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संदर्भ: हाल ही मे, केंद्र सरकार ने VB–G RAM G अधिनियम, 2025 के क्रियान्वयन को अधिसूचित किया है, जो 1 जुलाई 2026 से संपूर्ण देश में प्रभावी होगा। यह अधिनियम 20 वर्ष पुराने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) का स्थान लेगा।
VB–G RAM G अधिनियम, 2025 के बारे में

- विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) [VB–G RAM G] अधिनियम, 2025 एक नवीन वैधानिक ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका ढाँचा है, जिसे विकसित भारत @2047 की परिकल्पना के अनुरूप तैयार किया गया है।
- यह अधिनियम गारंटीकृत मजदूरी रोजगार को दीर्घकालिक ग्रामीण विकास, आजीविका सृजन, जलवायु तथा ग्राम-स्तरीय नियोजन के साथ एकीकृत करता है।
- यह 1 जुलाई 2026 से भारत के समस्त ग्रामीण क्षेत्रों में समान रूप से लागू किया जाएगा।
- अधिनियम चार प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है—
- जल सुरक्षा संबंधी कार्य (Water Security Works),
- मूल ग्रामीण अवसंरचना (Core Rural Infrastructure),
- आजीविका-संबंधी अवसंरचना (Livelihood-Related Infrastructure),
- चरम मौसम न्यूनीकरण कार्य (Extreme Weather Mitigation Works)।
- वित्तीय आवंटन: केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026–27 हेतु ₹95,692.31 करोड़ आवंटित किए हैं, जो किसी ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम के लिए अब तक का सर्वाधिक बजटीय प्रावधान है।
- व्यय साझेदारी प्रतिरूप
- पूर्वोत्तर एवं हिमालयी राज्यों हेतु — 90:10
- अन्य राज्यों तथा विधानमंडल वाले केंद्रशासित प्रदेशों हेतु — 60:40
- बिना विधानमंडल वाले केंद्रशासित प्रदेशों हेतु — 100% केंद्रीय वित्तपोषण।
- MGNREGA से संक्रमण: वर्तमान MGNREGA कार्य निर्बाध रूप से जारी रहेंगे तथा उन्हें नए ढाँचे में समाहित किया जाएगा।
- e-KYC सत्यापित वर्तमान जॉब कार्ड तब तक वैध रहेंगे, जब तक नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं किए जाते।
- लंबित e-KYC के आधार पर किसी भी श्रमिक को रोजगार से वंचित नहीं किया जा सकेगा।
अधिनियम की प्रमुख विशेषताएं
- संवर्धित रोजगार गारंटी: यह अधिनियम प्रति वित्तीय वर्ष में वैधानिक रोजगार गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन करता है।
- मांग के 15 दिनों के भीतर रोजगार प्रदान किया जाना चाहिए, ऐसा न होने पर श्रमिक बेरोजगारी भत्ते के हकदार होंगे।
- मजदूरी भुगतान और मुआवजा: मजदूरी का भुगतान बैंक या डाकघर खातों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से जारी रहेगा।
- भुगतान साप्ताहिक रूप से या मस्टर रोल बंद होने के 15 दिनों के भीतर किया जाना अनिवार्य है।
- यदि मजदूरी का भुगतान समय पर नहीं होता है, तो श्रमिक विलंब मुआवजे के पात्र होंगे।
- बेरोजगारी भत्ता: निर्धारित अवधि के भीतर रोजगार उपलब्ध न कराए जाने की स्थिति में:
- श्रमिकों को पहले 30 दिनों के लिए मजदूरी दर का कम से कम एक-चौथाई (1/4) हिस्सा मिलेगा।
- शेष अवधि के लिए मजदूरी दर का कम से कम आधा (1/2) हिस्सा दिया जाएगा।
- महिला-अनुकूल प्रावधान: कार्यस्थलों पर बच्चों की देखभाल की सहायता प्रदान की जाएगी।
- जहां भी पांच साल से कम उम्र के पांच या उससे अधिक बच्चे मौजूद होंगे, वहां बच्चों की देखभाल के लिए एक महिला कार्यकर्ता नियुक्त की जाएगी।
- कार्यस्थल और श्रम प्रावधान: अनिवार्य सुविधाओं में सुरक्षित पेयजल, छाया, विश्राम स्थल और प्राथमिक चिकित्सा शामिल हैं।
- ठेकेदारों का प्रवेश प्रतिबंधित है और जहां तक संभव हो, श्रम-विस्थापन करने वाली मशीनों का उपयोग नहीं किया जा सकता।
- यदि कार्य गांव से 5 किमी से अधिक दूरी पर प्रदान किया जाता है, तो श्रमिकों को 10% अतिरिक्त मजदूरी मुआवजा मिलेगा।
- उपस्थिति और पारदर्शिता: उपस्थिति को चेहरा-प्रमाणीकरण आधारित प्रणाली के माध्यम से दर्ज किया जाएगा, जिसमें कनेक्टिविटी या तकनीकी समस्याओं के लिए अपवाद तंत्र शामिल हैं।
- कार्यस्थलों पर कार्य विवरण और व्यय प्रदर्शित करने वाले “जनता बोर्ड” लगाए जाने अनिवार्य हैं।
- साप्ताहिक प्रकटीकरण बैठकें और सार्वजनिक डिजिटल पारदर्शिता प्रणालियाँ अनिवार्य की गई हैं।
- विकसित ग्राम पंचायत योजनाएं: अधिनियम के तहत सभी कार्य विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं (VGPPs) से उत्पन्न होने चाहिए, जो ग्राम सभाओं द्वारा अनुमोदित हों।
- VGPPs अभिसरण-आधारित स्थानीय विकास योजनाएं हैं, जो दीर्घकालिक ग्रामीण परिवर्तन लक्ष्यों के अनुरूप हैं।

