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सामान्य अध्ययन-3: बफर स्टॉक और खाद्य सुरक्षा के मुद्दे; बुनियादी ढाँचा: ऊर्जा।
संदर्भ: हाल ही में जारी OECD–FAO ‘कृषि आउटलुक 2026–2035’ उत्पादकता लाभ के माध्यम से वैश्विक कृषि में निरंतर वृद्धि का अनुमान लगाता है, साथ ही जलवायु परिवर्तन, आय की अस्थिरता और भू-राजनीतिक व्यवधानों से उत्पन्न जोखिमों पर प्रकाश डालता है।
अन्य संबंधित जानकारी
- OECD–FAO ‘एग्रीकल्चरल आउटलुक’ का 22वां संस्करण 2026 से 2035 तक वैश्विक कृषि जिंसों, मत्स्य पालन और जैव ईंधन बाजारों का दस-वर्षीय आकलन प्रदान करता है।
- यह रिपोर्ट ‘कृषि श्रम उत्पादकता’ और ‘आय परिवर्तनशीलता’ पर विशेष जोर देती है, और लचीले एवं समावेशी कृषि विकास की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
- अनुमान है कि 2035 तक वैश्विक कृषि और मछली उत्पादन में लगभग 13% की वृद्धि होगी, जबकि वैश्विक जनसंख्या के 8.8 अरब तक पहुंचने की संभावना है।
- यह ‘आउटलुक’ 2026 के मध्य-पूर्व संघर्ष के संभावित प्रभाव का भी विश्लेषण करता है, और चेतावनी देता है कि उच्च ऊर्जा और उर्वरक कीमतें कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकती हैं, विशेष रूप से कम आय वाले देशों में।

OECD–FAO कृषि आउटलुक 2026–2035 के मुख्य निष्कर्ष
- उत्पादकता लाभ के माध्यम से कृषि उत्पादन में वृद्धि:
- मुख्य रूप से उत्पादकता में सुधार के कारण, 2035 तक वैश्विक कृषि और मछली उत्पादन में लगभग 13% की वृद्धि होने का अनुमान है।
- हालांकि, बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए फसल क्षेत्र और पशुधन की संख्या में कुछ विस्तार की आवश्यकता बनी रहेगी।
- उत्पादन में अधिकांश वृद्धि एशिया, लैटिन अमेरिका और उप-सहारा अफ्रीका से आने की उम्मीद है।
- कृषि आय में सुधार की संभावना, लेकिन जोखिम बरकरार:
- 2035 तक प्रति श्रमिक औसत कृषि आय में लगभग 9% की वृद्धि होने का अनुमान है।
- हालांकि, कृषि आय अभी भी जलवायु झटकों, बाजार की अस्थिरता और इनपुट लागत में वृद्धि के प्रति संवेदनशील है, विशेष रूप से कम आय वाले देशों में।
- इस बात की 25% संभावना बनी हुई है कि आय आधारभूत अनुमानों से काफी नीचे गिर सकती है।
- जैव ईंधन और ऊर्जा संक्रमण कृषि मांग को आकार देंगे:
- उभरती अर्थव्यवस्थाओं के नेतृत्व में वैश्विक जैव ईंधन की मांग में विस्तार जारी रहने की उम्मीद है।
- मक्का, गन्ना और वनस्पति तेल मुख्य फीडस्टॉक (कच्चा माल) बने रहेंगे, जिससे खाद्य फसलें जैव ईंधन उत्पादन (प्रथम-पीढ़ी के जैव ईंधन) के केंद्र में बनी रहेंगी।
- रिपोर्ट ‘भोजन बनाम ईंधन’ बहस पर बढ़ती चिंताओं और उन्नत जैव ईंधन एवं सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) को व्यावसायिक रूप से अपनाने की धीमी गति को रेखांकित करती है।
- विकसित होती वैश्विक खाद्य प्रणालियां:
- आय में वृद्धि और शहरीकरण के कारण पशुधन उत्पादों, डेयरी और जलीय खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की उम्मीद है।
- अनुमान है कि 2035 तक वैश्विक खाद्य खपत में होने वाली वृद्धि में दक्षिण-पूर्व एशिया की हिस्सेदारी लगभग 39% होगी।
रिपोर्ट द्वारा उजागर चुनौतियाँ और जोखिम
- आय की अस्थिरता और किसानों की संवेदनशीलता: आय वृद्धि के अनुमानों के बावजूद, किसान—विशेष रूप से कम आय वाले देशों में जलवायु झटकों, बाजार के उतार-चढ़ाव और इनपुट-लागत की अस्थिरता के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बने हुए हैं।
- जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय स्थिरता: प्रत्यक्ष कृषि उत्सर्जन 2035 तक 6.5% बढ़ने का अनुमान है, जो पर्यावरणीय प्रभावों को कम करते हुए उत्पादन बढ़ाने की चुनौती को उजागर करता है।
- भू-राजनीतिक और इनपुट-लागत संबंधी जोखिम: भू-राजनीतिक व्यवधान ऊर्जा और उर्वरक की कीमतों को बढ़ा सकते हैं, जिससे उत्पादन लागत बढ़ जाती है और कृषि उत्पादन कम हो जाता है, विशेष रूप से विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में।
- खाद्य सुरक्षा संबंधी चिंताएं: आपूर्ति-श्रृंखला में व्यवधान, कीमतों में अस्थिरता और संसाधनों तक असमान पहुंच वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा बनी हुई है, विशेषकर कम आय वाली आबादी के लिए।
अनुशंसाएं
- उत्पादकता-नेतृत्व वाली कृषि वृद्धि को बढ़ावा दें: उत्पादकता को स्थायी रूप से बढ़ाने के लिए कृषि अनुसंधान, नवाचार, डिजिटल प्रौद्योगिकियों और बेहतर कृषि पद्धतियों में निवेश बढ़ाएं।
- किसानों के लचीलेपन को मजबूत करें: किसानों पर आय की अस्थिरता के प्रभाव को कम करने के लिए जलवायु-जोखिम बीमा, सामाजिक सुरक्षा उपायों और जोखिम-प्रबंधन उपकरणों का विस्तार करें।
- सतत कृषि को आगे बढ़ाएं: उत्पादन वृद्धि को पर्यावरणीय क्षरण से अलग करने के लिए जलवायु-स्मार्ट कृषि, कुशल संसाधन उपयोग और कम-उत्सर्जन वाली प्रौद्योगिकियों को प्रोत्साहित करें।
- भोजन और ईंधन लक्ष्यों में संतुलन बनाएं: ऐसी जैव ईंधन नीतियां तैयार करें जो ऊर्जा-संक्रमण लक्ष्यों का समर्थन करें, साथ ही खाद्य प्रणालियों, भूमि संसाधनों और जिंसों की कीमतों पर पड़ने वाले दबाव को न्यूनतम करें।
Sources :
Down to Earth
Oecd
