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सामान्य अध्ययन-3:  बुनियादी ढाँचा: ऊर्जा।

संदर्भ: सरकार ने ‘एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) (विपणन का विनियमन) आदेश, 2001’ में एक संशोधन अधिसूचित किया है, ताकि ‘सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल’ (SAF) मिश्रित ATF को इसके नियामक दायरे में लाया जा सके।

अन्य संबंधित जानकारी

  • इस संशोधन ने ATF की परिभाषा का विस्तार किया है, जो पहले केवल भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के मानकों को पूरा करने वाले पेट्रोलियम-आधारित ईंधनों तक सीमित थी।
  • अब इसमें ‘सस्टेनेबल’ (स्थायी) या सिंथेटिक हाइड्रोकार्बन जैसे SAF के साथ मिश्रित ईंधन भी शामिल हैं।
  • यह विधिक स्पष्टता प्रदान करता है और तेल कंपनियों को मौजूदा नियामक ढांचे के भीतर SAF के सम्मिश्रण और आपूर्ति की अनुमति देता है। यह कदम भारत को ‘कोर्सिया’ (CORSIA) नामक वैश्विक कार्बन-कमी तंत्र के अनुरूप बनाता है, जो 2027 में अनिवार्य हो जाएगा।
  • यह कदम स्वच्छ ईंधन की ओर संक्रमण, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने और वैश्विक जलवायु प्रतिबद्धताओं के अनुपालन की भारत की व्यापक रणनीति के अनुरूप है।
  • यह विमानन क्षेत्र को ‘अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन’ (ICAO) के ढांचे के तहत आगामी अंतर्राष्ट्रीय उत्सर्जन नियमों के लिए भी तैयार करता है।

सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) के बारे में

  • सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) एक नवीकरणीय विमानन ईंधन है, जिसे कृषि अवशेष, अपशिष्ट तेल, नगर पालिकाओं के कचरे और गैर-खाद्य फसलों जैसे वैकल्पिक फीडस्टॉक (कच्चे माल) से बनाया जाता है।
  • इसमें विमानन-ग्रेड हाइड्रोकार्बन होते हैं जो रासायनिक रूप से पारंपरिक जेट ईंधन के समान होते हैं, जिससे मौजूदा विमान इंजनों और बुनियादी ढांचे (इनफ्रास्ट्रक्चर) के साथ इनकी अनुकूलता सुनिश्चित होती है।
  • इसका उत्पादन कई विधियों के माध्यम से किया जा सकता है, जिसमें ‘अल्कोहल-टू-जेट’ (ATJ) प्रक्रिया शामिल है, जहाँ इथेनॉल को पारंपरिक ATF के तुलनीय उच्च-ऊर्जा वाले जेट ईंधन में संसाधित किया जाता है।
  • SAF का ASTM मानकों के तहत कठोर प्रमाणन किया जाता है और यह ‘अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन’ (ICAO) द्वारा विमानन उपयोग के लिए अनुमोदित है।
  • वर्तमान में, SAF को पारंपरिक जेट ईंधन के साथ मिश्रित (आमतौर पर 50% तक) किया जा सकता है और विमान या बुनियादी ढांचे में बिना संसाधित किए उपयोग किया जा सकता है।

SAF के लाभ

  • डीकार्बोनाइजेशन क्षमता (कार्बन उत्सर्जन में कमी): अकेले SAF द्वारा वैश्विक विमानन क्षेत्र के डीकार्बोनाइजेशन प्रयासों में 60% से अधिक योगदान देने की अपेक्षा है, जो इसे विमानन उत्सर्जन को कम करने के लिए अल्पकालिक अवधि का सबसे महत्वपूर्ण समाधान बनाता है।
  • इंजन और बुनियादी ढांचे की अनुकूलता: पारंपरिक जेट ईंधन के साथ मिश्रित SAF का उपयोग मौजूदा विमान इंजनों और ईंधन बुनियादी ढांचे में किया जा सकता है, जिसके लिए किसी बड़े संशोधन की आवश्यकता नहीं होती है।
  • कम उत्सर्जन: पारंपरिक जेट ईंधन की तुलना में, 100% SAF ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को 80% तक कम कर सकता है, जो इसके फीडस्टॉक (कच्चे माल) और उत्पादन विधि पर निर्भर करता है।
  • परिचालन लचीलापन: SAF एक ड्रॉप-इनप्रतिस्थापन ईंधन के रूप में कार्य करता है और इसे विभिन्न तकनीकी विधियों का उपयोग करके फीडस्टॉक की एक विस्तृत श्रृंखला से उत्पादित किया जा सकता है।

SAF की चुनौतियाँ

  • उच्च उत्पादन लागत: वर्तमान में SAF की लागत पारंपरिक विमानन ईंधन की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक है, जो इसकी व्यावसायिक व्यवहार्यता को सीमित करती है।
  • विमानन कंपनियों का प्रतिरोध: परिचालन लागत में वृद्धि और लाभप्रदता में कमी की चिंताओं के कारण विमानन कंपनियाँ SAF को अपनाने में सावधानी बरत रही हैं।
  • घरेलू अधिदेशों में विलंब: भारत की योजना 2027 के बाद ही घरेलू उड़ानों के लिए SAF सम्मिश्रण को अनिवार्य बनाने की है, जिससे मांग सृजन और बड़े पैमाने पर इसे अपनाने की गति धीमी हो जाती है।
  • आपूर्ति और विस्तार की सीमाएं: टिकाऊ फीडस्टॉक (कच्चे माल) की सीमित उपलब्धता और अल्पविकसित उत्पादन बुनियादी ढांचा, बढ़ती विमानन मांग को पूरा करने के लिए SAF के विस्तार की क्षमता को प्रतिबंधित करते हैं।
  • इथेनॉल फीडस्टॉक की बाधा: इथेनॉल का उपयोग करके बड़े पैमाने पर SAF उत्पादन से गन्ने और अन्य फीडस्टॉक पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे इसकी संधारणीयता कृषि अवशेषों से प्राप्त दूसरी पीढ़ी (2G) के इथेनॉल के समय पर विस्तार पर निर्भर हो जाती है।

भारत का SAF सम्मिश्रण रोडमैप

  • भारत ने अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों के लिए सांकेतिक SAF सम्मिश्रण लक्ष्यों की घोषणा की है:
    • 2027 तक 1%
    • 2028 तक 2%
    • 2030 तक 5%
  • घरेलू उड़ानों के लिए अभी तक कोई अनिवार्य लक्ष्य निर्धारित नहीं किए गए हैं।
  • भारत का दृष्टिकोण निम्नलिखित पर केंद्रित है:
    • वैश्विक अधिदेशों के अनुरूप क्रमिक विस्तार।
    • घरेलू SAF उत्पादन को बढ़ावा देना।
    • विमानन ईंधन में इथेनॉल और सिंथेटिक हाइड्रोकार्बन का एकीकरण।
  • वैश्विक स्तर पर, देश इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं:
    • यूरोपीय संघ (EU): 2% (2025) → 70% (2050)
    • यूनाइटेड किंगडम (UK): 2030 तक 10%
    • जापान: 2030 तक 10%
    • सिंगापुर: 1% (2026) → 3–5% (2030)
  • वैश्विक स्तर पर, SAF का उपयोग पहले से ही 3,60,000 से अधिक उड़ानों में किया जा चुका है और इसे विमानन क्षेत्र के डीकार्बोनाइजेशन के लिए सबसे व्यवहार्य अल्पकालिक समाधान माना जाता है।
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