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संदर्भ: सरकार ने सभी 200 चिन्हित आईटीआई (ITI) क्लस्टरों में ‘पीएम-सेतु’ (उन्नत आईटीआई के माध्यम से प्रधानमंत्री कौशल विकास और रोजगार योग्यता परिवर्तन योजना) के अखिल भारतीय विस्तार को मंजूरी दे दी है।
अन्य संबंधित जानकारी
- यह निर्णय कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) के तहत आयोजित चौथी राष्ट्रीय संचालन समिति (NSC) की बैठक में लिया गया।
- पीएम-सेतु अब पूर्ण-स्तरीय राष्ट्रीय कार्यान्वयन चरण में प्रवेश कर चुका है, जिससे सभी 200 चिन्हित आईटीआई क्लस्टरों में इसका विस्तार संभव हो गया है।
- चौथी NSC बैठक में पांच आईटीआई क्लस्टरों के लिए 1,237.58 करोड़ रुपये की रणनीतिक निवेश योजनाओं (SIPs) को भी मंजूरी दी गई—ओडिशा और गुजरात में एक-एक, और तेलंगाना में तीन जिनमें एंकर इंडस्ट्री पार्टनर्स की भागीदारी है।
- राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अब उद्योग की तत्परता, क्लस्टर की तैयारी और निष्पादन क्षमता के आधार पर कार्यान्वयन के साथ आगे बढ़ सकते हैं।
- इससे पहले, आंध्र प्रदेश पीएम-सेतु के तहत रणनीतिक निवेश योजना की मंजूरी प्राप्त करने वाला पहला राज्य बन गया था, जो उद्योग-संचालित आईटीआई परिवर्तन मॉडल के संचालन का प्रतीक है।
पीएम-सेतु (PM-SETU) के बारे में
- उन्नत आईटीआई के माध्यम से प्रधानमंत्री कौशल विकास और रोजगार योग्यता परिवर्तन योजना (PM-SETU): यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसे अक्टूबर 2025 में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITIs) को आधुनिक और उद्योग-अनुकूल कौशल संस्थानों में बदलने के लिए शुरू किया गया था।
- उद्देश्य:
- आईटीआई को श्रम-बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप उद्योग-संचालित, अत्याधुनिक कौशल संस्थानों में बदलना।
- मांग-संचालित प्रशिक्षण, आधुनिक शिक्षाशास्त्र और मजबूत उद्योग संबंधों के माध्यम से रोजगार क्षमता को बढ़ाना।
- प्रशिक्षण बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण करना और व्यावसायिक शिक्षा में स्थायी उद्योग भागीदारी को बढ़ावा देना।
- उन्नत कौशल प्रशिक्षण के लिए पांच राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (NSTIs) को प्रमुख प्रशिक्षक संस्थानों के रूप में विकसित करना।
- आकांक्षी कौशल केंद्रों के निर्माण के माध्यम से ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण का समर्थन करना।
- योजना के घटक:
- घटक I: आईटीआई का उन्नयन: उद्योग-संचालित ‘हब-एंड-स्पोक’ मॉडल के माध्यम से 1,000 सरकारी आईटीआई का उन्नयन करना, जिसमें 200 हब आईटीआई और 800 स्पोक आईटीआई शामिल हैं।
- घटक II: एनएसटीआई (NSTIs) को मजबूत करना: पांच राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (NSTIs) की क्षमता बढ़ाना और उन्नत प्रशिक्षक प्रशिक्षण एवं विशिष्ट कौशल के लिए ‘उत्कृष्टता केंद्र’ विकसित करना।
- वित्त पोषण पैटर्न: इस योजना का पांच वर्षों में कुल परिव्यय 60,000 करोड़ रुपये है।
- केंद्रीय हिस्सा: 30,000 करोड़ रुपये; राज्य का हिस्सा: 20,000 करोड़ रुपये; उद्योग का हिस्सा: 10,000 करोड़ रुपये।
पीएम-सेतु की मुख्य विशेषताएं
- उद्योग-संचालित शासन: मांग-संचालित योजना, शासन और कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए ‘एंकर इंडस्ट्री पार्टनर्स’ (AIPs) और ‘स्पेशल पर्पज व्हीकल्स’ (SPVs) के माध्यम से उद्योग की भागीदारी को संस्थागत बनाया गया है।
- बुनियादी ढांचे और पाठ्यक्रम का आधुनिकीकरण: यह योजना प्रशिक्षण बुनियादी ढांचे को उन्नत करती है और उभरती प्रौद्योगिकियों तथा श्रम-बाजार की जरूरतों के अनुरूप कौशल प्रदान करने के लिए नए युग के उद्योग-अनुकूल पाठ्यक्रम पेश करती है।
- लचीला और अभिनव शिक्षण: यह लचीलेपन, नवाचार और संस्थागत स्थिरता को बढ़ाने के लिए मॉड्यूलर और मिश्रित शिक्षण, अल्पकालिक कार्यक्रमों और प्रशिक्षक विकास को बढ़ावा देती है।
- छात्र-केंद्रित सेवाएं: यह अप्रेंटिसशिप, करियर सहायता, जीवन-कौशल प्रशिक्षण और रोजगार-उन्मुख सीखने के अवसरों के माध्यम से रोजगार क्षमता को मजबूत करती है।
योजना का महत्व
- भारत के कौशल अंतराल को पाटना: पीएम-सेतु व्यावसायिक प्रशिक्षण को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप संरेखित करने का प्रयास करता है, जिससे प्रदान किए गए कौशल और श्रम-बाजार की मांग के बीच लंबे समय से चले आ रहे अंतर को दूर किया जा सके।
- रोजगार क्षमता को मजबूत करना: उद्योग-संचालित शासन, अद्यतन पाठ्यक्रम और व्यावहारिक प्रशिक्षण से युवाओं में कार्यबल तत्परता और रोजगार के परिणामों में सुधार होने की उम्मीद है।
- आईटीआई इकोसिस्टम का आधुनिकीकरण: यह योजना भारत के पूरे आईटीआई नेटवर्क में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे के उन्नयन, शासन सुधारों और तकनीकी आधुनिकीकरण को बढ़ावा देती है।
- उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए कार्यबल तैयार करना: नए जमाने के पाठ्यक्रमों, आधुनिक उपकरणों और उद्योग-अनुकूल प्रशिक्षण के माध्यम से, पीएम-सेतु का उद्देश्य युवाओं को ‘इंडस्ट्री 4.0’ और भविष्य के विकास वाले क्षेत्रों के लिए प्रासंगिक कौशल से लैस करना है।
