संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-3: बुनियादी ढाँचा: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे इत्यादि।
संदर्भ: हाल ही में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’, और साइबर अपराध व डिजिटल धोखाधड़ी से निपटने के उपायों की समीक्षा के लिए ‘प्रगति’ (PRAGATI – प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन) की 52वीं बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक की मुख्य विशेषताएं:
- बुनियादी ढांचा परियोजना समीक्षा: 4 राज्यों में सड़क, बिजली, औद्योगिक गलियारे और मेट्रो रेल क्षेत्रों में लगभग ₹30,000 करोड़ के निवेश वाली 4 महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा की गई।
- समय-सीमा, अंतर-एजेंसी समन्वय, समस्या समाधान और समय पर पूर्णता पर ध्यान केंद्रित किया गया।
- मंत्रालयों और राज्य सरकारों को मिशन-मोड में बाधाओं को दूर करने का निर्देश दिया गया।
- इस बात पर जोर दिया गया कि परियोजनाओं में देरी से लागत बढ़ती है और नागरिक व उद्योग समय पर मिलने वाले लाभों से वंचित रह जाते हैं।
- पीएम गतिशक्ति-आधारित योजना: एकीकृत योजना और कार्यान्वयन के लिए ‘पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान’ के प्रभावी उपयोग पर जोर दिया गया।
- परियोजना विवरण, उपयोगिताओं, बुनियादी ढांचा परतों और मंजूरी के नियमित अपडेट का आह्वान किया गया।
- बाधाओं को पहले से पहचानने और उनका समाधान करने के लिए रियल टाइम डेटा-संचालित निर्णय लेने पर जोर दिया गया।
- टीबी मुक्त भारत अभियान: ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ के तहत प्रगति की समीक्षा की गई।
- टीबी निगरानी और प्रबंधन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल तकनीकों के उपयोग पर प्रकाश डाला गया।
- जागरूकता पैदा करने, रोगी फॉलो-अप और सामुदायिक लामबंदी के लिए एनसीसी (NCC) कैडेटों और ‘माई भारत’ (MY Bharat) स्वयंसेवकों को शामिल करने का सुझाव दिया गया।
- साइबर अपराध और डिजिटल अरेस्ट: साइबर धोखाधड़ी और ‘डिजिटल अरेस्ट’ घोटालों से संबंधित शिकायतों की समीक्षा की गई।
- एजेंसियों को त्वरित प्रतिक्रिया, बेहतर समन्वय और मजबूत जन जागरूकता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
- निवारण, रिपोर्टिंग, जांच और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
- राज्यों से साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों के त्वरित पंजीकरण और प्रतिक्रिया के लिए ‘ई-जीरो एफआईआर’ तंत्र को लागू करने का आग्रह किया गया।
PRAGATI (प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन) के बारे में
- प्रगति (PRAGATI) के बारे में: 2015 में शुरू की गई ‘प्रगति’ एक आईसीटी-सक्षम (ICT-enabled) मल्टी-मोडल प्लेटफॉर्म है, जिसका उपयोग परियोजनाओं की निगरानी, योजनाओं की समीक्षा और जन शिकायतों के समाधान के लिए किया जाता है।
- उद्देश्य: यह प्रौद्योगिकी-सक्षम शासन के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों को एकीकृत करता है।
- कार्यप्रणाली: यह प्रधानमंत्री की प्रत्यक्ष देखरेख में रियल टाइम समीक्षा, समन्वय और समस्या समाधान के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है।
- उत्पत्ति और विकास: यह 2003 में गुजरात में शुरू किए गए ‘स्वागत’ (SWAGAT – स्टेट वाइड अटेंशन ऑन ग्रिवेंसेस बाय एप्लीकेशन ऑफ टेक्नोलॉजी) से प्रेरित है।
