संबंधित जानकारी

सामान्य अध्ययन -3: जन वितरण प्रणाली-उद्देश्य, कार्यप्रणाली, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक से संबंधित मुद्दे और खाद्य सुरक्षा।

संदर्भ: खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग ने सार्वजनिक परामर्श के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा (संशोधन) विधेयक, 2026 का मसौदा जारी किया है। इसका मुख्य उद्देश्य ‘अंत्योदय अन्न योजना’ (AAY) के तहत लाभार्थियों के लिए खाद्यान्न आवंटन में सुधार करना है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • यह संशोधन का मसौदा विशेष रूप से ‘अंत्योदय अन्न योजना’ (AAY) श्रेणी पर केंद्रित है, जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 के तहत सबसे गरीब और सर्वाधिक कमजोर परिवारों को कवर करती है।
  • इसका उद्देश्य AAY के भीतर की अंतर-श्रेणी असमानताओं को संबोधित करना है, जिसके लिए यह निश्चित ‘परिवार-आधारित’ खाद्यान्न आवंटन से ‘व्यक्ति-आधारित’ पात्रता प्रणाली की ओर बढ़ने का प्रयास है, ताकि परिवार के आकार और पोषण संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक तर्कसंगत और न्यायपूर्ण वितरण सुनिश्चित किया जा सके।
  • इस संशोधन ने खाद्य सुरक्षा, पोषण संबंधी पर्याप्तता, लाभार्थी कवरेज और भारत की खाद्य सब्सिडी व्यवस्था की भविष्य की दिशा पर एक व्यापक बहस छेड़ दी है।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 के बारे में

  • 2013 में अधिनियमित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS) के माध्यम से रियायती खाद्यान्न की उपलब्धता सुनिश्चित करके खाद्य सुरक्षा का कानूनी अधिकार प्रदान करता है।
  • यह अधिनियम 2011 की जनगणना के आधार पर ग्रामीण आबादी के 75% और शहरी आबादी के 50% तक के हिस्से को कवर करता है, जो लगभग 81.35 करोड़ लाभार्थियों के बराबर है।
  • लाभार्थियों का वर्गीकरण:
  • अंत्योदय अन्न योजना (AAY): सबसे गरीब परिवार; वर्तमान में प्रति परिवार प्रति माह 35 किलोग्राम खाद्यान्न पाने के हकदार हैं।
  • प्राथमिकता वाले परिवार (PHH): प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलोग्राम खाद्यान्न पाने के हकदार हैं।
  • यह अधिनियम खाद्य और पोषण सुरक्षा के लिए जीवन-चक्र दृष्टिकोण का पालन करता है, जो आंगनवाड़ी सेवाओं और स्कूल भोजन कार्यक्रमों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और बच्चों (6 माह से 14 वर्ष) को पोषण सहायता प्रदान करता है, साथ ही कम से कम ₹6,000 का मातृत्व लाभ भी प्रदान करता है।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा (संधोधन) विधेयक, 2026 के मसौदे के प्रमुख प्रावधान

  • AAY लाभार्थियों के लिए व्यक्ति-आधारित पात्रता: मसौदा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) 2013 की धारा 3 में एक नया प्रावधान प्रस्तावित करता है, जिसके तहत AAY लाभार्थियों को वर्तमान परिवार-आधारित आवंटन के स्थान पर प्रति व्यक्ति प्रति माह 7 किलोग्राम खाद्यान्न प्राप्त होगा।
  • पारिवारिक सीमा का जारी रहना: प्रति व्यक्ति पात्रता में बदलाव के बावजूद, यह संशोधन प्रति परिवार प्रति माह अधिकतम 35 किलोग्राम खाद्यान्न की सीमा को बनाए रखता है।
  • प्राथमिकता वाले परिवारों के लिए कोई परिवर्तन नहीं: प्राथमिकता वाले परिवारों (PHH) के लिए पात्रता प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलोग्राम पर अपरिवर्तित है। यह संशोधन केवल AAY श्रेणी तक सीमित है।
  • मौजूदा NFSA ढांचे की निरंतरता: यह मसौदा NFSA कवरेज, लाभार्थी पहचान तंत्र या व्यापक सार्वजनिक वितरण प्रणाली के ढांचे में कोई बदलाव नहीं करता है।

