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सामान्य अध्ययन-3: बुनियादी ढाँचा: ऊर्जा; पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण।
संदर्भ: SFC-TERI की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, यदि नियंत्रित न किया गया तो 2047 तक भारत के माल ढुलाई क्षेत्र से होने वाले कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग 400% की वृद्धि हो सकती है। यह रिपोर्ट संस्थागत उत्सर्जन लेखांकन और नीतिगत एकीकरण की तत्काल आवश्यकता पर बल देती है।
अन्य संबंधित जानकारी:
- ‘स्मार्ट फ्रेट सेंटर (SFC) इंडिया’ ने ‘द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TERI)’ और IIM-बैंगलोर के सहयोग से “भारत में माल ढुलाई उत्सर्जन लेखांकन का संस्थागतकरण: स्वच्छ माल ढुलाई कार्यक्रमों और नीति एकीकरण हेतु मार्ग” शीर्षक से एक श्वेतपत्र जारी किया है।
- रिपोर्ट में तर्क दिया गया है कि भारत का वर्तमान माल ढुलाई उत्सर्जन मापन खंडित और गैर-मानकीकृत है, जो कॉर्पोरेट प्रकटीकरण और नीति निर्माण दोनों को प्रभावित करता है।
- यह डीकार्बोनाइजेशन के आधार के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर सामंजस्यपूर्ण लेखा ढाँचे का आह्वान करता है।
- यह मुद्दा भारत की सतत लॉजिस्टिक्स रूपांतरण और 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन की व्यापक प्रतिबद्धताओं से संबंधित है।
रिपोर्ट की मुख्य विशेषताएं
- उत्सर्जन में अनुमानित उछाल: बिनाहस्तक्षेप के माल ढुलाई से संबंधित CO₂ उत्सर्जन 2047 तक चार गुना बढ़ सकता है। इसका मुख्य कारण माल ढुलाई की बढ़ती मात्रा, डीजल-आधारित सड़क परिवहन पर निरंतर निर्भरता और अक्षम लॉजिस्टिक्स प्रणाली है।
- मापन अंतराल: श्वेतपत्र में मापन अंतराल को डीकार्बोनाइजेशन में मुख्य बाधा माना गया है, क्योंकि कंपनियाँ अलग-अलग तरीकों और उत्सर्जन कारकों का उपयोग करती हैं, जिससे डेटा की तुलना करना कठिन हो जाता है।
- संस्थागत उत्सर्जन लेखांकन की आवश्यकता
- यह ISO 14083 वैश्विक मापन मानक और ‘ग्लोबल लॉजिस्टिक्स एमिशन काउंसिल’ (GLEC) ढांचे के अनुरूप एक राष्ट्रीय लेखा ढांचे का प्रस्ताव करता है।
- यह भारत-विशिष्ट उत्सर्जन कारकों (इलेक्ट्रिक वाहनों सहित) और एक डिजिटल निगरानी, रिपोर्टिंग और सत्यापन (MRV) प्रणाली के विकास पर जोर देता है।
- संस्थागत और नीतिगत एकीकरण: रिपोर्ट उत्सर्जन लेखांकन को राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति, पीएम गति शक्ति अवसंरचना पहल और कार्बन-बाजार रणनीतियों के अंतर्गत समाहित करने पर बल देती है।
- कार्यान्वयन की चुनौतियाँ:
- माल ढुलाई इकोस्य्स्तेम अत्यधिक खंडित है, जिसमें लघु और मध्यम बेड़ा ऑपरेटरों का वर्चस्व है जिनकी डिजिटल क्षमता सीमित होती है। इस कारण डेटा का संग्रह और मानकीकरण कठिन हो जाता है।
- इसलिए, यह श्वेतपत्र छोटे खिलाड़ियों पर अत्यधिक बोझ डाले बिना जवाबदेही में सुधार करने के लिए क्षमता निर्माण, चरणबद्ध कार्यान्वयन, डिजिटल एकीकरण और अंतर-मंत्रालयी समन्वय की सिफारिश करता है।
रिपोर्ट का महत्व
- डीकार्बोनाइजेशन का आधार: यह रिपोर्ट उत्सर्जन लेखांकन को केवल एक रिपोर्टिंग आवश्यकता के बजाय ‘जलवायु कार्रवाई हेतु अवसंरचना’ के रूप में पुनर्गठित करती है, जो प्रदर्शन बेंचमार्किंग, लक्षित नीतियों और स्वच्छ माल ढुलाई कार्यक्रमों में सहायता करती है।
- नेट जीरो में सहायक: भारत के 2070 के शुद्ध-शून्य (Net Zero) लक्ष्य और सदी के मध्य तक माल ढुलाई की मांग के तीन गुना होने के अनुमान को देखते हुए, इस मापन संरचना का वर्तमान में निर्माण करना उच्च-कार्बन लॉजिस्टिक्स प्रणालियों के चक्र में फंसने से बचने के लिए आवश्यक माना गया है।
- वैश्विक मानकों के साथ संरेखण: ISO 14083 और GLEC के साथ संरेखित होकर, इस ढांचे को भारतीय लॉजिस्टिक्स (रसद) को वैश्विक स्वच्छ माल ढुलाई कार्यक्रमों के अनुकूल बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो वैश्विक स्तर पर कार्बन-प्रकटीकरण मानकों के सख्त होने के साथ-साथ भारतीय निर्यातकों की स्थिति को सुदृढ़ करता है।
- लॉजिस्टिक्स प्रतिस्पर्धात्मकता: लॉजिस्टिक्स योजना में उत्सर्जन मेट्रिक्स को एकीकृत करने से दक्षता में सुधार हो सकता है—जैसे कि अनुकूलित रूटिंग, उच्च भार कारक और परिवहन साधनों का विविधीकरण—जो लागत और उत्सर्जन दोनों को कम करते हैं।
- वायु गुणवत्ता और सार्वजनिक स्वास्थ्य: माल ढुलाई उत्सर्जन कम करने से स्थानीय वायु प्रदूषकों में कमी आएगी, जिससे शहरी वायु गुणवत्ता में सुधार और स्वास्थ्य पर बोझ में कमी आएगी।
SOURCES
Down To Earth
TERIIN
TERIIN
