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सामान्य अध्ययन-2: स्वास्थ्य से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।
संदर्भ: केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत के बायोफार्मास्युटिकल इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने और देश को ‘बायोलॉजिक्स’ (Biologics) और ‘बायोसिमिलर्स’ (Biosimilars) के लिए एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने हेतु पांच वर्षों में ₹10,000 करोड़ के परिव्यय के साथ बायोफार्मा शक्ति योजना की घोषणा की गई।
अन्य संबंधित जानकारी

- इस योजना की घोषणा भारत में कैंसर, मधुमेह और स्व-प्रतिरक्षी (ऑटोइम्यून) विकारों जैसे गैर-संक्रामक रोगों (NCDs) के बढ़ते मामलों के मद्देनजर की गई थी क्योंकि इनके लिए ‘बायोलॉजिक’ दवाओं का अत्यधिक महत्त्व है।
- योजना का उद्देश्य बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना और उच्च मूल्य वाली दवाओं के लिए आयात पर निर्भरता को कम करना है।
- बजट में बायोफार्मा शिक्षा, अनुसंधान, नैदानिक परीक्षण एवं नियामक क्षमता के समन्वय हेतु एक एकीकृत ढांचे प्रस्तावित है।
- यह घोषणा वैश्विक व्यापार अस्थिरता, विशेष रूप से पेटेंट दवाओं पर आरोपित उच्च शुल्कों के प्रति भारत की एक रणनीतिक प्रतिक्रिया है। यह जेनेरिक दवाओं की सीमाओं से परे जाकर फार्मास्युटिकल ‘मूल्य शृंखला’ में भारत की स्थिति सुदृढ़ करने की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
बायोफार्मा शक्ति योजना के बारे में
- बायोफार्मा शक्ति/SHAKTI (स्ट्रेटेजी फॉर हेल्थकेयर एडवांसमेंट थ्रू नॉलेज टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन) योजना का उद्देश्य अनुसंधान, विनिर्माण, परीक्षण और विनियमन को कवर करते हुए भारत में बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स के लिए एक व्यापक इकोसिस्टम तैयार करना है।
- यह योजना बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स के घरेलू विकास एवं बड़े पैमाने पर उनके विनिर्माण के लिए सहायता प्रदान करती है।
- बायोलॉजिक्स जीवित जीवों जैसे कोशिकीय जीवाणुओं या जंतुओं से व्युत्पन्न जटिल औषधियाँ हैं जिनका उपयोग रोगों के उपचार हेतु किया जाता है; जबकि बायोसिमिलर्स अनुमोदित बायोलॉजिक्स के अत्यधिक समान एवं लगभग समरूप संस्करण होते हैं, जो दवाओं की सुलभता बढ़ाते हैं और उपचार की लागत को कम कर सकते हैं।
- नए और उन्नत संस्थान: योजना के तहत तीन नए राष्ट्रीय औषधि शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (NIPERs) स्थापित किए जाएंगे और सात मौजूदा संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा ताकि उच्च-स्तरीय बायोफार्मा अनुसंधान और नवाचार पर केंद्रित एक नेटवर्क विकसित किया जा सके।
- नैदानिक परीक्षण का विस्तार: 1,000 से अधिक मान्यता प्राप्त नैदानिक परीक्षण स्थलों का एक राष्ट्रव्यापी नेटवर्क विकसित किया जाएगा। यह न केवल नैदानिक अनुसंधान में तेजी लाएगा बल्कि भारत को वैश्विक परीक्षणों के लिए एक पसंदीदा गंतव्य के रूप में भी स्थापित करेगा।
- बजट में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) को सशक्त बनाने हेतु एक समर्पित ‘वैज्ञानिक समीक्षा संवर्ग’ (Scientific Review Cadre) और विशेषज्ञों की नियुक्ति का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य औषधि अनुमोदन की प्रक्रिया में तेजी लाना तथा नियामक मानकों में वैश्विक मानदंडों के अनुरूप सुधार करना है।