- इसने प्रौद्योगिकी-सक्षम शिकायत निवारण की अवधारणा का विस्तार राष्ट्रीय स्तर की परियोजना निगरानी और कार्यक्रम कार्यान्वयन तक किया।
- यह “न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन” के शासन दर्शन को दर्शाता है।
- प्रमुख विशेषताएं: यह डिजिटल डेटा प्रबंधन, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और भू-स्थानिक, प्रौद्योगिकी को एकीकृत करता है।
- यह प्रधानमंत्री, राज्यों के मुख्य सचिवों और केंद्रीय मंत्रालयों के सचिवों को एक मंच पर लाता है।
- यह ‘पीएम गतिशक्ति’, ‘परिवेश’ (PARIVESH) और ‘पीएम संदर्भ पोर्टल’ जैसे प्लेटफॉर्म को एकीकृत करता है।
- यह जटिल अंतर-मंत्रालयी और केंद्र-राज्य मुद्दों को सुलझाने के लिए एक तंत्र के रूप में कार्य करता है।
- संरचित समीक्षा तंत्र: प्रधानमंत्री मुख्य सचिवों और केंद्रीय मंत्रालयों के सचिवों के साथ ‘प्रगति’ बैठकों की अध्यक्षता करते हैं।
- बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की निगरानी कैबिनेट सचिवालय द्वारा की जाती है।
- योजनाओं और शिकायतों की समीक्षा प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की निगरानी में संबंधित मंत्रालयों द्वारा की जाती है।
- महत्वपूर्ण मुद्दों को समय पर समाधान के लिए मंत्रालयों से ‘प्रगति’ तक बढ़ाया जाता है।
- उपलब्धियाँ: अब तक 382 प्रमुख राष्ट्रीय परियोजनाओं की समीक्षा और निगरानी की जा चुकी है।
- ₹85 लाख करोड़ से अधिक मूल्य की परियोजनाओं में तेजी लाई गई है।
- 3,187 पहचाने गए मुद्दों में से 2,958 का समाधान किया गया है।
- सरकार के कई स्तरों पर वास्तविक समय में समन्वय और जवाबदेही को सक्षम बनाया गया है।
प्रगति का महत्व
- आर्थिक महत्व: बुनियादी ढांचे के वितरण में तेजी लाता है, लागत वृद्धि को कम करता है, और औद्योगिक विकास, लॉजिस्टिक्स दक्षता तथा क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में सुधार के माध्यम से आर्थिक लाभों की तीव्र प्राप्ति को सक्षम बनाता है।
- सहकारी संघवाद: केंद्रीय मंत्रालयों और राज्य सरकारों को एक सामान्य रियल टाइम निर्णय लेने वाले मंच पर लाकर सहकारी संघवाद को संस्थागत रूप देता है, जिससे साझा स्वामित्व और जवाबदेही को बढ़ावा मिलता है।
- शासन का महत्व: पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध कार्यान्वयन को मजबूत करता है, साथ ही अंतर-मंत्रालयी समन्वय में सुधार करता है और परिणाम-उन्मुख शासन सुधारों को बढ़ावा देता है।
- सामाजिक महत्व: बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सेवाओं के तीव्र वितरण को सुनिश्चित करता है, जिससे स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, बाजारों, रोजगार के अवसरों और नागरिक-केंद्रित कल्याणकारी योजनाओं तक पहुँच में सुधार होता है।
- पर्यावरणीय महत्व: पीएम गतिशक्ति के जीआईएस (GIS)-आधारित ढांचे के माध्यम से टिकाऊ बुनियादी ढांचा योजना का समर्थन करता है, जिससे प्रारंभिक पर्यावरणीय अनुपालन सक्षम होता है और देरी, संसाधनों की बर्बादी तथा उत्सर्जन में कमी आती है।
- वैश्विक मान्यता: ऑक्सफोर्ड के ‘सैड बिजनेस स्कूल’ (Saïd Business School) द्वारा वैश्विक सर्वोत्तम-अभ्यास मॉडल और वास्तविक समय में परियोजना निगरानी, समन्वय तथा कुशल बुनियादी ढांचा वितरण के लिए “सत्य का एकल स्रोत” (Single Source of Truth) के रूप में मान्यता प्राप्त है।
