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सामान्य अध्ययन-2: भारत से संबंधित या भारत के हितों को प्रभावित करने वाले द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह एवं समझौते।सामान्य अध्ययन-3: प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण तथा नई प्रौद्योगिकियों का विकास; IT, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स आदि क्षेत्रों में जागरूकता।

संदर्भ: भारत AI इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान, भारत औपचारिक रूप से अमेरिका के नेतृत्व वाली ‘पैक्स सिलिका’ पहल में शामिल हो गया है। यह इलेक्ट्रॉनिक्स और महत्वपूर्ण खनिजों के लिए साझा आपूर्ति शृंखला निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।   

अन्य संबंधित जानकारी

  • भारत का इस पहल में प्रवेश 2026 की शुरुआत में दिए गए निमंत्रण के बाद हुआ है। यह वाशिंगटन में आयोजित प्रथम पैक्स सिलिका शिखर सम्मेलन (दिसंबर 2025) के लगभग दो महीने बाद हुआ है।
  • यह कदम भारत और अमेरिका के बीच व्यापक व्यापारिक पुनर्स्थापना के बीच उठाया गया है, जिसमें टैरिफ में कटौती, एक प्रस्तावित व्यापार ढाँचा और AI, सेमीकंडक्टर तथा महत्वपूर्ण खनिजों में गहराता सहयोग शामिल है।
  • इस समझौते पर हस्ताक्षर भारत में बड़े AI-इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रतिबद्धताओं के साथ मेल खाते हैं। इसमें डेटा सेंटर, क्लाउड और सबसी कनेक्टिविटी (समुद्र के नीचे कनेक्टिविटी) में माइक्रोसॉफ्ट और गूगल द्वारा घोषित अरबों डॉलर का निवेश शामिल है, जो पैक्स सिलिका के लक्ष्यों को पूरक बनाता है।

पैक्स सिलिका

  • ‘पैक्स सिलिका’ (लैटिन शब्द Pax, जिसका अर्थ शांति है, और Silica, जो सेमीकंडक्टर के खनिज आधार को संदर्भित करता है) विश्वसनीय राष्ट्रों का अमेरिका के नेतृत्व वाला एक रणनीतिक गठबंधन है।
  • इसका उद्देश्य संपूर्ण “सिलिकॉन स्टैक” (यानी महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा से लेकर सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन, AI कंप्यूट, डेटा सेंटर, कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स तक) में विश्वसनीय और लचीली आपूर्ति शृंखला बनाना है।
  • भारत इसमें दसवें सदस्य के रूप में शामिल हुआ है। इसके अन्य सदस्यों में ऑस्ट्रेलिया, इज़राइल, जापान, कतर, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं।
  • इसके उद्देश्यों में शामिल हैं:
    • महत्वपूर्ण खनिजों और उन्नत विनिर्माण में केंद्रित आपूर्तिकर्ताओं (विशेष रूप से चीन) पर “दबावपूर्ण निर्भरता” को कम करना।
    • खनिजों, फैब्स, AI इन्फ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षित कनेक्टिविटी में सह-निवेश और संयुक्त उद्यम स्थापित करना।
    • संवेदनशील तकनीकों और महत्वपूर्ण अवसंरचना को विदेशी नियंत्रण से सुरक्षित रखना तथा AI अर्थव्यवस्था के लिए साझा नियम विकसित करना।
  • इस पहल को व्यापक रूप से रेयर अर्थ प्रसंस्करण और महत्वपूर्ण तकनीकी आपूर्ति शृंखलाओं, विशेष रूप से सेमीकंडक्टर और AI इकोसिस्टम में चीन के प्रभुत्व के रणनीतिक जवाब के रूप में देखा जा रहा है।

पैक्स सिलिका का महत्व

  • आपूर्ति शृंखला की मजबूती: वाशिंगटन द्वारा इसे AI युग के लिए एक प्रमुख आर्थिक-सुरक्षा प्रयास के रूप में तैयार किया गया है, जो “विश्वसनीय” लोकतंत्रों के नेटवर्क के इर्द-गिर्द 21वीं सदी की तकनीकी व्यवस्था को आकार देना चाहता है।
  • अत्यधिक निर्भरता में कमी: इस पहल का उद्देश्य उन क्षेत्रों में प्रभुत्व को कम करना है जहाँ चीन ने अपनी स्थिति का लाभ उठाया है, विशेष रूप से परिष्कृत रेयर अर्थ के क्षेत्र में।
  • आर्थिक और नवाचार लाभ: पूंजी, प्रौद्योगिकी और बाजारों को साझा करके, पैक्स सिलिका का लक्ष्य बड़े पैमाने पर AI तैनाती को बनाए रखना, हरित और डिजिटल संक्रमण का समर्थन करना और सदस्य अर्थव्यवस्थाओं में उच्च-मूल्य वाली औद्योगिक रोजगार उत्पन्न करना है।

भारत के लिए महत्व

  • उन्नत आपूर्ति शृंखलाओं में एकीकरण: यह पहल भारत को खनिजों, सेमीकंडक्टर और AI बुनियादी ढांचे को शामिल करने वाले एक विश्वसनीय नेटवर्क के भीतर स्थापित करती है।

विश्वसनीय AI और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तक पहुंच: चूंकि भारत में वर्तमान में वैश्विक स्तर के AI और सेमीकंडक्टर बुनियादी ढांचे की कमी है और वह चिप्स तथा परिष्कृत महत्वपूर्ण खनिजों के लिए भारी आयात पर निर्भर है, इसलिए पैक्स सिलिका उन्नत फैब्स, डिजाइन इकोसिस्टम और AI कंप्यूट क्षमता से जुड़ने का मार्ग प्रदान करता है।

  • यह भागीदारी भारत के ‘सेमीकंडक्टर मिशन’ और ‘राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन’ का भी समर्थन करती है।
  • “चीन+1” रणनीति का समर्थन: जैसे-जैसे अमेरिकी और यूरोपीय फर्में ‘चीन+1’ विविधीकरण की राह पर चल रही हैं, इस गठबंधन में भारत की उपस्थिति इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली से लेकर डेटा-सेंटर हब तक, आपूर्ति शृंखलाओं का एक प्रमुख केंद्र बनने के इसके दावे को मजबूत करती है।
  • घरेलू औद्योगिक और प्रतिभा विकास: विशाल STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) कार्यबल और विस्तार करते स्टार्टअप आधार के साथ, भारत खुद को गठबंधन के भीतर डिजाइन, सॉफ्टवेयर और सेवाओं के पावरहाउस के रूप में पेश कर सकता है।

अन्य समान पहलें

  • इंडो-पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क (IPEF): यह अमेरिका के नेतृत्व में है और भारत भी इसका सदस्य है। यह लचीली आपूर्ति शृंखला और स्वच्छ अर्थव्यवस्था पर केंद्रित है।
  • मिनरल्स सिक्योरिटी पार्टनरशिप (MSP): भारत 2023 में इसमें शामिल हुआ था। यह लिथियम, कोबाल्ट और अन्य रेयर अर्थ जैसे महत्वपूर्ण खनिजों पर ध्यान केंद्रित करता है।
  • क्वाड का महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकी कार्य समूह: यह विश्वसनीय लोकतंत्रों के बीच रणनीतिक तकनीकी समन्वय पर केंद्रित है।

Source:
Pib
Thehindu
Deccanherald
Indianexpress

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