संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।
संदर्भ: हाल ही में, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री ने घोषणा की कि ‘प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ ने दो नए चूजों के जन्म के साथ बंदी प्रजनन (captive breeding) के अपने चौथे वर्ष में प्रवेश कर लिया है, जिससे अब बंदी अवस्था में पक्षियों की कुल संख्या बढ़कर 70 हो गई है।

अन्य संबंधित जानकारी
• दोनों चूजों का जन्म राजस्थान में स्थित संरक्षण प्रजनन केंद्र में हुआ है, जो इस प्रजाति के पुनरुद्धार के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है।
• इन दो चूजों में से एक का जन्म प्राकृतिक प्रजनन के माध्यम से हुआ और दूसरे का कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से, जो सहायक प्रजनन तकनीकों की सफलता को दर्शाता है।
• यह ग्रेट इंडियन बस्टर्ड परियोजना के तहत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिसका उद्देश्य इस गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजाति का पुनर्वास करना है।
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) परियोजना के बारे में
• यह 5 जून 2013 को राजस्थान सरकार द्वारा शुरू किया गया एक महत्वाकांक्षी संरक्षण कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य गंभीर रूप से लुप्तप्राय ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ (Ardeotis nigriceps) का संरक्षण करना है। इसे स्थानीय रूप से ‘गोडावण’ के नाम से जाना जाता है।
• यह परियोजना उपेक्षित प्रजातियों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और यह विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ग्रेट इंडियन बस्टर्ड राजस्थान का राज्य पक्षी है।
• प्रारंभ में, इस परियोजना को डेजर्ट नेशनल पार्क (DNP), जैसलमेर में लागू किया गया था।
• GIB परियोजना के उद्देश्य:
- ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की आबादी का संरक्षण और पुनरुद्धार।
- इसके आवास का संरक्षण और बहाली।
- अवैध शिकार और आवास क्षरण जैसे खतरों को कम करना।
- सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता सृजन।
• आबादी में गिरावट की प्रवृत्ति: ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की आबादी में कुछ दशकों पहले रहे 1,000 से अधिक पक्षियों की तुलना में तीव्र गिरावट आई है; जो घटकर 745 (1978), 600 (2001), 300 (2008), और 2013 में लगभग 125 रह गई थी।
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के बारे में
• वैज्ञानिक नाम: Ardeotis nigriceps.
• इन्हें ‘गोडावण’ के नाम से भी जाना जाता है। यह राजस्थान का राज्य पक्षी है।
• यह भारत की स्थानिक प्रजातियों में से उड़ने वाले सबसे बड़े पक्षियों में से एक है।
• यह विश्व के सबसे भारी उड़ने वाले पक्षियों की श्रेणी में आता है।
• भारत में पाई जाने वाली बस्टर्ड की 4 प्रजातियों में से ग्रेट इंडियन बस्टर्ड सबसे बड़ी प्रजाति है।
- (अन्य तीन प्रजातियाँ हैं: मैक्वीन बस्टर्ड, लेसर फ्लोरिकन और बंगाल फ्लोरिकन)।
• आवास : खुली घासभूमि और अर्ध-शुष्क क्षेत्र
- स्थलीय पक्षी होने के कारण, वे अपना अधिकांश समय ज़मीन पर ही बिताते हैं, और अपने आवास के विभिन्न हिस्सों के बीच आने-जाने के लिए केवल कभी-कभी ही उड़ान भरते हैं।
• सर्वाहारी आहार: कीट-पतंगे, छिपकलियाँ, घास के बीज आदि।
• स्थिति:
- वर्तमान अनुमानित आबादी 150 से कम है।
- मुख्य रूप से राजस्थान (भारत की कुल आबादी का 85%) और गुजरात में पाए जाते हैं, साथ ही महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में भी इनकी कुछ आबादी मौजूद है।
• खतरे:
- कमज़ोर दृष्टि के कारण बिजली की लाइनों से टकराने से लगने वाली चोट और मृत्यु।
- शिकार, अंडों का शिकार, परभक्षण और आवास का विनाश।
• संरक्षण स्थिति:
- IUCN रेड लिस्ट स्थिति: गंभीर रूप से लुप्तप्राय
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: अनुसूची-I
- वन्यजीवों की प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर अभिसमय (CMS): परिशिष्ट-I
- वन्यजीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर अभिसमय (CITES): परिशिष्ट-I
GIB के लिए प्रमुख संरक्षण पहल
• राष्ट्रीय बस्टर्ड बहाली कार्यक्रम (2013–16; द्वितीय चरण: 2024–33): यह पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) तथा भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) की एक दीर्घकालिक पहल है। यह आवास बहाली और संरक्षण प्रजनन पर केंद्रित है ताकि इस गंभीर रूप से लुप्तप्राय पक्षी की एक व्यवहार्य आधारभूत आबादी तैयार की जा सके। वर्ष 2024-33 के लिए इस परियोजना हेतु ₹56 करोड़ का परिव्यय निर्धारित किया गया है।
• CAMPA-वित्तपोषित संरक्षण कार्य योजना (2024): प्रतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (CAMPA) ने ग्रेट इंडियन बस्टर्ड और लेसर फ्लोरिकन के लिए ₹77.05 करोड़ की पांच वर्षीय संरक्षण कार्य योजना को मंजूरी दी है, जो एकीकृत संरक्षण उपायों पर केंद्रित है।
• एकीकृत GIB संरक्षण कार्यक्रम (2016): यह CAMPA द्वारा समर्थित ₹33.85 करोड़ का कार्यक्रम है, जिसका शीर्षक ” ग्रेट इंडियन बस्टर्ड का आवास सुधार और संरक्षण प्रजनन” है। इसके तहत राजस्थान में प्रजनन केंद्र (सैम और रामदेवरा) स्थापित किए गए, बंदी प्रजनन की शुरुआत की गई और पारिस्थितिक अनुसंधान तथा आवास प्रबंधन को बढ़ावा दिया गया।
• ग्रेट इंडियन बस्टर्ड और लेसर फ्लोरिकन हेतु संरक्षण कार्ययोजना: यह एक व्यापक रणनीति है जो स्व-स्थाने और पर-स्थाने संरक्षण को जोड़ती है। इसमें सर्वेक्षण, कृत्रिम गर्भाधान, टेलीमेट्री ट्रैकिंग (रेडियो टैगिंग), आवास सुधार, परभक्षी नियंत्रण और सामुदायिक भागीदारी शामिल हैं।
• ग्रेट इंडियन बस्टर्ड संरक्षण पर भारत-यूएई सहयोग: भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) और इंटरनेशनल फंड फॉर हौबारा कंजर्वेशन (UAE) के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसका उद्देश्य ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के सहयोगात्मक अनुसंधान और संरक्षण को बढ़ावा देना है।
• प्रोजेक्ट गोडावण (2013, राजस्थान सरकार): डेजर्ट नेशनल पार्क, जैसलमेर में शुरू किया गया एक राज्य-स्तरीय संरक्षण कार्यक्रम है। यह शेष बची ग्रेट इंडियन बस्टर्ड आबादी की सुरक्षा के लिए आवास प्रबंधन, परभक्षी नियंत्रण और बंदी प्रजनन पर केंद्रित है।
