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सामान्य अध्ययन-2: संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढांचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियां, स्थानीय स्तर पर शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण और उसकी चुनौतियां।
संदर्भ: हाल ही में, पंचायती राज मंत्रालय ने ग्रामीण भारत में जमीनी स्तर पर शासन के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस (24 अप्रैल 2026) के अवसर पर पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) 2.0 रिपोर्ट जारी की।
अन्य संबंधित जानकारी:
- PAI 2.0 देश की 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों के लिए एक राष्ट्रव्यापी रिपोर्ट कार्ड के रूप में कार्य करता है। इसमें 97.30% (33 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की 2,59,867 पंचायतें) की उच्च भागीदारी दर देखी गई, जो संस्करण 1.0 के 80.79% की तुलना में महत्वपूर्ण सुधार है।
- मिश्रित स्कोर के आधार पर, 3,635 पंचायतों को ‘फ्रंट रनर’ (Front Runners) के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जबकि 1,18,824 (45.72%) पंचायतें ‘परफॉर्मर’ (Performer) श्रेणी के अंतर्गत आती हैं।
- यह रिपोर्ट ‘गरीबी मुक्त और आजीविका में वृद्धि’ तथा ‘स्वस्थ पंचायत’ जैसे विषयों में बेहतर परिणामों पर प्रकाश डालती है, जो ग्रामीण विकास संकेतकों में प्रगति को दर्शाते हैं।
- यह पहल ग्राम सभा के अनिवार्य सत्यापन और रियल टाइम निगरानी प्रणालियों के माध्यम से पारदर्शिता, जवाबदेही और डेटा-संचालित शासन को सुदृढ़ करती है।
पंचायत उन्नति सूचकांक(PAI) 2.0के बारे में
- पंचायती राज मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया पंचायत उन्नति सूचकांक, वस्तुनिष्ठ और सत्यापन योग्य संकेतकों का उपयोग करके ग्रामीण स्थानीय सरकारी संस्थानों (ग्राम पंचायतों (GPs)/पारंपरिक स्थानीय निकायों (TLBs)) की प्रगति को मापने वाला विश्व का पहला राष्ट्रव्यापी ढांचा है।
- यह सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण (LSDGs) के अनुरूप है, जो वैश्विक सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को स्थानीय स्तर पर प्रासंगिक शासन विषयों में परिवर्तित करता है।
- PAI 2.0 पंचायतों का मूल्यांकन 150 संकेतकों और 230 डेटा बिंदुओं का उपयोग करके करता है। संस्करण 1.0 के 516 संकेतकों और 794 डेटा बिंदुओं की तुलना में इनमें काफी कमी की गई है, ताकि बेहतर उपयोगिता और फोकस सुनिश्चित किया जा सके।
- यह ढांचा राष्ट्रीय संकेतक ढांचे (NIF) के अनुरूप है और इसमें बहु-स्तरीय डेटा संग्रह, संबंधित विभागों द्वारा सत्यापन तथा अनिवार्य ग्राम सभा सत्यापन पर आधारित 0-100 स्कोरिंग प्रणाली का उपयोग किया जाता है।
- PAI का व्यापक रूप से साक्ष्य-आधारित नियोजन, ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (GPDPs), संसाधन आवंटन और प्रोत्साहन के लिए उपयोग किया जाता है। साथ ही, इसे राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार और पंचायत शिक्षण केंद्र/बीकन पंचायत बनाने जैसी पहलों से जोड़ा गया है।
- नौ LSDG विषयों को कवर किया गया:

- प्रदर्शन श्रेणियाँ:

रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष
- कुल मिलाकर किसी भी पंचायत ने ‘अचीवर’ (Achiever – A+) श्रेणी प्राप्त नहीं की है, जो समग्र विकास के क्षेत्र में सुधार की गुंजाइश को दर्शाता है।
- 3,635 पंचायतें ‘फ्रंट रनर’ (Front Runners) हैं, जबकि अधिकांश पंचायतें, यानी 1,18,824 (45.72%), ‘परफ़ॉर्मर’ (Performer) श्रेणी में आती हैं, जो मध्यम लेकिन स्थिर प्रदर्शन को दर्शाती हैं।
- ‘एस्पिरेंट’ (Aspirant) श्रेणी में 1,23,719 पंचायतों की एक बड़ी संख्या है, जो विभिन्न क्षेत्रों में असमान विकास को प्रदर्शित करती है।
- 13,689 पंचायतें ‘बिगीनर’ (Beginner) श्रेणी के अंतर्गत आती हैं, जिन्हें लक्षित हस्तक्षेपों की आवश्यकता है।
- विषय-वार मुख्य बिंदु:
- ‘गरीबी-मुक्त और उन्नत आजीविका’ के तहत, 3,313 पंचायतों ने ‘A+’ श्रेणी प्राप्त की है, जो गरीबी उन्मूलन और आजीविका सृजन में सुदृढ़ प्रगति का संकेत है।
- ‘स्वस्थ पंचायत’ के तहत, 1,015 पंचायतों ने ‘A+’ ग्रेड सुरक्षित किया है, जो स्वास्थ्य सेवा, स्वच्छता और पोषण संबंधी जागरूकता में सुधार को दर्शाता है।
- सहभागिता और कवरेज:
- 33 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 97.30% सहभागिता (2,59,867 पंचायतें) दर्ज की गई।
- PAI 1.0 के सहभागिता स्तर की तुलना में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है।
- पश्चिम बंगाल ने PAI 2.0 में भाग नहीं लिया।
- दिल्ली और चंडीगढ़ को बाहर रखा गया है क्योंकि वहां ग्राम पंचायतें नहीं हैं।
- शासन पर प्रभाव:
- PAI स्कोर का उपयोग संसाधन आवंटन, नीति नियोजन और प्रोत्साहन के लिए तेजी से किया जा रहा है।
- उच्च प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को शिक्षण केंद्रों और मॉडल शासन इकाइयों के रूप में विकसित किया जा रहा है।
- यह सूचकांक भारत की सतत विकास लक्ष्य (SDG) 2030 प्रतिबद्धताओं के अनुरूप पारदर्शी, सहभागी और परिणाम-आधारित ग्रामीण शासन को बढ़ावा देता है।
Sources :
PIB
Static PIB
PAI
