संबंधित पाठ्यक्रम

सामान्य अध्ययन-2: भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा करार।

सामान्य अध्ययन -3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय।

संदर्भ: 1 जून 2026 से लागू हुआ भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) खाड़ी क्षेत्र के साथ भारत के आर्थिक जुड़ाव में एक प्रमुख प्रगति है और यह ओमान में भारतीय वस्तुओं और सेवाओं को उल्लेखनीय बाजार पहुंच प्रदान करता है।

अन्य संबंधित जानकारी

• इस समझौते पर दिसंबर 2025 में हस्ताक्षर किये गए थे और यह खाड़ी क्षेत्र में भारत के सबसे व्यापक व्यापार समझौतों में से एक है। ऐसा माना जा रहा है कि इससे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में बढ़ोतरी हो सकती है। ध्यातव्य है कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार हाल के वर्षों में 15 बिलियन अमेरिकी डॉलर को पार कर चुका है।

• वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, इस व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते से आगामी वर्षों में ओमान को होने वाले भारत के निर्यात के लगभग दोगुना होने की उम्मीद है, जबकि इसके साथ ही खाड़ी, पूर्वी अफ्रीकी और पश्चिमी एशियाई बाजारों में भारत की उपस्थिति मजबूत होगी।

• यह समझौता अपनी ‘एक्ट वेस्ट पॉलिसी’ के तहत आर्थिक साझेदारी को सुदृढ़ करने और उच्च गुणवत्ता वाले व्यापार समझौतों के अपने नेटवर्क का विस्तार करने की भारत की व्यापक रणनीति के अनुरूप है।

भारत–ओमान CEPA की मुख्य विशेषताएँ

1. वस्तुओं के व्यापार के लिए परिवर्तनकारी बाजार पहुंच 

• ओमान ने अपनी 98.08% टैरिफ लाइनों पर 100% शुल्क-मुक्त पहुंच प्रदान की है, जो मूल्य के आधार पर भारत के कुल निर्यात के 99.38% को कवर करती है। इस प्रकार यह खाड़ी क्षेत्र में भारत के सबसे व्यापक व्यापार समझौतों में से एक बन जाता है।

• इस व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) से पहले, सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र (MFN) व्यवस्था के तहत ओमान में भारत के केवल 15.33% निर्यात को ही शुल्क-मुक्त प्रवेश प्राप्त था। इस समझौते के तहत सभी टैरिफ रियायतें तत्काल प्रभाव से लागू होंगी।

• इसके मुख्य लाभार्थियों में रत्न एवं आभूषण, टेक्सटाइल, समुद्री उत्पाद, औषधीय उत्पाद (भेषज), इंजीनियरिंग वस्तुएं, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, फुटवियर, ऑटोमोबाइल और अन्य श्रम-प्रधान  क्षेत्र शामिल हैं।

2. संवेदनशील क्षेत्रों के लिए संरक्षण के साथ अंशांकित उदारीकरण

• भारत ने अपनी 77.79% टैरिफ लाइनों पर टैरिफ उदारीकरण की पेशकश की है, जो मूल्य के आधार पर ओमान से होने वाले आयात के 94.81% को कवर करती है, जबकि इसके साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों के लिए सुरक्षा उपायों को बनाए रखा गया है।

• संवेदनशील उत्पादों जैसे कि डेयरी उत्पाद, अनाज, फल, सब्जियां, खाद्य तेल, तिलहन, रबर, चमड़ा, मसाले और प्रमुख कृषि उपजों को अपवर्जन सूची में रखा गया है।

• घरेलू उद्योग, खाद्य सुरक्षा और किसानों के हितों की रक्षा के लिए इस समझौते में चयनित उत्पादों के लिए टैरिफ दर कोटा (TRQs) और न्यूनतम आयात मूल्य (MIP) तंत्र को भी शामिल किया गया है।

