
संदर्भ: हाल ही में, कोयंबटूर में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय CAMPA के शासी निकाय की 7वीं बैठक में गंगा नदी डॉल्फिन, हिम तेंदुआ, भारतीय गैंडा और जंगली भैंसा के लिए चार नई राष्ट्रीय स्तर की संरक्षण परियोजनाओं को मंजूरी दी गई।
अन्य संबंधित जानकारी
- शासी निकाय ने देशभर में लगभग 15,000 पवित्र उपवनों के संरक्षण और पुनर्स्थापन के लिए ‘आस्था वन संरक्षण योजना’ को भी मंजूरी दी, जिसका प्रारंभिक बजट ₹3,000 करोड़ (2026–31) है।
- इसने MISHTI (मैंग्रोव इनिशिएटिव फॉर शोरलाइन हैबिटेट्स एंड टैंगिबल इनकम्स) योजना को वर्ष 2029 तक विस्तारित करने की मंजूरी दी, जिसमें मैंग्रोव के पुनर्स्थापन और संरक्षण के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
- बैठक में नगर वन योजना की प्रगति की समीक्षा की गई, जो शहरों में शहरी वनों और हरित क्षेत्रों को बढ़ावा देती है।
- बैठक में संगाई (मणिपुर ब्रो एंटलर्ड डियर) के संरक्षण के लिए निरंतर सहायता को भी मंजूरी दी गई तथा संरक्षण परियोजनाओं की तकनीक आधारित निगरानी के लिए CAMPA GIS निगरानी प्रयोगशाला की स्थापना की समीक्षा की गई।
राष्ट्रीय CAMPA द्वारा स्वीकृत प्रमुख संरक्षण परियोजनाएँ
- प्रोजेक्ट डॉल्फिन
- गंगा नदी डॉल्फिन के लिए संरक्षण और पुनर्प्राप्ति कार्य योजना तैयार करना, जिसमें जनसंख्या आकलन, आवास मानचित्रण और नदी स्वास्थ्य निगरानी शामिल है।
- खतरों को कम करने, महत्वपूर्ण नदीय आवासों की सुरक्षा और मीठे पानी के पारिस्थितिकी तंत्र के दीर्घकालिक संरक्षण को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
- प्रोजेक्ट हिम तेंदुआ (चरण-II)
- वैज्ञानिक निगरानी और आवास संरक्षण के माध्यम से हिम तेंदुआ आबादी और नाजुक हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण को मजबूत करना।
- इसमें हिम तेंदुओं की दूसरी राष्ट्रव्यापी जनसंख्या गणना और समुदाय आधारित संरक्षण पहलों को बढ़ावा देना शामिल है।
- भारतीय गैंडा संरक्षण परियोजना
- एक सींग वाले बड़े गैंडे के लिए आवास सुधार, गलियारा विकास और अवैध शिकार विरोधी उपायों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करना।
- आनुवंशिक विविधता संरक्षण, रोग निगरानी और दीर्घकालिक जनसंख्या सुरक्षा पर जोर दिया गया है।
- जंगली भैंसा संरक्षण परियोजना
- जंगली भैंसे के वितरण वाले राज्यों में इसके संरक्षण के लिए भारत का पहला अखिल भारतीय संरक्षण दृष्टिकोण अपनाया गया है।
- यह आवास पुनर्स्थापन, जनसंख्या पुनर्प्राप्ति, आनुवंशिक शुद्धता और घरेलू भैंसों से संकरण के खतरों को कम करने पर केंद्रित है।

अनुमोदित परियोजनाओं का महत्व
- प्रजाति-विशिष्ट संरक्षण को बढ़ावा देना: ये परियोजनाएँ पारंपरिक प्रमुख संरक्षण कार्यक्रमों से आगे बढ़कर भारत के प्रजाति-केंद्रित संरक्षण ढाँचे का विस्तार करती हैं और संकटग्रस्त वन्यजीव प्रजातियों पर विशेष ध्यान प्रदान करती हैं।
- परिदृश्य-आधारित संरक्षण का संवर्धन: ये पहल नदीय आवासों, हिमालयी परिदृश्यों, बाढ़ के मैदानों, आर्द्रभूमियों और घास के मैदानों सहित विभिन्न पारिस्थितिकी तंत्रों को शामिल करती हैं, जिससे समग्र पारिस्थितिकी तंत्र प्रबंधन को बढ़ावा मिलता है।
- विज्ञान-आधारित वन्यजीव प्रबंधन की दिशा में आगे बढ़ना: इन परियोजनाओं में जनसंख्या आकलन, GIS आधारित निगरानी, आवास कनेक्टिविटी, आनुवंशिक संरक्षण और साक्ष्य-आधारित वन्यजीव प्रबंधन प्रक्रियाओं पर जोर दिया गया है।
- जैव विविधता संबंधी प्रतिबद्धताओं का समर्थन: ये पहल भारत के राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्यों और वैश्विक जैव विविधता संरक्षण ढाँचों के अंतर्गत की गई प्रतिबद्धताओं में योगदान देती हैं।
CAMPA (प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण) के बारे में
- वैधानिक आधार: CAMPA, प्रतिपूरक वनीकरण निधि (CAF) अधिनियम, 2016 के अंतर्गत कार्य करता है। यह अधिनियम गैर-वन उद्देश्यों के लिए वन भूमि के उपयोग से प्राप्त धनराशि के प्रबंधन के लिए बनाया गया है।
- उद्देश्य: वन भूमि के व्यपवर्तन (Forest Diversion) से होने वाली पारिस्थितिक क्षति की भरपाई करना तथा वनों और वन्यजीव संसाधनों के दीर्घकालिक संरक्षण, पुनर्स्थापन और सतत प्रबंधन को बढ़ावा देना।
- प्रशासनिक मंत्रालय: यह पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के अंतर्गत राष्ट्रीय CAMPA और राज्य CAMPA तंत्र के माध्यम से कार्य करता है।
- निधि के स्रोत: निधि निम्न माध्यमों से प्राप्त होती है: प्रतिपूरक वनीकरण शुल्क, शुद्ध वर्तमान मूल्य भुगतान, वन भूमि का उपयोग करने वाली एजेंसियों पर लगाए गए अन्य शुल्क।
- निधि का वितरण: CAF व्यवस्था के अंतर्गत: 90% धनराशि राज्य CAMPA खातों में हस्तांतरित की जाती है। 10% धनराशि राष्ट्रीय CAMPA के पास रखी जाती है।
- उपयोग के प्रमुख क्षेत्र: CAMPA निधि का उपयोग प्रतिपूरक वनीकरण, सहायक प्राकृतिक पुनर्जनन, वन्यजीव संरक्षण, आवास सुधार, वन अग्नि रोकथाम, जलग्रहण क्षेत्र उपचार, पारिस्थितिक पुनर्स्थापन के लिए किया जाता है।