संशोधन का महत्व

  • अंतर-श्रेणी असमानताओं का समाधान: मौजूदा AAY ढांचे के तहत, परिवार के आकार की परवाह किए बिना प्रत्येक परिवार को प्रति माह 35 किलोग्राम खाद्यान्न मिलता है, जिससे प्रति व्यक्ति पात्रता में असमानता होती है। प्रस्तावित ‘व्यक्ति-आधारित’ आवंटन का उद्देश्य खाद्यान्न वितरण को अधिक न्यायसंगत बनाना है।
  • कमजोर परिवारों के लिए खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना: बड़े AAY परिवारों को अक्सर प्राथमिकता वाले परिवार (PHH) श्रेणी के लाभार्थियों की तुलना में प्रति व्यक्ति कम खाद्यान्न सहायता मिलती है। संशोधित पात्रता संरचना का उद्देश्य सबसे गरीब और सबसे कमजोर परिवारों के लिए खाद्य सुरक्षा को बढ़ाना है।
  • कल्याणकारी वितरण का युक्तिकरण: यह संशोधन एक समान ‘पारिवारिक पात्रता’ से ‘जनसांख्यिकीय-संवेदनशील’ दृष्टिकोण की ओर एक बदलाव का प्रतीक है, जो खाद्य सब्सिडी वितरण के लक्ष्य निर्धारण (targeting) और दक्षता में सुधार करेगा।
  • NFSA के उद्देश्यों को सुदृढ़ करना: अंत्योदय अन्न योजना के भीतर आवंटन विसंगतियों को दूर करके, यह प्रस्ताव राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत परिकल्पित अधिकार-आधारित खाद्य सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने का प्रयास करता है।

चिंताएँ और आलोचनाएँ

  • बड़े परिवारों के लिए सीमित लाभ: हालाँकि संशोधन में प्रति व्यक्ति 7 किलोग्राम का प्रस्ताव है, लेकिन 35 किलोग्राम की पारिवारिक सीमा को बरकरार रखने का अर्थ यह है कि बड़े AAY परिवारों को शायद अभी भी उनकी पूरी पात्रता (प्रति व्यक्ति 7 किलोग्राम के हिसाब से) न मिल सके।
  • पुराना NFSA कवरेज: ‘राइट टू फूड कैंपेन’ से जुड़े कार्यकर्ताओं का तर्क है कि NFSA कवरेज अभी भी 2011 की जनगणना पर आधारित है, जिससे लाखों पात्र व्यक्ति खाद्य सुरक्षा के दायरे से बाहर हो गए हैं।
  • अन्य लाभार्थियों का बहिष्करण: यह सुधार केवल AAY परिवारों तक सीमित है और यह प्राथमिकता वाले परिवारों (PHH) से संबंधित चिंताओं को संबोधित नहीं करता, जो NFSA लाभार्थियों का बहुमत हैं।
  • राज्यों की चिंताएं: केरल और कुछ अन्य दक्षिणी राज्यों ने तर्क दिया है कि इस संशोधन के साथ-साथ NFSA कवरेज सीमाओं का पुनरीक्षण और राज्य-विशिष्ट जनसांख्यिकीय व पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अधिक लचीलापन दिया जाना चाहिए।

आगे की राह

  • AAY पात्रता का युक्तिकरण: 35 किलोग्राम की पारिवारिक सीमा की समीक्षा करना ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बड़े AAY परिवारों को उनके आकार और आवश्यकताओं के अनुरूप खाद्यान्न सहायता प्राप्त हो।
  • NFSA कवरेज का विस्तार और अद्यतन: बहिष्करण की त्रुटियों को दूर करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि सभी पात्र परिवार खाद्य सुरक्षा के दायरे में आएं, नवीनतम जनसंख्या अनुमानों का उपयोग करके लाभार्थी कवरेज को संशोधित करना।
  • खाद्य सुरक्षा से पोषण सुरक्षा की ओर बढ़ना: कुपोषण और आहार संबंधी कमियों को दूर करने के लिए अनाज-आधारित सहायता के साथ-साथ दालों, मोटे अनाजों (श्री अन्न), खाद्य तेलों और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों की उपलब्धता को बढ़ाना।
  • सहकारी संघवाद और PDS सुधारों को बढ़ावा करना: सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत लाभार्थी पहचान, पोर्टेबिलिटी, शिकायत निवारण और अंतिम छोर तक वितरण में सुधार करते हुए राज्यों और हितधारकों की प्रतिक्रिया को शामिल करना।
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