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सामान्य अध्ययन-3: बुनियादी ढाँचा: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे इत्यादि।

संदर्भ: परमाणु ऊर्जा नियामक परिषद (AERB) ने ‘माही बांसवाड़ा राजस्थान परमाणु ऊर्जा परियोजना’ की यूनिट 1 और 2 के लिए उत्खनन गतिविधियों को मंजूरी दे दी है। यह भारत के परमाणु विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति है।

माही बांसवाड़ा राजस्थान परमाणु ऊर्जा परियोजना के बारे में

  • इसे 25 सितंबर, 2025 को राजस्थान के बांसवाड़ा में लॉन्च किया गया था।
  • इस परियोजना का कार्यान्वयन अनुशक्ति विद्युत निगम लिमिटेड (ASHVINI) द्वारा किया जा रहा है, जो भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड (NPCIL) की एक सहायक कंपनी है और NTPC लिमिटेड के साथ एक संयुक्त उद्यम है।
  • यह देश की ऐसी पहली परमाणु ऊर्जा परियोजना है जिसे दो केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) के संयुक्त उद्यम द्वारा स्थापित किया जा रहा है।
  • इस परियोजना में 700 मेगावाट (MW) दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR) की चार इकाइयाँ शामिल हैं, जिन्हें NPCIL द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है।
  • इसे दो चरणों में ‘ट्विन-यूनिट’ (जुड़वां इकाई) के रूप में स्थापित किया जाना है: माही बांसवाड़ा 1 & 2 (2 × 700 MW) और माही बांसवाड़ा 3 & 4 (2 × 700 MW) जिनकी कुल लागत ₹42,000 करोड़ है।
  • इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत ₹42,000 करोड़ है।
  • प्रौद्योगिकी:
    • दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWRs) को भा स्वदेशी रूप से NPCIL द्वारा डिज़ाइन किया गया है।
    • ये रिएक्टर ईंधन के रूप में प्राकृतिक यूरेनियम का और शीतलक  तथा मंदक के रूप में भारी जल (ड्यूटेरियम ऑक्साइड D2O) का उपयोग करते हैं।
  • यह भारत के “फ्लीट मोड” (Fleet Mode) परमाणु कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य विभिन्न स्थलों पर 700 मेगावाट (MWe) के रिएक्टरों का निर्माण करना है। इसका मुख्य लक्ष्य लागत दक्षता, तीव्र परिनियोजन और परिचालन मानकीकरण सुनिश्चित करना है।
    • इस कार्यक्रम के तहत अन्य रिएक्टर कैगा (कर्नाटक), गोरखपुर (हरियाणा), चुटका (मध्य प्रदेश), काकरापार (गुजरात), राजस्थान  में नियोजित या परिचालन में हैं।

भारत की परमाणु ऊर्जा स्थिति

  • भारत में वर्तमान में 24 चालू परमाणु रिएक्टर हैं, जिनकी कुल स्थापित क्षमता 8,780 मेगावाट है।
    • इसके अतिरिक्त, 8 रिएक्टर निर्माणाधीन हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता 6,028 मेगावाट (MWe) है।
    • वर्तमान में 1 रिएक्टर बंद है, जिसकी क्षमता 135 मेगावाट है।
  • भारत की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता में परमाणु ऊर्जा का योगदान 1.7% है।
  • विकसित भारत 2047 विजन के अंतर्गत, भारत ने स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वर्ष 2047 तक कम से कम 100 गीगावाट (GWe) परमाणु क्षमता प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है।

परमाणु लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु सरकार की पहल

  • दीर्घकालिक विजन (2025): वर्ष 2025 में, निर्मला सीतारमण ने घोषणा की थी कि भारत के ऊर्जा संक्रमण के लिए वर्ष 2047 तक कम से कम 100 गीगावाट परमाणु क्षमता अनिवार्य है, जो ‘विकसित भारत 2047’ और ‘नेट-ज़ीरो 2070’  के लक्ष्यों के अनुरूप है।
    • इस लक्ष्य को प्राप्त करने और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने हेतु भारत ‘दाबित भारी जल रिएक्टरों’ (PHWRs) के साथ-साथ अब ‘हल्के जल रिएक्टरों’ (LWRs) की ओर भी रुख कर रहा है।
  • भारत छोटे रिएक्टर्स (BSRs): केंद्रीय बजट 2024-25 में, सरकार ने स्वदेशी 220 मेगावाट PHWR तकनीक पर आधारित ‘भारत स्मॉल रिएक्टर्स’ का प्रस्ताव रखा, जो तकनीकी निरंतरता सुनिश्चित करने और घरेलू क्षमताओं को सुदृढ़ करने पर केंद्रित है।
  • परमाणु ऊर्जा मिशन (2025): फरवरी 2025 में, ‘विकसित भारत के लिए परमाणु ऊर्जा मिशन’ की घोषणा की गई, जिसका लक्ष्य संघीय वित्त पोषण और विधायी समर्थन के माध्यम से वर्ष 2033 तक कम से कम पांच स्वदेशी ‘स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स’ (SMRs) विकसित करना है।
  • स्वदेशी SMR प्रौद्योगिकियों का विकास: अगस्त 2025 में, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) ने 200 मेगावाट के ‘भारत SMR’, 50 मेगावाट के SMR और हाइड्रोजन तथा औद्योगिक उपयोग के लिए 5 मेगावाट (MWt) के ‘उच्च-तापमान गैस-कूल्ड विकसित करने की घोषणा की।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग (2025): फरवरी 2025 में, भारत और फ्रांस ने उन्नत और SMR तकनीकों पर एक आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए, जबकि भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने असैन्य परमाणु समझौते को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की, जिसमें भारत में अमेरिकी निर्मित रिएक्टरों की योजनाएं भी शामिल हैं।
  • विधायी रूपांतरण – शांति (SHANTI) विधेयक (2025): दिसंबर 2025 में, संसद ने शांति विधेयक पारित किया, जिसने परमाणु विस्तार को सुगम बनाने के लिए एक एकल व्यापक ढांचे के साथ ‘परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962’ और ‘परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010’ को प्रतिस्थापित कर दिया है।

Sources:
Economic Times
Economic Times
World Nuclear
PIB

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