- नवाचार और प्रतिभा विकास: उद्योग, शिक्षा जगत और शोध संस्थानों के बीच समन्वय स्थापित करके यह पहल उच्च प्रभाव वाले बायोटेक नवाचार को गति देगी, जिससे इस क्षेत्र में कुशल पेशेवरों का संवर्ग तैयार होगा।

बायोफार्मा शक्ति योजना का महत्व
- भारत में बदलती रोग प्रवृत्तियों के अनुरूप: भारत की कुल मृत्यु दर में गैर-संक्रामक रोगों से होने वाली मौतों की हिस्सेदारी लगभग 63% है। इस योजना के तहत मधुमेह और कैंसर के दीर्घकालिक प्रबंधन के लिए आवश्यक घरेलू बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर क्षमता निर्माण किया जाएगा।
- वैश्विक व्यापार झटकों से भारत के फार्मा क्षेत्र की सुरक्षा: 2025 में अमेरिका द्वारा ब्रांडेड और पेटेंट दवाओं के आयात पर उच्च शुल्क की घोषणा किए जाने के परिणामस्वरूप यह योजना निर्यात को जेनेरिक्स से बायोसिमिलर्स की ओर प्रशस्त कर व्यापार जोखिमों को कम करती है।
- “विश्व की फार्मेसी” से “बायोफार्मा हब” की ओर संक्रमण: भारत, वर्तमान में वैश्विक जेनेरिक दवाओं की मांग के 20% की आपूर्ति करता है; यह योजना उच्च-मूल्य वाले बायोलॉजिक्स की ओर संक्रमण को सुगम बनाएगी और फार्मास्यूटिकल मूल्य श्रृंखला में भारत को आगे बढ़ने में मदद करेगी।
- नियामक बाजारों में निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता: चूंकि भारत के फार्मा निर्यात का 50% से अधिक अमेरिका और यूरोप जैसे अत्यधिक विनियमित बाजारों को होता है, इसलिए नियामक क्षमता में निवेश, निर्यात स्थिरता को बढ़ाता है।
- भारत के फार्मा उद्योग की दीर्घकालिक वृद्धि का संरक्षण: वित्त वर्ष 2024-25 में फार्मा क्षेत्र के ₹4.72 लाख करोड़ के टर्नओवर और 7% की वार्षिक चक्रवृद्धि वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ते निर्यात को देखते हुए ‘बायोफार्मा शक्ति’ योजना नवाचार-संचालित क्षेत्रों में विस्तार को सुदृढ़ करके जेनेरिक-आधारित विकास की संरचनात्मक सीमाओं का समाधान करेगी।
- स्वास्थ्य सुरक्षा और आर्थिक रणनीति के अनुरूप: महत्वपूर्ण बायोलॉजिक दवाओं के उत्पादन का स्थानीयकरण करके, यह योजना स्वास्थ्य सुरक्षा को बढ़ाती है, आयात पर निर्भरता कम करती है और कुशल रोजगारों का सृजन करती है तथा भारत की आर्थिक व रणनीतिक स्वायत्ता में सुधार करती है।
भारत के बायोफार्मा क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण हेतु सरकारी पहल
- राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन टीकों, उपचारों, निदान और चिकित्सा उपकरणों में नवाचार का समर्थन करता है।
- BIRAC देशभर में बायोटेक स्टार्टअप्स को फंडिंग, इनक्यूबेशन और मेंटरशिप प्रदान करता है।
- उत्पादन सह प्रोत्साहन (PLI) योजना: घरेलू फार्मास्युटिकल और बायोफार्मा विनिर्माण को बढ़ावा देती है।
- फार्मा-मेडटेक अनुसंधान और नवाचार प्रोत्साहन (PRIP) योजना: उन्नत दवा और उपकरण अनुसंधान का समर्थन करती है।
- BioE3 नीति टिकाऊ बायो-मैन्युफैक्चरिंग और जैव प्रौद्योगिकी संचालित आर्थिक विकास पर केंद्रित है।
- बायो राइड (Bio RIDE) योजना अनुसंधान, नवाचार, उद्यमिता और बायो-मैन्युफैक्चरिंग सहायता का एकीकरण करती है।
