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सामान्य अध्ययन-2: संसद और राज्य विधायिका—संरचना, कार्यप्रणाली, कार्य संचालन; विभिन्न संवैधानिक पदों पर नियुक्ति, विभिन्न संवैधानिक निकायों की शक्तियाँ, कार्य और दायित्व।
संदर्भ: निर्वाचन प्रक्रियाओं के संचालन में पक्षपात के आरोपों के बाद, विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन के नेता मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने पर विचार कर रहे हैं।
अन्य संबंधित जानकारी
- यह कदम पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े विवाद के बाद उठाया गया है। विपक्षी दलों का दावा है कि इसके कारण बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए।
- पश्चिम बंगाल की मतदाता सूचियों का ‘SIR’, जिसे 28 फरवरी, 2026 को अंतिम रूप दिया गया था, के परिणामस्वरूप लगभग 63 लाख नामों (मृत्यु, दोहराव, या स्थानांतरण के कारण) को हटा दिया गया, जबकि लगभग 60 लाख नामों की अभी भी समीक्षा की जा रही हैं।
- मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर “पक्षपातपूर्ण आचरण” और कुछ विशिष्ट क्षेत्रों या मतदाताओं को असमान रूप से लक्षित करने के आरोप लगाए गए हैं।
- इस प्रस्ताव ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की स्वतंत्रता और जवाबदेही को नियंत्रित करने वाले संवैधानिक सुरक्षा उपायों पर बहस को पुनः सक्रिय कर दिया है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) के पद के बारे में
- मुख्य निर्वाचन आयुक्त भारत निर्वाचन आयोग का प्रमुख होता है, जो भारत में चुनाव संपन्न कराने के लिए उत्तरदायी एक संवैधानिक निकाय है।
- निर्वाचन आयोग की स्थापना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत की गई थी, जो आयोग को निर्वाचनों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति प्रदान करता है।
- आयोग लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और भारत के राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति के पदों के लिए चुनाव आयोजित करता है।
- वर्तमान में, निर्वाचन आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय के रूप में कार्य करता है, जिसमें एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दो निर्वाचन आयुक्त होते हैं।
- मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों का कार्यकाल मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यावधि) अधिनियम, 2023 द्वारा शासित होता है।
- CEC और अन्य EC पद ग्रहण करने की तिथि से छह वर्ष की अवधि तक या 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक (जो भी पहले हो) पद पर बने रहते हैं।
- वे पुनर्नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होते हैं।
नियुक्ति प्रक्रिया:
- CEC और EC की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक तीन-सदस्यीय प्रवर समिति की सिफारिश पर की जाती है।
- प्रवर समिति में निम्नलिखित सदस्य शामिल होते हैं:
- अध्यक्ष: प्रधानमंत्री।
- सदस्य: लोकसभा में विपक्ष का नेता (या सबसे बड़े विपक्षी दल का नेता)।
- सदस्य: प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री।
- लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए इस पद को कार्यकारी हस्तक्षेप से बचाने हेतु सशक्त संवैधानिक सुरक्षा उपाय प्रदान किए गए हैं।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) को पद से हटाने की प्रक्रिया
- CEC को पद से हटाने की प्रक्रिया मुख्य रूप से भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324(5) द्वारा शासित होती है। इसके अनुसार, CEC को केवल उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जैसे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है। यह प्रावधान निर्वाचन प्राधिकरण की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए सुदृढ़ सुरक्षा प्रदान करता है।
- कानूनी ढांचा
- मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यावधि) अधिनियम, 2023 की धारा 11 इस बात की पुष्टि करती है कि CEC को हटाने की प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों पर लागू होने वाली प्रक्रिया के समान होगी।
- यह प्रक्रिया न्यायाधीश जांच अधिनियम, 1968 से भी संबद्ध है जो जाँच प्रक्रिया को विनियमित करता है।
पद से हटाने के लिए संसदीय प्रक्रिया
- प्रस्ताव की सूचना:
- पद से हटाने का प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) में पेश किया जा सकता है।
- इसे लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों या राज्यसभा में 50 सांसदों का समर्थन प्राप्त होना चाहिए।
- पीठासीन अधिकारी द्वारा मंजूरी: लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति यह तय करते हैं कि प्रस्ताव को स्वीकार करना है या खारिज करना है।
- जांच समिति: प्रस्ताव स्वीकार होने पर, एक तीन-सदस्यीय समिति (जिसमें आमतौर पर सर्वोच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश, एक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और एक प्रतिष्ठित विधिवेत्ता शामिल होते हैं) आरोपों की जांच करती है।
- संसदीय मतदान:
- यदि समिति ‘सिद्ध कदाचार’ या ‘अक्षमता’ पाती है, तो प्रस्ताव पर मतदान किया जाता है।
- इसे संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत (कुल सदस्यता का बहुमत और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत) से पारित होना अनिवार्य है।
- अंतिम आदेश: दोनों सदनों द्वारा प्रस्ताव पारित होने के बाद, भारत के राष्ट्रपति CEC को हटाने का अंतिम आदेश जारी करते हैं।
- पूर्व दृष्टांत:आज तक किसी भी मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उनके पद से हटाया नहीं गया है।
- यद्यपि आज तक किसी भी मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से नहीं हटाया गया है, परंतु निर्वाचन आयुक्त (EC) को हटाने के संबंध में विवाद उत्पन्न हो चुका है।
- वर्ष 2009 में, तत्कालीन मुख्य निर्वाचन आयुक्त एन. गोपालस्वामी ने कथित पक्षपातपूर्ण आचरण के आधार पर निर्वाचन आयुक्त नवीन चावला को हटाने की सिफारिश की थी।
- हालाँकि, भारत सरकार ने इस सिफारिश को अस्वीकार कर दिया था। इसके पश्चात, संबंधित निर्वाचन आयुक्त अपने पद पर बने रहे और बाद में वे मुख्य निर्वाचन आयुक्त भी बने।
