संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-2: गरीबी और भूख से संबंधित विषय; केंद्र और राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति-संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं और इन योजनओं जा कार्य निष्पादन।
संदर्भ: हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रौद्योगिकी-संचालित सुधारों, बेहतर लॉजिस्टिक्स और उचित दर की दुकानों (FPSs) के लिए बेहतर सहायता के माध्यम से भारत की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को आधुनिक और सुदृढ़ बनाने के लिए ‘सार्थक-पीडीएस’ (SARTHAK-PDS) योजना को मंजूरी दी।
SARTHAK-PDS के बारे में
• SARTHAK-PDS (स्कीम फॉर असिस्टेंस इन राशन ट्रांसपोर्ट एंड हैंडलिंग–इनकम विद ऑटोमेशन इन पीडीएस) भारत की सार्वजनिक वितरण प्रणाली को आधुनिक बनाने और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 के कार्यान्वयन को गति देने के लिए स्वीकृत एक छत्र योजना है।
• इस योजना का कुल परिव्यय ₹25,530 करोड़ है और इसे 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक कार्यान्वित किया जाएगा। यह योजना खाद्य सुरक्षा, पारदर्शिता और अंतिम छोर तक वितरण दक्षता में सुधार के व्यापक उद्देश्य के अनुरूप है।
• इस योजना में वर्तमान में चल रही निम्नलिखित दो योजनाओं का विलय किया गया है:
- NFSA के तहत खाद्यान्नों के अंतरा-राज्य परिवहन और उचित दर की दुकान (FPS) के डीलरों के लाभांश के लिए राज्य एजेंसियों को सहायता, और
- सार्वजनिक वितरण प्रणाली में प्रौद्योगिकी के माध्यम से आधुनिकीकरण और सुधार की योजना—स्मार्ट पीडीएस (SMART PDS -स्कीम फॉर मॉडर्नाइजेशन एंड रिफॉर्म्स थ्रू टेक्नोलॉजी इन पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम)
• इसका उद्देश्य बेहतर रसद, स्वचालन (ऑटोमेशन) और डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से लगभग 80 करोड़ लाभार्थियों के लिए एक स्मार्ट, जवाबदेह, विश्वसनीय, पारदर्शी और प्रौद्योगिकी-संचालित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) इकोसिस्टम का निर्माण करना है।
• मुख्य विशेषताएँ:
- योजना के निम्न उद्देश्य है –
अंतरा-राज्य परिवहन, प्रचालन (हैंडलिंग) और उचित दर की दुकान (FPS) के डीलर के लाभांश के लिए सुनिश्चित वित्तीय सहायता, और
एक एकीकृत, नागरिक-केंद्रित, ख़ुफ़िया और अंतर-संचालनीय सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) संरचना, जो अंतिम छोर तक सेवा वितरण सुनिश्चित करती है, रिसाव (लीकेज) को न्यूनतम करती है तथा NFSA के तहत खाद्य सुरक्षा के प्रति राष्ट्र की प्रतिबद्धता को व्यक्त करती है।
- यह योजना लाभार्थी प्रबंधन, खाद्यान्न की ट्रैकिंग, मांग के पूर्वानुमान, मार्ग के अनुकूलन, शिकायत निवारण और पीडीएस नेटवर्क में रिसाव को कम करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग (ML), नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) और ब्लॉकचेन जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने पर बल देती है।
- यह खाद्यान्नों के परिवहन और वितरण की शुरू से अंत तक निगरानी के लिए एकीकृत डेटाबेस, राज्य कमान और नियंत्रण केंद्र, रियल टाइम विश्लेषण प्रणाली, जीपीएस-सक्षम वाहन ट्रैकिंग और अंतर-संचालनीय डिजिटल प्लेटफॉर्म को प्रस्तावित करती है।
योजना का महत्व
• खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा: इस योजना का उद्देश्य भारत की खाद्य सुरक्षा संरचना की दक्षता और विश्वसनीयता में सुधार करना है, जिससे लगभग 80 करोड़ NFSA लाभार्थियों को लाभ होगा।
• रिसाव और भ्रष्टाचार में कमी: प्रौद्योगिकी-सक्षम ट्रैकिंग, लाभार्थी सत्यापन और डिजिटल निगरानी से खाद्यान्नों के अन्यत्र विचलन को कम किया जा सकता है और पीडीएस (PDS) नेटवर्क में पारदर्शिता में सुधार लाया जा सकता है।
• अंतिम छोर तक वितरण में सुधार: उचित दर की दुकान (FPS) के डीलरों को अधिक सहायता और बेहतर रसद बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने से अंतिम छोर तक वितरण को बढ़ाया जा सकता है, विशेष रूप से ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों में।
• डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल प्रणालियों को अपनाना कल्याणकारी वितरण और सार्वजनिक सेवा दक्षता के लिए प्रौद्योगिकी-संचालित शासन के बढ़ते उपयोग को दर्शाता है।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के बार में
• सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) उचित दर की दुकानों के देशव्यापी नेटवर्क के माध्यम से पात्र परिवारों को रियायती खाद्यान्न और आवश्यक वस्तुओं के वितरण के लिए भारत का एक खाद्य सुरक्षा तंत्र है।
• सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का विकास द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान शुरू की गई ‘राशनिंग प्रणाली’ से हुआ और बाद में सुदूर, पहाड़ी, सूखा-प्रवण तथा जनजातीय क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा में सुधार के लिए वर्ष 1992 में इसका विस्तार संशोधित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (RPDS) के रूप में किया गया।
• वर्ष 1997 में, सरकार ने लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS) की शुरुआत की, जिसके तहत रियायती खाद्यान्नों के लक्षित वितरण के लिए लाभार्थियों को गरीबी रेखा से नीचे (BPL), गरीबी रेखा से ऊपर (APL) और अंत्योदय अन्न योजना (AAY) परिवारों जैसी श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया था।
• राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 के अधिनियमन ने भारत की लगभग दो-तिहाई जनसंख्या को कवर करके और लाभार्थियों की दो श्रेणियों को रियायती खाद्यान्न प्रदान करके खाद्य सुरक्षा को एक कानूनी अधिकार में परिवर्तित कर दिया:
- प्राथमिकता प्राप्त परिवार (PHH): रियायती दरों पर प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलोग्राम खाद्यान्न प्राप्त करने के हकदार हैं;
- अंत्योदय अन्न योजना (AAY) परिवार: इसके अंतर्गत सबसे गरीब और सर्वाधिक संवेदनशील परिवार शामिल हैं, जो प्रति परिवार प्रति माह 35 किलोग्राम खाद्यान्न प्राप्त करने के हकदार हैं।
• समय के साथ, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में महत्वपूर्ण डिजिटल सुधार किए गए हैं, जिनमें शामिल हैं: पहचान संख्या (ID) सत्यापन जोड़ना, राशन कार्डों का डिजिटलीकरण, इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ सेल (e-PoS) उपकरण, ऑनलाइन आपूर्ति-श्रृंखला प्रबंधन और खाद्य पात्रता की देशव्यापी सुवाह्यता के लिए ‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ (ONORC) प्रणाली।
• सरकार ने स्वचालन, रियल-टाइम निगरानी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एकीकृत डिजिटल गवर्नेंस प्रणालियों से जुड़े प्रौद्योगिकी-संचालित सुधारों के माध्यम से PDS को आधुनिक बनाने के लिए अप्रैल 2023 में स्मार्ट-पीडीएस (SMART-PDS) पहल की शुरुआत की।