3.सेवाओं और व्यावसायिक गतिशीलता के लिए प्रतिबद्धताएं 

• ओमान ने 127 सेवा उप-क्षेत्रों में बाजार पहुंच की प्रतिबद्धताओं की पेशकश की है, जो किसी भी खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देश द्वारा भारत को दी गई सबसे व्यापक सेवाओं की पेशकश है।

• इसके प्रमुख क्षेत्रों में आईटी और कंप्यूटर सेवाएं, व्यावसायिक सेवाएं, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, इंजीनियरिंग, वित्तीय सेवाएं, दूरसंचार, निर्माण, पर्यटन और अनुसंधान एवं विकास (R&D) सेवाएं शामिल हैं।

• किसी भी द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौते (FTA) में पहली बार, ओमान ने इंजीनियरों, डॉक्टरों, आईटी पेशेवरों, शिक्षकों, अकाउंटेंट्स और सलाहकारों जैसी पेशेवरों की श्रेणियों के लिए बाध्यकारी प्रतिबद्धताएं व्यक्त की गईं हैं।

4. व्यापार सुगमता और नियामक सहयोग

• ओमान भारत के निर्यात निरीक्षण परिषद (EIC) द्वारा जारी प्रमाणपत्रों को स्वीकार करेगा, जिससे ओमानी बंदरगाहों पर दोहरे परीक्षण और निरीक्षण में कमी आएगी।

• भारत की राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP) जैविक प्रमाणन और हलाल प्रमाणन प्रणालियों को ओमान द्वारा मान्यता प्रदान की गई है।

• स्वच्छता और पादप-स्वच्छता (SPS) तथा व्यापार में तकनीकी बाधाओं (TBT) पर समर्पित अध्याय गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने, पारदर्शिता में सुधार करने और नियामक सहयोग को सुदृढ़ करने का प्रयास करते हैं।

5. क्षेत्र-विशिष्ट निर्यात अवसर

• झींगा, मछली और कटलफिश सहित सभी समुद्री उत्पादों को अब तत्काल शुल्क-मुक्त पहुंच प्राप्त होगी, जिससे आंध्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडु और गुजरात जैसे प्रमुख निर्यातक राज्यों को लाभ होगा।

• रत्न एवं आभूषणों पर आयात शुल्क को समाप्त कर दिया गया है, जिससे भारतीय निर्यातकों को चीन, थाईलैंड, इटली और तुर्की जैसे देशों के आपूर्तिकर्ताओं पर एक प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्राप्त होगा।

6. निवेश, एमएसएमई (MSMEs) और रणनीतिक कनेक्टिविटी 

• यह व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता, निवेश सुगमीकरण के लिए एक संरचित ढांचा स्थापित करता है, जो नियामक निश्चितता को बढ़ाता है और निवेशकों के लिए व्यावसायिक वातावरण में सुधार करता है।

• इस समझौते से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs), स्टार्टअप्स, महिला उद्यमियों और सेवा प्रदाताओं को खाड़ी सहयोग परिषद की मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकृत करके उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ करने की उम्मीद है।

• सोहार, दुक्म और सालालाह में ओमान के लॉजिस्टिक्स हब भारतीय व्यवसायों को न केवल ओमान तक, बल्कि व्यापक खाड़ी सहयोग परिषद और पूर्वी अफ्रीकी बाजारों तक बेहतर पहुंच प्रदान करेंगे, जिससे दक्षिण एशिया, खाड़ी और पूर्वी अफ्रीका को जोड़ने वाले एक रणनीतिक आर्थिक गलियारे का निर्माण होगा।

समझौते का महत्व

• भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देना: टैरिफ लाइनों के एक बड़े हिस्से पर तत्काल शुल्क-मुक्त पहुंच मिलने से ओमानी बाजार में भारतीय उत्पादों की मूल्य प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होगा और प्रतिस्पर्धी निर्यातकों की तुलना में बढ़त प्राप्त होगी।

