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संदर्भ: जो 2026-27 से 2030-31 तक की पाँच वर्ष की अवधि के लिए 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट 1 फरवरी, 2026 को संसद में पेश की गई।

अन्य संबंधित जानकारी

  • भारत के राष्ट्रपति ने 31 दिसंबर 2023 को डॉ. अरविंद पनगढ़िया की अध्यक्षता में 16वें वित्त आयोग (XVI-FC) का गठन किया था।
  • विचारार्थ विषयों (TOR) के अनुसार, 16वें वित्त आयोग को पाँच वर्ष की अवधि के लिए एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का अधिदेश दिया गया था, जिसमें निम्नलिखित पर अनुशंसाएँ की जानी थीं:
    • संघ और राज्यों के बीच करों की शुद्ध प्राप्तियों का वितरण।
    • ऐसी प्राप्तियों के संबंधित शेयरों का राज्यों के बीच आवंटन।
    • राज्यों को दी जाने वाली सहायता अनुदान ।
    • अन्य मामलों के साथ-साथ आपदा प्रबंधन पहल के वित्तपोषण की व्यवस्था की समीक्षा।

16वें वित्त आयोग की प्रमुख सिफारिशें

  • केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी: आयोग ने पिछले उर्ध्वाधर हस्तांतरण को बरकरार रखा है, जिससे केंद्रीय करों के विभाज्य पूल में राज्यों की हिस्सेदारी 41% बनी रहेगी।
    • हालाँकि, राज्यों के बीच समता और दक्षता को संतुलित करने के लिए पिछले छह मानदंडों में बदलाव के माध्यम से क्षैतिज हस्तांतरण में संशोधन किया गया है।
  • राजकोषीय रोडमैप: आयोग ने अनुशंसा की है कि केंद्र को 2030-31 तक राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3.5% तक नीचे लाना चाहिए।
    • राज्यों के लिए, वार्षिक राजकोषीय घाटे की सीमा जीएसडीपी (GSDP) का 3% रखने की अनुशंसा की गई है। आयोग ने राज्यों के लिए बजट-बाह्य उधारियों (Off-budget borrowings) की प्रथा को सख्ती से बंद करने और ऐसे सभी ऋणों को उनके बजट के अंतर्गत लाने की अनुशंसा भी की है।
    • आयोग ने अनुमान लगाया है कि केंद्र और राज्य सरकारों का संयुक्त ऋण 2026-27 के 77.3% से घटकर 2030-31 में जीडीपी का 73.1% हो जाएगा।
  • सब्सिडी व्यय: राजकोषीय लोकलुभावनवाद को संबोधित करने के लिए, इसने सब्सिडी योजनाओं को तर्कसंगत बनाने और गैर-आवश्यक सब्सिडी के लिए सनसेट क्लॉज‘ (Sunset clauses) पेश करने का सुझाव दिया है।
  • ऊर्जा-क्षेत्र सुधार: आयोग ने अनुशंसा की है कि राज्यों को बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम – DISCOMs) के निजीकरण की दिशा में सक्रिय रूप से प्रयास करना चाहिए।
    • इसने वितरण उपयोगिताओं के पुराने ऋणों को अवशोषित करने और निजी निवेशकों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) बनाने का प्रस्ताव दिया है।
  • सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSE) में सुधार: आयोग ने 308 निष्क्रिय राज्य सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (SPSEs) की समीक्षा करने और उन्हें बंद करने की अनुशंसा की है।
    • इसने निष्क्रिय और खराब प्रदर्शन करने वाले SPSEs को लक्षित करने के लिए राज्य-स्तरीय PSE विनिवेश नीति तैयार करने की अनुशंसा की है।

हस्तांतरण के मानदंड

16वें वित्त आयोग ने राज्यों के बीच केंद्रीय करों के वितरण के लिए निम्नलिखित मानदंडों का उपयोग किया है:

