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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।   

संदर्भ: केंद्रीय बजट 2026-27 में, केंद्रीय वित्त मंत्री ने ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में ‘समर्पित रेयर अर्थ कॉरिडोर’ की स्थापना का प्रस्ताव रखा है।

अन्य संबंधित जानकारी: 

  • इन कॉरिडोर का उद्देश्य खनिज समृद्ध तटीय राज्यों में रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (Rare Earth Permanent Magnets – REPM) के खनन, प्रसंस्करण, अनुसंधान और विनिर्माण को बढ़ावा देना है।
  • यह घोषणा हाल ही में शुरू की गई ‘रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट विनिर्माण योजना’ पर आधारित है।
  • ये पहलें आत्मनिर्भर भारत, नेट जीरो 2070 और विकसित भारत @2047 की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप हैं, जो भारत को वैश्विक उन्नत-सामग्री मूल्य श्रृंखलाओं में एक प्रमुख अग्रणी के रूप में स्थापित करती हैं।

पहल की मुख्य विशेषताएँ:

  • परिचय: रेयर अर्थ कॉरिडोर एकीकृत औद्योगिक और लॉजिस्टिक पारिस्थितिकी तंत्र हैं, जिन्हें एक विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र के भीतर खनन से लेकर उच्च-मूल्य वाले तैयार उत्पादों के विनिर्माण तक संपूर्ण ‘रेयर अर्थ मूल्य श्रृंखला’ को एकीकृत करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • लक्षित राज्य: ये कॉरिडोर चार खनिज समृद्ध तटीय राज्यों: ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में विकसित किए जाएंगे।
    • भारत में रेयर अर्थ खनिजों का प्राथमिक स्रोत तटीय रेत खनिज (बीच सैंड मिनरल) हैं, जिनमें यूरेनियम और थोरियम के साथ मोनाजाइट पाया जाता है।
    • भारत के पास 13.15 मिलियन टन मोनाजाइट का भंडार है, जिसमें अनुमानित 7.23 मिलियन टन रेयर-अर्थ ऑक्साइड (REO) मौजूद है।
  • एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र: पारंपरिक परिवहन मार्गों के विपरीत, ये कॉरिडोर समन्वित औद्योगिक क्षेत्रों के रूप में कार्य करते हैं जो खनन, प्रसंस्करण, अनुसंधान और विनिर्माण को एकीकृत करते हैं।
  • रणनीतिक उद्देश्य: इसका प्राथमिक लक्ष्य रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) के आयात पर रणनीतिक निर्भरता को कम करना है, विशेष रूप से चीन पर, जो वैश्विक रेयर अर्थ प्रसंस्करण में प्रभुत्व रखता है। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक वाहन (EV), सेमीकंडक्टर, रक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों के लिए आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करना है। 

रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) योजना:

  • भारत सरकार ने उच्च-प्रदर्शन वाले चुंबकों के लिए एक घरेलू एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करने हेतु नवंबर 2025 में “सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) के विनिर्माण को बढ़ावा देने की योजना” को मंजूरी दी थी।
  • इसका लक्ष्य प्रति वर्ष 6,000 मीट्रिक टन की एकीकृत चुंबक विनिर्माण क्षमता का समर्थन करना है।
  • प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से पाँच लाभार्थियों का चयन किया जाएगा, जिनमें से प्रत्येक की क्षमता 1,200 मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) तक होगी।
  • इसके तहत ₹6,450 करोड़ का बिक्री-संबद्ध प्रोत्साहन और ₹750 करोड़ की पूंजीगत सब्सिडी प्रदान की जाएगी।

पहल का महत्व: 

  • आयात प्रतिस्थापन (आत्मनिर्भर भारत): वर्ष 2022-25 के बीच परमानेंट मैग्नेटके मूल्य का 60-80% और मात्रा की दृष्टि से 85-90% चीन से प्राप्त किया गया था। इस निर्भरता को कम करके भारत अपनी घरेलू क्षमता को मजबूत करने और महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करने का लक्ष्य रखता है।
  • स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण: रेयर अर्थ मैग्नेट इलेक्ट्रिक वाहन मोटरों और पवन टरबाइन जनरेटरों के लिए अनिवार्य हैं, जो भारत के नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार और इसके ‘नेट जीरो 2070’ विजन दोनों के लिए मुख्य हैं। केंद्रीय बजट में घोषित कॉरिडोर यह सुनिश्चित करेंगे कि खनिज समृद्ध राज्य इस संक्रमण में प्रत्यक्ष रूप से अपना योगदान दें।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा: एयरोस्पेस सिस्टम, रक्षा उपकरण और सटीक सेंसर के लिए ये चुंबक अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। घरेलू कॉरिडोर और विनिर्माण क्षमता रणनीतिक अनुप्रयोगों के लिए सुरक्षित पहुँच सुनिश्चित करते हैं।
  • रेयर अर्थ मैग्नेट एयरोस्पेस सिस्टम, रक्षा उपकरण और सटीक सेंसर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। घरेलू कॉरिडोर और विनिर्माण क्षमता रणनीतिक अनुप्रयोगों के लिए सुरक्षित पहुँच सुनिश्चित करते हैं, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के व्यवधानों के प्रति संवेदनशीलता कम होती है।    
  • नीतिगत और संस्थागत सुधार: ये पहलें खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम (MMDR अधिनियम, 2023 में संशोधित) के तहत किए गए सुधारों की पूरक हैं, जिसने महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनिरल) की एक समर्पित सूची पेश की और अन्वेषण एवं खनन को निजी भागीदारी के लिए खोल दिया।

Source:
PIB
Indian Express
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