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सामान्य अध्ययन-2: महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, एजेंसियाँ और मंच – उनकी संरचना, अधिदेश।  

संदर्भ: हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) द्वारा जारी रिपोर्ट ‘रोजगार और सामाजिक रुझान: मई 2026 अपडेट’ में यह चेतावनी दी गई है कि मध्य पूर्व के वर्तमान संकट से वैश्विक आर्थिक विकास की गति धीमी हो सकती है और इसका श्रम बाजारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

अन्य संबंधित जानकारी

• यह रिपोर्ट व्यापक ‘ILO रोजगार और सामाजिक रुझान 2026 श्रृंखला’ के तहत एक अपडेट है, जो वैश्विक श्रम बाजार की स्थितियों और उभरते जोखिमों का आकलन करती है।

• अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया में दीर्घकालिक भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण बड़े पैमाने पर रोजगारों का नुकसान, श्रमिक आय में गिरावट, कार्यदशाओं का बदतर होना और प्रवासी श्रमिकों तथा प्रेषण-आश्रित अर्थव्यवस्थाओं के लिए सुभेद्यता बढ़ सकती है।

• यह रिपोर्ट विशेष रूप से तेल की बढ़ती कीमतों के वैश्विक स्तर पर पड़ने वाले अप्रत्यक्ष प्रभावों, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य जैसे पोत परिवहन मार्गों में व्यवधान, पर्यटन गतिविधियों में कमी, मुद्रास्फीति के दबाव और निवेश प्रवाह के कम होने को रेखांकित करती है।

रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष 

पश्चिम एशिया संकट से वैश्विक श्रम बाजार जोखिम:

• एक गंभीर स्थिति तहत, जहाँ तेल की कीमतें जनवरी-फरवरी 2026 के औसत से लगभग 50% अधिक बढ़ जाती हैं:

  • वैश्विक स्तर पर किए जाने वाले कार्य के घंटों में वर्ष 2026 में 0.5% और वर्ष 2027 में 1.1% की गिरावट आ सकती है, जो क्रमशः लगभग 14 मिलियन और 38 मिलियन पूर्णकालिक नौकरियों के बराबर है।
  • श्रमिकों की वास्तविक आय में वर्ष 2026 में 1.1% और वर्ष 2027 में 3% की कमी हो सकती है, जो क्रमशः लगभग 1.1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर और 3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की हानि को दर्शाती है।
  • वैश्विक बेरोजगारी दर में वर्ष 2026 में 0.1 प्रतिशत अंक और वर्ष 2027 में 0.5 प्रतिशत अंक की वृद्धि हो सकती है, जिसके परिणामस्वरूप वर्ष 2026 में लगभग 5 मिलियन और वर्ष 2027 में लगभग 20 मिलियन अतिरिक्त लोग बेरोजगार हो सकते हैं।

प्रवासी श्रमिक और प्रेषण अर्थव्यवस्थाएँ सर्वाधिक संवेदनशील हैं :

• अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुमानों के अनुसार, खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों में संकट की अवधि के दौरान स्थानीय नागरिकों के रोजगार में होने वाली प्रत्येक 1% की गिरावट की तुलना में, गैर-नागरिकों (प्रवासी श्रमिकों) के रोजगार में लगभग 4% की गिरावट आती है।

• इसलिए, प्रेषण-आश्रित विकासशील देशों को विदेशों में रोजगार के अवसरों में कमी और प्रेषण-प्रवाह के धीमा होने के कारण गंभीर आर्थिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है।

वैश्विक श्रम बाजारों में स्थायी संरचनात्मक कमजोरी :

• रिपोर्ट में कहा गया है कि अपेक्षाकृत स्थिर बेरोजगारी स्तरों के बावजूद, अत्यधिक अनौपचारिकता, बढ़ती असमानताओं, कमजोर उत्पादकता संवृद्धि, युवा बेरोजगारी और रोजगार की स्थिर गुणवत्ता के कारण वैश्विक श्रम बाजार संरचनात्मक रूप से संवेदनशील बने हुए हैं।

• वैश्विक स्तर पर लगभग 2.1 बिलियन (210 करोड़) श्रमिक अभी भी बिना किसी पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा या श्रम अधिकारों के अनौपचारिक रोजगार में संलग्न हैं।

शिष्ट कार्य और सामाजिक स्थायित्व के लिए जोखिम: 

• ILO ने चेतावनी दी है कि दीर्घकालिक भू-राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक झटके विशेष रूप से कम आय वाले और विकासशील देशों में गरीबी को बढ़ा सकते हैं, असमानताओं को गहरा कर सकते हैं तथा “शिष्ट कार्य घाटे” में वृद्धि कर सकते हैं।

भारत के लिए निहितार्थ 

• ऊर्जा और मुद्रास्फीति पर प्रभाव: कच्चे तेल के आयात पर भारत की अत्यधिक निर्भरता इसे वैश्विक ऊर्जा कीमतों में होने वाली वृद्धि के प्रति संवेदनशील बनाती है, जिससे मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ सकता है और श्रम-गहन क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं।

• विदेशी रोजगार और प्रेषण के लिए जोखिम: खाड़ी देशों में भारत के प्रवासी श्रमिकों की एक बड़ी संख्या है; क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं या श्रम की मांग में किसी भी प्रकार की मंदी रोजगार के अवसरों और प्रेषण-प्रवाह को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकती है।

• अनौपचारिक और संवेदनशील श्रमिकों पर दबाव: उच्च मुद्रास्फीति और आर्थिक अनिश्चितता भारत के विशाल अनौपचारिक कार्यबल को असमान रूप से प्रभावित कर सकती है, विशेष रूप से परिवहन, रसद, एमएसएमई (MSMEs) और निर्माण क्षेत्रों में संलग्न श्रमिकों को।

ILO द्वारा की गईं नीतिगत अनुशंसाएं

• सामाजिक सुरक्षा को बढ़ाना: सरकारों को संवेदनशील श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों, बेरोजगारी सहायता और श्रम संरक्षणों का विस्तार करना चाहिए।

• श्रम बाजार के लचीलेपन को बढ़ाना: बाहरी आर्थिक झटकों को सहन करने के लिए कौशल विकास, कार्यबल अनुकूलनशीलता और रोजगार विविधीकरण में अधिक निवेश की आवश्यकता है।

• प्रवासी श्रमिकों का संरक्षण: रिपोर्ट में प्रवासी श्रमिकों के लिए सशक्त सुरक्षा उपायों, निष्पक्ष भर्ती प्रणालियों और अंतर्राष्ट्रीय श्रम सहयोग पर बल दिया गया।

• समन्वित वैश्विक आर्थिक प्रतिक्रिया: अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन ने ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने, भू-राजनीतिक तनावों को कम करने और समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए समन्वित अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों का आह्वान किया।

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