• भारत की खाड़ी पहुंच को बढ़ाना: ओमान फारस की खाड़ी के प्रवेश द्वार पर एक रणनीतिक स्थान पर स्थित है और व्यापक खाड़ी सहयोग परिषद (GCC), पश्चिमी एशियाई व पूर्वी अफ्रीकी बाजारों के लिए एक प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है। यह व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता इस क्षेत्र में भारत के आर्थिक प्रभाव को मजबूत करता है।

• ओमान की अर्थव्यवस्था के विविधीकरण का समर्थन करना: यह समझौता विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स, सेवाओं और निवेश सहयोग को बढ़ावा देकर हाइड्रोकार्बन (तेल और गैस) से इतर अपनी अर्थव्यवस्था का विविधीकरण करने के ओमान के प्रयासों का पूरक है।

• रणनीतिक साझेदारी को प्रगाढ़ करना: व्यापार से परे, यह व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता लॉजिस्टिक्स, कनेक्टिविटी, ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला और लोगों के बीच आपसी संपर्क जैसे क्षेत्रों में भारत-ओमान संबंधों को प्रगाढ़ करता है।

भारत–ओमान संबंध

राजनीतिक संबंध 

• भारत और ओमान के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक और घनिष्ठ संबंध हैं। दोनों देशों के बीच 1955 में औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे, जिन्हें वर्ष 2008 में ‘रणनीतिक साझेदारी’  के रूप में उन्नत किया गया।

• ओमान भारत की ‘पश्चिम एशिया नीति’ का एक प्रमुख स्तंभ है। इसके साथ ही वह खाड़ी सहयोग परिषद, अरब लीग और हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (IORA) जैसे क्षेत्रीय मंचों पर भारत का एक महत्वपूर्ण भागीदार है।

• भारत की G20 अध्यक्षता (2023) के दौरान ओमान को एक ‘अतिथि देश’ के रूप में आमंत्रित किया गया था, और उसने जी20 से संबंधित 150 से अधिक बैठकों में सक्रिय रूप से भाग लिया।

आर्थिक एवं व्यावसायिक संबंध

• ओमान खाड़ी क्षेत्र में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, जबकि भारत ओमान के प्रमुख व्यापार और निवेश भागीदारों में शामिल है।

• वित्तीय वर्ष 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार 10.61 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक जुड़ाव को दर्शाता है। 

• ओमान में 6,000 से अधिक भारत-ओमान संयुक्त उद्यम कार्यरत हैं, जिनमें कुल अनुमानित निवेश लगभग 7.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर है।

रक्षा सहयोग 

• ओमान को खाड़ी क्षेत्र में भारत का सबसे करीबी रक्षा भागीदार माना जाता है, और रक्षा सहयोग दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी का एक प्रमुख स्तंभ है।

• ओमान पहला खाड़ी देश है जिसके साथ भारतीय सशस्त्र बलों के तीनों अंग (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास आयोजित करते हैं।

• दोनों देश हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में समुद्री सुरक्षा पर निकटता से सहयोग करते हैं और नियमित सेवा-स्तरीय स्टाफ वार्ताओं को बनाए रखते हैं।

सांस्कृतिक सहयोग 

• भारत और ओमान के बीच 5,000 से अधिक वर्षों के लोगों के बीच आपसी संपर्क पर आधारित गहरे सभ्यतागत और सांस्कृतिक संबंध हैं।

• “मांडवी से मस्कट” व्याख्यान श्रृंखला जैसी सांस्कृतिक पहलों ने दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देने में मदद की है।

प्रवासी संबंध 

• खाड़ी क्षेत्रों में ओमान में सबसे बड़े भारतीय समुदायों में से एक है। यहाँ वर्ष 2025 तक लगभग 6.77 लाख भारतीय हैं।

• भारतीय प्रवासियों में डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, चार्टर्ड अकाउंटेंट, नर्स, प्रबंधक और उद्यमी जैसे पेशेवर शामिल हैं, जो ओमान की अर्थव्यवस्था और समाज में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

• ओमान में स्थित 22 भारतीय स्कूल 48,000 से अधिक छात्रों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।

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