हस्तांतरण मानदंडों और हालिया परिवर्तनों की व्याख्या

  • प्रति व्यक्ति GSDP दूरी (आय की दूरी): 16वें वित्त आयोग ने आय की दूरी को एक राज्य के प्रति व्यक्ति जीएसडीपी और उच्चतम प्रति व्यक्ति जीएसडीपी वाले शीर्ष तीन बड़े राज्यों के औसत के बीच के अंतर के रूप में परिभाषित किया है।
    • प्रति व्यक्ति जीएसडीपी की गणना 2018-19 और 2023-24 (महामारी वर्ष 2020-21 को छोड़कर) के औसत के रूप में की गई है।
    • समता को बढ़ावा देने के लिए कम आय वाले राज्यों को उच्च हिस्सा प्राप्त होता है।
  • जनसंख्या (2011 की जनगणना): वितरण, 2011 की जनगणना के अनुसार प्रत्येक राज्य की जनसंख्या हिस्सेदारी पर आधारित है।
  • जनसांख्यिकीय प्रदर्शन: 15वें वित्त आयोग ने कुल प्रजनन दर (TFR) के आधार पर जनसंख्या को नियंत्रित करने वाले राज्यों को पुरस्कृत करने के लिए यह मापदंड पेश किया था। 16वें वित्त आयोग ने TFR के बजाय 1971 और 2011 के बीच जनसंख्या वृद्धि को मापने के लिए इस मानदंड को पुनः परिभाषित किया है।
    • कम जनसंख्या वृद्धि वाले राज्यों की इस मापदंड के तहत उच्च हिस्सेदारी होगी।
  • क्षेत्रफल: यह किसी राज्य के भौगोलिक आकार के आधार पर हस्तांतरण से संबंधित है। 16वें वित्त आयोग ने इसके भारांक (वेटेज) को कम कर दिया है, जिससे भौगोलिक रूप से बड़े राज्यों को पहले मिलने वाले लाभ को सीमित कर दिया गया है।
  • वन और पारिस्थितिकी: हालाँकि भारांक समान है, लेकिन 16वें वित्त आयोग ने 15वें वित्त आयोग के पहले के मापदंडों को बनाए रखते हुए दो नए मापदंड पेश किए हैं।
    • 15वें वित्त आयोग ने केवल सघन और मध्यम सघन वनों पर विचार किया था।
    • 16वां वित्त आयोग 2015 और 2023 के बीच वन आवरण में वृद्धि में राज्य की हिस्सेदारी को जोड़ता है, और कुल वन क्षेत्र में खुले वनों को भी शामिल करता है।
  • जीडीपी में योगदान: 16वें वित्त आयोग ने राष्ट्रीय जीडीपी में योगदान को ध्यान में रखने के लिए यह नया मापदंड पेश किया है।
    • जीडीपी में किसी राज्य के योगदान की गणना उसके जीएसडीपी के वर्गमूल और सभी राज्यों के जीएसडीपी के वर्गमूल के योग के अनुपात के रूप में की जाती है।
  • कर और राजकोषीय प्रयासों को समाप्त करना: उच्च कर संग्रह दक्षता को पुरस्कृत करने वाले पिछले मापदंड के सरलीकरण और जीडीपी योगदान के साथ ओवरलैप को कम करने के लिए समाप्त कर दिया गया है।

सहायता अनुदान

  • 16वें वित्त आयोग ने पाँच वर्ष की अवधि में 9.47 लाख करोड़ रुपये के अनुदान की अनुशंसा की है। इनमें शामिल हैं:
    1. शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकाय: आयोग ने क्रमशः ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों के लिए 4.4 लाख करोड़ रुपये और 3.6 लाख करोड़ रुपये के अनुदान की अनुशंसा की है।
    2. आपदा प्रबंधन: आयोग ने राज्य आपदा जोखिम प्रबंधन कोष (SDRF और SDMF) के लिए 2,04,401 करोड़ रुपये के आपदा प्रबंधन कोष की अनुशंसा की है। केंद्र और राज्यों के बीच लागत-साझाकरण का पैटर्न इस प्रकार अनुशंसित है: (i) उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों के लिए 90:10, (ii) अन्य सभी राज्यों के लिए 75:25
  • 16वें वित्त आयोग ने 15वें वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित निम्नलिखित अनुदानों को बंद कर दिया है:

(i) राजस्व घाटा अनुदान

(ii) क्षेत्र-विशिष्ट अनुदान

(iii) राज्य-विशिष्ट अनुदान

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